Tuesday, August 11, 2020

"RADIANCE" Part - II

Hello friends,
                       If you haven't read it's first part, than please read it first, than you will get connected easily with this second part.



       अगली सुबह 6:00 बजे ही रोहित के दरवाजे पर दस्तक हुई।रोहित अभी सोकर नहीं उठा था। लेकिन दरवाजे की आवाज से उसकी नींद खुल गई। और अपनी आँखें मलते हुए, उसने दरवाजा खोला, और सामने अविनाश को खड़ा पाया।


रोहित :- "Hey good morning!!!"

अविनाश :- 'Good morning! हाँ, तो बताओ, क्या help करूँ।"

रोहित :- (आश्चर्य से) "क्या??? इतनी सुबह - सुबह!!! तुम्हे रात को नींद नही आई क्या? मतलब आपको??"

अविनाश :- (रोहित के flat में अंदर आते हुए) "मैं इसी time तक ready हो जाता हूँ, मुझे सुबह जल्दी उठने की आदत है। और मैने कल भी तुम्हे कहा था, की तुम मुझे "तुम" कह कर बुला सकते हो, मुझे नही कोई problem है। ये बार-बार तुम और आप में confuse नही होना पड़ेगा।"

रोहित :- (अपने flat का दरवाज़ा बन्द करते हुए) "हाँ वो तो ठीक है, लेकिन फिर office में भी "तुम" बोलूंगा तो अच्छा नही लगेगा। तो आप को आप ही रहने देते हैं। वो तो तुम्हारी...... आपकी age बराबर की ही लगती है ना, इसलिए बार-बार "तुम" ही निकलता है। लेकिन आदत में आ जायेगा तो फिर इतना awkward नही लगेगा।"

अविनाश :- (कल खरीद कर लाये सामान को देखते हुए) "तो मतलब अभी मुझसे बात करना तुम्हे awkward लगता है।"

रोहित :- (मुस्कुराते हुए) "अरे नहीं! मुझे तो बहुत अच्छा लगता है, जब आपके पास होता हूं। मेरा मतलब है कि ये जो तुम-आप, तुम-आप हो रहा है ना, वो ठीक हो जाएगा थोड़े time बाद।"

अविनाश :- "तो मतलब मेरे साथ होने से तुम्हे अच्छा लगता है?"

        
         रोहित समझ तो गया था, कि उसने कुछ ऐसा बोल दिया है, जिसे अब वह explain नहीं कर सकता। अभी वह अविनाश को इतने अच्छे से भी नहीं जानता था, कि उसके साथ हंसी मजाक कर सके। और अविनाश के इस सवाल का जवाब वो हां या ना में भी नहीं दे सकता था। तो उसने बात काटना ही सही समझा।


रोहित :- "मैं बस 5-10 minutes में नहा-धोकर आता हूँ। तब तक आप अंदर room में wait करलो, फिर हम ये set कर लेंगे।"



          इतना कहकर रोहित जल्दी से bathroom में घुस जाता है। वैसे तो रोहित को नहाने-धोने की ऐसी कोई जल्दी नहीं थी। लेकिन इस बातचीत को टालने का रोहित के पास इससे अच्छा कोई उपाय भी नहीं था। 10 minute बाद जब रोहित bathroom से बाहर आया, तो अपने घर का नया रूप देखकर एकदम दंग रह गया। सारा घर साफ हो चुका था, और किसी नए paint किए हुए घर की तरह चम-चमा रहा था। जो भी थोड़ा बहुत सामान रोहित कल बाजार से लाया था, और जो अभी तक थैलों में भरा, उसके घर के फर्श पर, एक कोने में पड़ा हुआ था। वह सब भी व्यवस्थित तरीके से सजा हुआ था। रोहित ने अपने कमरे में झांका, तो वहां भी एक दम साफ सफाई थी। रोहित का बिस्तर भी सलीके से बना हुआ था, और उसका सारा सामान भी अच्छे से जमाया हुआ था। रोहित आगे बढ़कर hall से होता हुआ, kitchen की तरफ़ मुड़ा, तो वहां भी सारा सामान अच्छी तरह से, किसी सुंदर kitchen का रूप लिए हुए था। और अविनाश एक पतीले में शायद चाय और दूसरे पतीले में maggi बना रहा था। रोहित यह सब नजारा आश्चर्यचकित हुए देखे जा रहा था। रोहित को अपनी आंखों पर विश्वास करना मुश्किल हो रहा था,  कि अविनाश ने सिर्फ 10 minute में, वह भी बिना किसी आवाज किए, उसके घर का यह सुंदर काया कल्प कैसे कर दिया।



अविनाश :- (Kitchen में काम करते हुए) "आ जाओ, मैने तुम्हारे लिए breakfast बना दिया है। कुछ और मिला नही तो maggi ही बना दी।"

रोहित :- (आश्चर्य से) "तुमने इतनी जल्दी ये सब कैसे किआ???"

अविनाश :- "यहाँ ज्यादा कुछ करने को था ही कहाँ?? अच्छा ये hall थोड़ा खाली लग रहा है, इसके लिए sofa या कोई furniture ले सकते हो।"

रोहित :- "हाँ!!! अब next month लूंगा, अभी तो घर से पैसे मंगवा कर इस flat की lease ली है। salary आ जाये, फिर ले लूंगा।"

अविनाश :- "मेरे पास एक extra sofa पड़ा है। मैं अपने पुराने घर से साथ ले आया था। थोड़ा old fashion है, अगर चाहो तो वो ले सकते हो।"

रोहित :- "अरे नही!!! मैं next month तक ले लूंगा। अब इतनी help की है, वो ही काफी है। और help लेता हुआ, अच्छा नही लगूंगा।"

अविनाश :- (रोहित को maggi और चाय देते हुए) "तो मैं कोनसा free में लेने के लिए कह रहा हूँ। Half rate में ले लेना। मेरे पास तो extra ही पड़ा हुआ है। और next month जब सैलरी आ जाये तब मुझे pay कर देना।"

रोहित :- (चाय पीते हुए) "Ok!!! अच्छा option है!!! Hmmmmmm..... चाय तो काफी अच्छी बनाई है। बिल्कुल office canteen जैसी।"

अविनाश :- "Hmmmmm..... मैने तुम्हे कहते सुना था office में, की canteen की चाय तुम्हे बहुत अच्छी लगती है। इसलिए ठीक वैसी ही बनाने की कोशिश की थी।"

रोहित :- "Ohhhh!!!इतना ध्यान!!! Very good!!!और तुम्हारी चाय और maggi कहाँ है??? क्या सिर्फ मेरे लिए ही बनाई है???"

अविनाश :- "हाँ!! मैं तो breakfast करके आया हूँ, तो अब बिल्कुल मन नही।"

रोहित :- "Ok!! And thanks for all this, अगर तुम help नही करते तो मेरा सारा सामान अभी वैसा ही पड़ा होता।"

अविनाश :- (रोहित के घर से बाहर जाते हुए) "चलो तुम breakfast करो, मैं वो सोफा साफ करके लाता हूँ।"

रोहित :- (अविनाश के पीछे आते हुए) "अरे मैं भी साथ चलता हूँ, अकेले लाने में दिक्कत होगी।"

अविनाश :- "कोई दिक्कत नही होगी। मैं अकेले ला सकता हूँ। तुम अपना breakfast finish करो।"

रोहित :- (मुस्कुराते हुए) "हाँ!! Strong तो तुम काफी हो मैंने कल notice किआ था।"



          रोहित अविनाश के जाने के बाद दरवाजा बंद करके, अपने kitchen तक भी नहीं पहुंच पाता, तब तक वापस door bell बज जाती है। रोहित वापस जाकर दरवाजा खोलता है, तो अविनाश ही बाहर sofa लेकर खड़ा था।


रोहित :- "अरे अभी तो गए ही थे? क्या पहले से ही बाहर लाकर रख लिया था  ये sofa??"

अविनाश :-(sofa धकेल कर रोहित के hall में रखते हुए) "जो चीज़ जिसकी हो, उतनी जल्दी उसके पास पहुंच जाए, उतना अच्छा।"

रोहित :- "Hmmmmm.... लेकिन अभी तो तुम्हारी ही है, next month मेरी हो जाएगी ये चीज़। वैसे ये पुराना नही, काफी पुराना लग रहा है, एक दम antique type! आज कल इस तरीके का काम, वो भी sofa पर तो बिल्कुल नही मिलता। काफ़ी महँगा होगा ये तो??"

अविनाश :- "नहीं महँगा तो नही, लेकिन बहुत खास जरूर है, और बिल्कुल महँगा नही। चलो अब तुम आराम करो, कोई जरूरत हो तो बताना।"



         इतना कहकर अविनाश वापस अपने flat में चला गया। और रोहित के पास भी अब कोई काम नहीं बचा था। उसका सारा काम तो अविनाश ने मिनटों में ही खत्म कर दिया था। तो रोहित ने free समय पाकर इंदौर अपने घर video call कर अपने मम्मी पापा को अपने नए घर के दर्शन कराए। फिर अपने मुंबई वाले दोस्त और uncle aunty से भी phone पर बात की, और उन्हें भी अपने नए घर पर आने का न्योता दिया। और फिर अपनी diary को भी समय दिया।



"Dear diary,
                      जिसे मैं अभी तक सिर्फ eye candy समझ रहा था, वह तो बहुत ही ज्यादा strong, fast और बहुत ही helpful निकला। जब से मैं यहां आया हूं, तब से ही वह मेरी help कर रहा है। कल भी सारे सामान को बड़ी आसानी से मेरे flat तक पहुंचाया। और आज सारे घर की सफाई भी उसने अकेले ने ही की। और अभी अपना sofa भी मुझे दे गया। बहुत ही अच्छा बंदा है। और एक बात बताऊं, आज बातों ही बातों में मैंने उसे कह भी दिया, कि मुझे तो अच्छा लगता है, उसके साथ रहना। उसने भी notice कर लिया था। लेकिन फिर मैंने टाल दी वो बात। पता है, कल जब उसे पहली बार देखा ना, तो थोड़ा akward हो गया था, लेकिन आज उतना ही आसान लग रहा था। पता है, अभी भी पूरे घर में उसी की खुशबू आ रही है। ऐसा लग रहा है, जैसे यही आस पास है वह। और आज तो उसने मेरे लिए अपने हाथों से maggi और चाय भी बनाई। 100% relationship material है यह बंदा तो। वैसे मैंने अभी तक try भी नहीं किया है उस पर। straight लगता है। और office में senior है, Training officer है, इसलिए और मैं आगे नहीं बढ़ना चाहता। अभी तो training भी खत्म नहीं हुई। तो शुरू में ही पंगे नहीं चाहिए मुझे। और ऐसी job, वो भी मेरी degree के साथ, पता नहीं मुझे दोबारा मिलेगी भी या नहीं। इसलिए a big NO!!! और कितनी भी अच्छाई क्यों ना हो, बंदा बहुत खड़ूस है। चलो office का तो समझ आता है, आपको थोड़ा strickt रहना पड़ता होगा। लेकिन कल से मेरे साथ तो personal terms पर ही तो बात हो रही है ना, लेकिन फिर भी मैंने एक बार भी smile करते नहीं देखा उसे। इसलिए eye candy ही ठीक है। देख कर अच्छा लगता है, उसके साथ रहकर अच्छा लगता है, बस इतना ही काफी है। अरे flat के कुछ pics click करता हूं, और upload करता हूं, whatsapp और facebook पर। रोहन को भी तो थोड़ी मिर्ची लगानी है। Ok! Bye for now!! रात में मिलते हैं।"



         आज दोपहर में भी रोहित ने maggi से ही अपना पेट भरा। लेकिन रात को 8:00 बजे जब उसे भूख लगी, तो उसे फिर से maggi खाने का बिल्कुल मन नहीं हुआ। बहुत सोच-विचार के बाद, उसने तय किया, कि अभी बाहर ही कुछ खा आता है, और लौटते वक्त, आगे के खाने के लिए राशन और सब्जी लेते आएगा। रोहित तैयार होकर अपने flat का lock लगाता है, और सोचता है कि अविनाश को भी साथ चलने का पूछ लेता है। लेकिन उसे सुबह अपनी diary से की हुई बातें याद आती हैं, और वह अविनाश से दूरी बनाना ही सही समझ कर, अकेले ही lift की ओर बढ़ने लगता है। तभी अविनाश के flat का दरवाजा खुलता है। रोहित पलट कर देखता है, तो अविनाश अपने flat का दरवाजा lock कर उसकी तरफ ही आ रहा होता है।


अविनाश :- (रोहित की तरफ आते हुए) "मुझे क्यों नही बुलाया??"

रोहित :- (Lift का button दबाते हुए) "अरे मुझे लगा कि आप busy होंगे। और अब तो मुझे यही रहना है, तो कब तक हर काम के लिए आपकी help लेता रहूंगा।"

अविनाश :- "इतना ज्यादा भी सोचने की जरूरत नही है वैसे। अब तो हम पड़ोसी हैं, तो ये सब तो चलता ही रहेगा।"



         तभी lift  के दरवाजे खुलते हैं , और दोनों lift के अंदर आ जाते हैं। और रोहित अविनाश की तरफ मुस्कुरा कर देखता हुआ सोचता है, कि "जितना इससे दूर जाने का सोचो,उतना ही यह पास आता जा रहा है। अगर ऐसा ही चलता रहा, तो मैं कैसे इससे दूर रह पाऊंगा। अभी तो सिर्फ attraction है, लेकिन कभी ना कभी तो यह feelings तो आगे बढ़ेगी ही ना। God knows क्या होगा?" कि तभी अविनाश भी रोहित की तरफ देख कर मुस्कुरा देता है।



रोहित :- (आश्चर्य से) "तुम मुस्कुराते भी हो??"

अविनाश :- (मुस्कुरा कर) "हाँ!! सभी मुस्कुराते हैं, इसमे कोई अजीब बात थोड़ी है।"

रोहित :- "हाँ!! लेकिन जबसे मैंने तुम्हें देखा है, मैंने तो मुस्कुराते हुए नही देखा। ये मेरा first time है। वैसे मुस्कुराया करो, तुम smile करते हुए, और भी ज्यादा cute लगते हो।"



        अविनाश मुस्कुराकर रोहित को "Thanks" कहता है, और दोनों lift से बाहर आ जाते हैं। लेकिन अब रोहित को अविनाश की आंखों में एक अलग ही चमक नज़र आने लगती है। दोनों building के पास वाले market में आ जाते हैं। रास्ते भर रोहित खुद को कोसता रहता है, कि "ये cute लगने वाली बात बोलने की क्या जरूरत थी" । दोनों रोहित के लिए राशन और सब्जी खरीदते हैं। रोहित पास ही के एक chainese counter पर खाने के लिए रुकता है।


रोहित :- "तुम्हे chainese पसंद है??"

अविनाश :- "मुझे तो इन्दौरी पसंद है!!"

रोहित :- (आश्चर्य से अविनाश की ओर देखते हुए) "क्या??"

अविनाश :- "अरे इस समय, इंदौर के सराफा बाजार में जो चाट market लगता है ना, मुझे वो बहुत पसंद है।"

रोहित :- "अच्छा!!!! मैं भी इंदौर से ही हूँ। मुझे भी वहाँ की चाट बहुत पसंद है। लेकिन अभी तो हम यहाँ है, तो बताओ क्या खाओगे तुम?"

अविनाश :- "नहीं! मैं कुछ नही खाऊंगा, मैं तो dinner करके आया हूँ।"

रोहित :- "इतनी जल्दी dinner भी कर लिया तुमने??"

अविनाश:- "हाँ!!! बताया था ना, आदत पड़ गयी है अब, अपने time पर ही खाने की। वैसे तुम manchurian try करो। अच्छा है यहाँ का।"

       रोहित अपने लिये खाना order करता है। और थोड़ी देर बाद दोनों वापस अपने घर लौट आते हैं।


अविनाश :- (अपने flat का lock खोलते हुए) "कल सुबह 8 बजे मुझे लेने cab आएगी। अगर चाहो तो मेरे साथ चल सकते हो।"

रोहित :- (अपने flat का lock खोलते हुए) "8:00 बजे!!!!! लेकिन मेरा timing तो 10:30 पर शुरू होता है। इतनी जल्दी जाकर मै क्या करूँगा। तुम निकल जाना, मैं पहुंच जाऊंगा अपने time पर।"




           दोनों एक दूसरे को good night बोल कर वापस अपने अपने flat में आ जाते हैं। रोहित सारा सामान kitchen में रख, अपनी diary में अभी का सारा वाक्या लिखता है। और कुछ देर बाद सोने चला जाता है। आधी रात को रोहित की चौंक कर आंख खुलती है। और वह अपने bedroom में अविनाश को पाता है। रोहित आश्चर्य से बिस्तर से उठकर, कमरे की light on करता है, तो कमरे में उसके अलावा कोई और नहीं होता। वह सोचता है कि "शायद जो वो अविनाश का सपना देख रहा था, इसलिए उसे लगा होगा कि अविनाश वहीं उसके साथ है।" और रोहित light off कर वापस सो जाता है।


            अगली सुबह जब अविनाश office जाने के लिए निकला, lift का button दबाया, कि पीछे से रोहित की आवाज आई।


रोहित :- (जल्दबाज़ी में अपने flat का lock लगाते हुए) "Hey!!! Wait for me!! मैं भी चल रहा हूँ, तुम्हारे साथ।"

अविनाश :- "क्यों??? रात को तो मना कर रहे थे, फिर क्या हुआ?"

रोहित :- "हाँ वो रात को नींद नही आई सही से, और अभी सुबह भी जल्दी आँख खुल गयी। तो सोचा, तुम्हारे साथ ही चला जाऊं। कुछ काम भी pending है, जल्दी जाकर वो भी निपटा लूंगा।"


        Lift को ना आता देख, अविनाश ने security guard को phone लगाया, तो पता चला कि, maintenance के काम की वजह से lift बंद है, और 2 घंटे बंद ही रहेगी। दोनों को stairs से ही नीचे आना पड़ा। लेकिन नीचे आते वक्त रोहित अपनी बातों में इतना खोया था, कि उसे 1 stair का अंदाजा ही नहीं रहा, और वह गिरने ही वाला था, कि अविनाश ने उसका हाथ पकड़कर उसे संभाल लिया।



रोहित :- (हाँफते हुए) "Thanks!!! अग़र तुम नही पकड़ते तो आज बहुत चोट लगने वाली थी मुझे।"

अविनाश :- "Hmmmm.... तुम्हारा ध्यान जो सिर्फ बातों में था।"

रोहित :- (अविनाश का हाँथ छोड़, अपने कपड़े सही करते हुए) "लेकिन तुम्हारे हाँथ क्यों इतने ठंडे है? यहाँ तो AC भी नही है!!"

अविनाश :- "पता नही! मैने notice नही किआ।"


            दोनों cab से office आ जाते हैं। और अपने अपने कामों में व्यस्त हो जाते हैं। training के दौरान, रोहित कई बार अविनाश को देखकर smile pass करता है, लेकिन अब अविनाश के भी बर्ताव में, रोहित को लेकर अंतर आने लगता है। अब अविनाश भी रोहित की smile का उत्तर अपनी मुस्कुराहट से देता है, और अब पहले से कहीं ज्यादा रोहित पर ध्यान देता है। रोहित के पास जाकर उसके कंधे पर हाथ रखकर उसे कई techniques बताता है। अविनाश के व्यवहार को देखकर अब रोहित को भी समझ आने लगा है, कि अविनाश भी अब उसमें interest दिखा रहा है।



               Lunch time में भी रोहित सारी canteen में बार-बार अपनी नजरें दौड़ाकर अविनाश को ही तलाशता है। लेकिन उसे अविनाश कहीं भी नजर नहीं आता। शाम को office के बाद अविनाश रोहित को call करता है। और अपनी ही cab में साथ वापस चलने को कहता है।



रोहित :- (Cab में बैठते हुए) "Thanks for the ride!! वैसे मैंने अपना registration कर दिया है, अब कल से मुझे लेने sharing cab आने लगेगी।"

अविनाश :- "उसकी क्या जरूरत थी, मैंने अपनी शिफ्ट 10:00 बजे की select कर ली है, अब तुम मेरे साथ ही आ जाया करो। वैसे भी मैं तो अकेला ही आता जाता हूँ।"

रोहित:- "Ok! मैं office में inform कर दूंगा। वैसे तुम lunch भी कहीं अकेले में करते हो क्या??"

अविनाश:- "मतलब??"

रोहित :- "मैं canteen में तुम्हे देख रहा था, पर तुम कहीं दिखे ही नही।"

अविनाश :- "अरे वो तो मेरी एक client के साथ meeting थी, तो lunch भी उन्ही लोगो के साथ किआ था।"

रोहित :- "Ok! आज रात का क्या plan है? तुम्हे इन्दौरी flavour पसंद है ना, तो रात को मेरे साथ dinner करो। मैं तुम्हारे लिए कुछ special बनाता हूँ।"

अविनाश :- " अरे नहीं!!!  मैंने आज late lunch किया था, तो अब कुछ भी खाने का तो mood नहीं है। लेकिन मुझे खाना बनते देखना और उसकी खुशुब भी बहुत पसंद है। तो अगर तुम्हें कोई problem ना हो, तो मैं आ सकता हूं। तुम्हें खाना बनाते भी देख लूंगा।"

रोहित :- "Ok!! ऐसा तो मैने पहली बार सुना है। But anyways! आ जाना! मुझे अच्छा लगेगा।"



      रात को ठीक 8 बजे अविनाश, रोहित के flat पर पहुंच जाता है।


अविनाश :- " तो क्या बना रहे हो आज??  लाओ मैं बना देता हूं!! तुम तो hostel में रहते थे। तो मुझे नहीं लगता, कि तुम्हें सही से खाना बनाना भी आता होगा।"

रोहित :- " जब मेरे हाथ का खाना खाओगे, तब बता पाओगे कि मुझे खाना बनाना आता है या नहीं। वैसे सच में तुम्हें बिल्कुल भी भूख नहीं??? अब तो बहुत समय हो गया है, lunch किए हुए, थोड़ी बहुत भूख तो लग ही आई होगी??"

अविनाश :- " नहीं बिल्कुल नहीं!!! और office से आकर मैंने juice भी पी लिया था, तो बिल्कुल भूख नहीं।"

रोहित :- "Ok!! अब तुम तो खाओगे नहीं, तो मैं तो अपने लिए भरमा करेले बनाने का सोच रहा हूं। और मुझे भी करेले खाए बहुत समय हो गया। और यह मेरी पसंदीदा सब्जी है।"



         रोहित अविनाश से बातें करते हुए, करेले काटने लगता है। उसका ध्यान थोड़ा सा चूक जाता है, और चाकू उसके हाथ में लग जाता है। रोहित एक आह की आवाज़ के साथ, चाकू छोड़ अपना हाथ पकड़ने लगता है। और वह चाकू जमीन पर भी नहीं गिर पाता की, पलक झपकते ही hall के sofa पर बैठा अविनाश, तुरंत रोहित के पास, kitchen में पहुंच जाता है। रोहित के हाथ को अविनाश तुरंत sink में नल के नीचे लगाता है। और जितना खून रोहित के हाथों में नहीं होता, उससे कहीं ज्यादा तो अविनाश की आंखों में आ जाता है। धीरे-धीरे अविनाश का चेहरा भी लाल होने लगता है।


अविनाश :- (रोहित को डांटते हुए) "ध्यान कहाँ था तुम्हारा?"

रोहित :- (मुस्कुरा कर, अविनाश की ओर देखते हुए) " इतनी भी ज्यादा चोट नहीं है, जैसा कि तुम reaction दे रहे हो। और इतना क्यों परेशान हो रहे हो, जरा सा cut लगा है बस। चेहरा तो देखो अपना एकदम लाल हो गया है।"



        अविनाश रोहित का हाथ छोड़ता है, और भागता हुआ वहां से निकलकर अपने flat की ओर चला जाता है। रोहित बस सोच ही रहा होता है, कि "इसे क्या हुआ??" और इतने में ही अविनाश first aid box लेकर वापस भी आ जाता है। अविनाश रोहित को अपने साथ hall में लाता है, उसे sofa पर बैठा कर, उसके जख्म की मलहम पट्टी करता है।



अविनाश :- (पट्टी बांधते हुए) " मैंने कहा था ना, कि मैं बना देता हूं। मुझे पता था, कि तुम्हें खाना बनाना नहीं आता है।"

रोहित :- (मुस्कुराते हुए) "ये तुम्हारी ही वजह से ही हुआ है।"

अविनाश :- (रोहित की ओर देखते हुए) "मेरी वजह से???"

रोहित :- " हां!! तुम्हारी वजह से!!  मेरा ध्यान तुम्हारी आंखों की तरफ था। इसलिए वह करेला मेरे हाथ से छूट गया, और चाकू मेरे हाथ में लग गया। लेकिन मैं सही था, तुम्हारी आंखें फिर से अलग रंग की हो गयी हैं।"

अविनाश :- "वैसे मेरी आँखों पर ध्यान देने से ज्यादा important......"



       अविनाश अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाया, कि रोहित ने उसके होठों पर kiss कर दिया। अविनाश पीछे हटा, और बिना कुछ बोले, वहां से जाने लगा। रोहित ने उसका हाथ पकड़कर उसे रोका।


रोहित :- (अविनाश को रोक कर उसके सामने आते हुए) "I am sorry!!! Please इसे भूल जाओ। मैं खो गया था। अब दोबारा नही होगा कभी ऐसा।"


         अविनाश बिना कुछ बोले, अपनी नज़रें झुकाये, बस वहां खड़ा रहता है।


रोहित :- 'Please, I am sorry!!! अब फिर ऐसा नही होगा। कुछ तो बोलो?"

अविनाश :- "I love you!!"

रोहित :- (आश्चर्य से) " तो फिर ऐसे क्यों जा रहे थे?? जैसे मैंने कुछ गलत कर दिया हो। इन तीन-चार दिनों में, इतना तो मुझे भी समझ आ गया था, कि हमारे बीच कुछ तो connection है।"

अविनाश :- (अभी भी अपनी पलकें झुकाये हुए) "लेकिन ये सही नही है।"

रोहित :- " क्या पुराने जमाने की बात कर रहे हो!! अब सभी लोग समझते हैं कि प्यार - प्यार होता है। Gender की boundries में नही बाँध सकते प्यार को!!"

अविनाश :- (रोहित की आँखों मे देखते हुए) "मैं तुम्हारे लिए सही नही हूँ।"

रोहित :- (मुस्कुरा कर, अविनाश के गालों पर हाँथ रखते हुए) " यहां मेरा ख्याल रखते हो, Office में मेरा ख्याल रखते हो, मेरी care करते हो, मुझे पसंद करते हो, और अभी बोला, प्यार भी करते हो। तो तुमसे ज्यादा सही तो मेरे लिए कोई भी नहीं हो सकता।"



        रोहित अविनाश को अपने गले से लगा लेता है, और अविनाश भी रोहित को अपनी बाहों में भर लेता है। और दोनों ही प्यार के सागर में डूब जाते हैं। प्यार की ये चमक इन दोनों को और भी एक दूसरे के करीब, बहुत करीब ले आती है। रोहित कल तक जिन feelings को दबाने के बारे में सोच रहा था, अविनाश के साथ ने उन्हें प्यार की शक्ल दे दी है, जिसे अब चाह कर भी रोहित खुद से दूर नही कर सकता है। और दोनों ही प्यार के एहसास में, एक दूसरे के साथ बहे चले जाते हैं।



         आगे की कहानी क्या मोड़ लेती है? क्या रोहित का प्यार फिर से धोका देगा, या इस बार उम्र भर उसका साथ निभाएगा? अविनाश का ये अजीबोग़रीब बर्ताव रोहित को कितने दिन रास आ पायेगा? के सारि और बाते जानने के लिए बने रहे रोहित और अविनाश के साथ।



Lots of love
Yuvraaj ❤️




















Tuesday, August 4, 2020

"RADIANCE" Part - I

Hello friends,
                         Here I am again, with my new story, "RADIANCE". First time I am gonna try, which I like most. Hope you like my this creation as well as my all previous once.



"Dear diary,
                    आज मैं बहुत खुश हूं। आज मेरा final interview भी clear हो गया। और मुझे मेरी पसंदीदा जगह पर ही job भी मिल गई है। तुम्हें पता है, जब मैंने यह खबर घर पर बताई, तो वो लोग कितने ज्यादा खुश थे, पापा तो कंपनी का नाम भी सही से नहीं ले पा रहे थे। Capgemini!!! इतना भी मुश्किल नहीं है वैसे तो। लेकिन वह बहुत खुश थे। अब तक तो उन्होंने चाचा और बुआ दोनों को ही, थोड़ा बढ़ा चढ़ाकर बता भी दिया होगा, मेरी job के बारे में। लेकिन तुम्हें तो पता ही है, मुझे job की कितनी ज्यादा जरूरत थी। मुझे उसे proof भी तो करना था। लेकिन समझ नहीं आ रहा कैसे करूं। Facebook पर working details show करूं या Whatsapp group में normally inform  कर दूं। उसे पता तो चल जाएगा, लेकिन उसे ज्यादा बुरा किस तरीके से लगेगा।

            Please don't judge me!! अब उसने जो किया उसके लिए मेरा यह reaction तो कुछ भी नहीं है। You know ना उसकी वजह से मुझे 6 month extra कॉलेज को देने पड़े थे। और extended degree के बाद भी मुझे Capgemini में job मिली, तो show off करना तो बनता है। Ok Bye!!! कल मेरा first day है जॉब पर। I am so excited।"




         ये है रोहित!!! जिसे आपने अभी अपनी diary से बात करते पढ़ा। रोहित इंदौर शहर से belong करता है, पर पिछले साढे़ 4 सालों से यहां मुंबई में है। रोहित IIT मुंबई से Computer Science Engineering कर रहा था। और कॉलेज hostel में ही रहता था। घर और दोस्तों से अलग होने के बाद, रोहित ने diary लिखना शुरू किया था। मुंबई में adjust होने में उसकी इस नई रुचि ने उसकी खूब मदद की थी। वैसे तो Engineering 4 सालों में ही complete हो जानी चाहिए थी। लेकिन रोहित ने इसे पूरा करने में 6 महीने ज्यादा का समय लिया था। जिसका कारण था "रोहन"।  अब बाकी सभी के लिए रोहन तो बस रोहित का classmate, अच्छा दोस्त,और final year में roommate ही था।  लेकिन इनके रिश्ते की सच्चाई रोहन, रोहित और उसकी diary को ही पता थी। दोनों अपनी गहरी दोस्ती के चलते final year शुरू होने पर, हॉस्टल की एक ही room में shift हुए थे।  और इस नए रिश्ते की नई उमंगों ने रोहित का ध्यान पढ़ाई से पूरी तरह हटा दिया था। और इसका नतीजा यह निकला कि रोहित अपने final semester में दो subject में fail हो गया था। रोहन तो अच्छे नंबरों से पास भी हुआ और उसे बेंगलुरु की एक नामी ग्रामी कंपनी, में अच्छे पैकेज पर, job भी मिली। और वो रोहित से अपना रिश्ता खत्म कर, अपने नए सफर पर चला गया। रोहित को इस सबसे उबरने में थोड़ा समय लगा। लेकिन अब अच्छे नंबरों से पास होना, अच्छी नौकरी, अच्छी life, यह सब खुद के सुकून से ज्यादा, रोहन को दिखाने के लिए करना ज्यादा जरूरी हो गया था। और इसमें रोहित पास भी हो गया था।



          Hostel से निकले अभी रोहित को 8 दिन ही हुए थे। कॉलेज में तो रोहित को किसी भी campus drive में बैठने को नहीं मिल पाया था, उसके final year के result के कारण। इसलिए उसे खुद ही job search करनी पड़ी थी। पहले रोहित ने मुंबई से ही शुरुआत करने की ठानी। वह पिछले 4 सालों से मुंबई में ही था। यहां local में भी उसके कुछ friends बन गए थे। और उसे मुंबई शहर भी बहुत पसंद था। मुंबई की lifestyle, यहां के लोगों का बर्ताव, यूं तो रोहित ने मुंबई शहर को कॉलेज की पाबंदियों के चलते कम ही जाना था, लेकिन जितनी भी उसने मुंबई शहर में सांस ली थी, उस हवा ने उसके मन में गहरी छाप छोड़ी थी। और उसे इस शहर से और इस शहर की रफ्तार से प्यार हो गया था। और इसी रफ्तार से ताल मिलाकर रोहित बहुत आगे निकल जाना चाहता था। रोहन को, उसके साथ बिताए पलों को और अपने आखिरी semester के result को बिल्कुल अपनी आंखों से मिटा देना चाहता था। Final year के result की वजह से रोहित थोड़ा उदास तो रहता था, लेकिन इस उदासी का सबसे बड़ा कारण उसका result नहीं, रोहन की बेरुखी थी। रोहन बिना रोहित को अलविदा कहे, बिना कोई बात किए, रोहित से अपना रिश्ता खत्म कर, बेंगलुरु चला गया था। पीछे छोड़ गया था तो रोते हुए रोहित को और एक whatsapp message को। जिसमें उसने रोहित से breakup करने और life में आगे बढ़ने की कई सारी बातें लिखी थी। रोहित की उदासी इंदौर में भी उसके घरवालों से नहीं छुपी थी और वे लोग भी रोहित को इंदौर वापस आने पर कई बार जोर दे चुके थे। लेकिन रोहित ने उनसे कुछ समय की मोहलत ली और मुंबई में ही अपने एक दोस्त के घर पर रुक कर job searching में लग गया था। जिसमें उसे कुछ समय बाद ही सफलता भी मिल गई थी




"Dear diary,
                     आज मेरा job पर first day था। मैं बहुत excited भी था, और nervous भी। लेकिन अच्छा atmosphere था office का, ज्यादा किसी को किसी से कोई मतलब नहीं था, सभी अपने ही कामों में लगे हुए थे। मेरे साथ और भी 12 trainee है office में। अब शायद कल से हमारी training शुरू हो जाएगी। शाम को पापा का भी फोन आया था। वे तो अभी से ही मेरी salary के बारे में पूछ रहे थे। अब उन्हें कौन समझाए, कि अभी 6 months तो training ही चलेगी। उसके बाद सब finalize होगा। लेकिन अब मैं सोच रहा हूं, कि rent पर कहीं room search कर लूं। अब तो job भी लग गई है, तो अब यहां रुकना भी सही नहीं रहेगा। वैसे तो uncle-aunty बहुत अच्छे हैं, कुछ कहते भी नहीं है, लेकिन फिर भी, हूं तो बोझ ही ना उन पर। कल से ही मैं room searching पर लग जाता हूं। और एक बात बताऊं, मैं जिस बात के लिए डर रहा था ना, कि सभी मजाक उड़ाएंगे या बात बनाएंगे, मेरे 6 month extension पर, लेकिन पता है, वहां तो किसी ने एक बार भी पूछा भी नहीं, मेरे कॉलेज, academics, project's के बारे में। जैसे किसी को पड़ी ही नहीं है, कि हमने क्या किया है, और क्या नहीं। लेकिन जो भी हो, मुझे तो बहुत अच्छा लग रहा है, अब यहां मुंबई में। और मैंने facebook पर ही update कर दिया है job के बारे में, और मैंने आज office की भी कुछ pics upload की थी। देख तो ली ही होंगी उसने, जल भी गया होगा थोड़ा। अब उसे भी समझ आ जाएगा, जिस job के लिए उसने मुझसे whatsapp पर breakup किया था, उससे अच्छी job है मेरे पास। अब कल मिलते हैं, सोना भी है, और कल से office भी शुरू है।
Bye, Good Night"




           आज रोहित का पहला दिन office में अच्छा गुजरा। शाम को घर आते वक्त एक agent से भी मुलाकात हुई। जो कि बहुत कम fee में, रोहित को एक अच्छा घर ढूंढने में मदद के लिए तैयार भी हो गया। रोहित ने अपने नए घर के लिए कुछ सुविधाओं की एक list भी बनवाई, और जल्द ही कोई अच्छा घर ढूंढने का वादा लिए, अपने दोस्त के घर वापस आ गया। रोहित ने घर वापस आकर अपने दोस्त और उसके मम्मी पापा को तलाशे जा रहे नए घर के बारे में अवगत कराया। थोड़ी सी ना - नुकर के बाद, वे सभी रोहित के लिए बेहद खुश भी हुए। लेकिन आज एक ऐसी घटना भी हुई थी, जो रोहित के दिमाग पर तो गहरी छाप छोड़ गई थी, लेकिन उस बात का जिक्र रोहित ने अपनी diary में नहीं किया था। वैसे मुंबई आने के बाद अभी तक तो ऐसा नहीं हुआ था, कि रोहित ने कोई बात छुपा के अपने मन में दबा ली हो, और dairy में ना लिखी हो। यूं तो वह दिन की हर बात डायरी में नहीं लिखता था, जो बातें उसके दिल या दिमाग में रह जाती थी, वही बातें रात को डायरी में लिखी जाती थी। लेकिन आज कि वह महक अभी भी रोहित के जहन में ताजा थी। लेकिन फिर भी उसका कोई भी ज़िक्र आज diary के पन्नों पर नहीं लिखा गया था।



       रात भर ना जाने किसके ख्यालों में खोए हुए, अगले दिन रोहित की देर से आंख खुली। और वह अपनी training के पहले दिन ही office देरी से पहुंचा। सारा दिन office में बिताने के बाद, शाम को रोहित agent के साथ तीन-चार flat देखने भी गया। और उसमें से एक flat उसे पसंद भी आ गया। वह flat 21 वे floor पर था। जिसकी balcony से मुंबई शहर का अच्छा नजारा दिखाई देता था। और वह flat रोहित के office के भी नजदीक था, और उसके budget में भी था। उसने बिना समय गवाएं agent को उस flat के documents तैयार करने को बोला और रात तक अपने दोस्त के घर वापस आ गया।



"Dear diary,
                      You don't believe आज मेरे साथ क्या हुआ। आज मैं जब office पहुंचा, तो मैं late हो गया था, और training शुरू हो चुकी थी। और तुम विश्वास नहीं करोगी, मेरा training officer कल रात मेरे सपनों में आया था। जब मैं room में enter हुआ, और मैंने उसे देखा। मुझे तो लगा, कि मैं सपना ही देख रहा हूं। उसने शायद मुझे देरी से आने के लिए थोड़ा डाटा भी था। लेकिन सच कहूं, मुझे कुछ याद नहीं। मतलब वह कुछ बोल तो रहा था, लेकिन मुझे सुनाई नहीं दे रहा था, कि वह क्या बोल रहा है। फिर मैंने खुद को चुटकी भरी, तब सब normal हुआ। Actually मैंने उसे देख तो कल ही लिया था, और वह मुझे attractive भी बहुत लगा था। लेकिन मुझे लगा, की ऐसा attraction तो बहुत लोगों को देखकर हो ही जाता है। इसलिए मैंने तुम्हें कल उसके बारे में कुछ नहीं बताया। लेकिन फिर वह कल रात सपने में भी आया, और अब तो वह मेरा training officer भी है। तो अब तो मुझे उसकी हर एक बात तुम्हें बतानी ही पड़ेगी। अरे एक और बात, आज मैंने flat final कर दिया है। अच्छा है, जैसा मुझे चाहिए था, बिल्कुल वैसा ही है। अभी dinner करते समय मैंने uncle-aunty को भी बोल दिया। वह लोग भी खुश थे। घर पर भी फोन करके बताया, मम्मी पापा भी बेहद खुश थे। और मेरी खुशी का तो पूछो ही नहीं। मैं तो बहुत ही ज्यादा खुश हूं। कल तक सारे documents भी तैयार हो जाएंगे, और hopefully 2 - 3 days में मैं वहां shift भी हो जाऊंगा। मैंने उस flat के भी कई pics facebook और whattsapp group पर डाले, देख तो लिए ही होंगे उसने। यह ठीक वैसा ही flat है, जैसा वह लेने के बारे में हमेशा बोलता था। Higher floor, balcony view, good vibes, sunset, hmmmmmmm, देख कर जलेगा, तब समझ आएगा, उसने क्या-क्या अपनी किस्मत से जाने दिया है। Now bye, good night।  मैं कल फिर से late नही होना चाहता। तो मैं जा रहा सोने। कल बात करते है।"



       औरों के लिए diary, अपने विचार, अपनी यादें,  सँजोने का जरिया होती है। लेकिन रोहित के लिए diary उसकी अच्छी दोस्त की तरह थी। मुंबई आने के बाद का अकेलापन और अपनी sexuality का उजागर होना, ये दो सबसे महत्वपूर्ण कारण थे, जिसके लिए रोहित को एक अच्छे दोस्त की जरूरत थी। और उस दोस्त की कमी को पूरा किया था, रोहित की diary ने। इस डायरी में केवल रोहित की यादें नहीं थी, इसमें वे सभी बातें, अच्छे बुरे वाक्ये, रोहित का मुंबई का साडे 4 सालों का वह सफर कैद था, जो शायद रोहित ने कभी भी किसी और से share नहीं किया था।



        अगले दिन रोहित फिर थोड़ी देरी से सो कर उठा। क्योंकि आज फिर रोहित के सपनों में उसके training  officer ने उसे सुलाएं रखा। लेकिन आज रोहित भागते हुए सीधे office पहुंचा, और training शुरू होने से पहले ही, training room तक जा पहुंचा। और तय समय पर आज की training शुरू भी हो गई। Training तो शुरू हो चुकी थी, लेकिन रोहित का ध्यान अपने काम से ज्यादा, training officer पर ही था। आज की अपनी training खत्म कर, शाम को रोहित agent के पास गया। और सारी formalities को पूरा किया। अगले 2 दिन Saturday - sunday रोहित के office का work off था। नए flat में shift होने के लिए यह अच्छा अवसर था। सारे काम निपटा कर रोहित रात को अपने दोस्त के घर वापस आ गया। रात को खाने के बाद उसने अपना कुछ समय अपनी diary के साथ बिताया।


"Dear diary,
                      I am so excited,  कल मैं अपने नए घर में shift हो जाऊंगा। लेकिन थोड़ा बुरा भी लग रहा है। रोहन की याद भी आ रही है। You know ना, यह हमारा सपना था, कि job लगते ही, एक साथ एक ही flat में रहेंगे। अगर एक ही company में job नहीं भी मिली, तो कम से कम weekends और हर शाम तो साथ बीतेगी। रात को dinner साथ में अपने flat की balcony में ही करेंगे। जहां से मुंबई शहर की जगमगाती lights हमारा साथ देंगी, और समुद्र किनारे की ठंडी हवा, हमारी दिन भर की थकान दूर करेगी। अब सब वैसा ही है, बस वह सारे सपने जीने के लिए रोहन ही मेरे साथ नहीं है। मुझे आज बहुत खराब लग रहा है। पता नहीं उसने ऐसा क्यों किया और अगर breakup करना ही था, तो कम से कम एक बार मुझसे मिलकर बात तो करता। हमने इतना बुरा भी समय साथ नहीं बताया था, कि whatsapp पर breakup का message करके मेरा नंबर ही block कर दिया जाए।

            Anyway, वह गाना है ना, एकदम सही है, "इसमें तेरा घाटा, मेरा कुछ नहीं जाता" यही सही है उसके लिए। जी रहा होगा अपनी boring life वहां बिना friends के। और कितने भी अच्छे शहर में चला जाए, लेकिन मुंबई की बराबरी तो कोई भी नहीं कर सकता। और मेरे पास देखो friends भी है, friend की family भी है। नया flat भी है, और एक eye candy भी। हाँ मैंने उसके बारे में तो ज्यादा कुछ बताया ही नहीं। आज ही मुझे उसका नाम पता चला, कल तो मैं late हो गया था, तो intro हो नहीं पाया था। आज जब एक problem के लिए मैंने उसे बुलाया, तब उसने अपना नाम "अविनाश" बताया। नाम तो थोड़ा old faishon है, लेकिन बंदा बहुत कमाल है। क्या मस्त perfume use करता है वो, मन करता है, हमेशा उसके आसपास घूमते रहो। और आज canteen में भी सभी उसके बारे में ही बात कर रहे थे। Python का तो expert है वो, पिछले साल का employee of the year भी वही था। इसलिए ही तो इस tool की training के लिए manegement ने उसे चुना है। और एक trainee तो बता रहा था, कि सबसे ज्यादा projects, with in the time limit, complete करने का record बनाया है, उसने पूरे mumbai में। बहुत सारी companies उसके साथ काम करने के लिए, उसे बहुत अच्छे packages देने को भी घूमती हैं। लगता है यहां भी उसकी salary बहुत ज्यादा ही होगी। लेकिन मुझे इन सब से क्या करना, मुझे तो सबसे ज्यादा उसकी आंखें पसंद है। एकदम काली आंखें हैं उसकी। एक बार उन आंखों में देख लो, तो कहीं और देखने का मन ही नहीं करता। लेकिन बहुत strict है, मैंने अभी तक तो उसे मुस्कुराते हुए नहीं देखा। चलो bye, अब मैं सोता हूं। कल मुझे यहां से packing कर के, अपने नए घर में shift भी करना है। कल बहुत काम रहेगा, शायद मैं कल कुछ ना लिख पाऊं। जब time मिलेगा तब और बताऊंगा अविनाश के बारे में। लेकिन नाम सच में अच्छा नहीं है उसका। चलो bye, good night।"



        अगले दिन रोहित की सुबह जल्दी आँख खुल गई। और वह अपनी packing में लग गया। दोपहर तक रोहित अपने सारे सामान के साथ अपने नए घर पहुंच गया। रोहित के पास ज्यादा सामान तो नहीं था सिर्फ दो बड़े - बड़े भारी suitcases, जिनमें सिर्फ उसके कपड़े, जूते चप्पल, और कुछ जरूरत का सामान था। और एक उसके laptop का backpack। वैसे तो इन दोनों suitcases ने इंदौर से मुंबई का सफर रोहित के साथ ही तय किया था। लेकिन इन साढे 4 सालों में अब तक उनका बोझ पहले से कई गुना बढ़ चुका था। रोहित के नए घर तक पहुंचाने में उसके friend और taxi वाले ने रोहित की बहुत मदद की थी। लेकिन अब उस building के entrance से 21 वे floor  तक का सफर, रोहित को अकेले ही तय करना था। पहले तो रोहित दोनों suitcases को अपने एक एक हाथ से एक साथ खींचने लगा। trolley bag होने की वजह से उसे ऐसा करने में ज्यादा तकलीफ तो नहीं हुई। लेकिन दोनों suitcases का वजन और एक साथ दोनों का तालमेल बिठा कर आगे बढ़ना, रोहित के लिए थोड़ा मुश्किल होने लगा। पसीने में तर बतर होकर रोहित अब बारी बारी से, पहले एक suitcase को थोड़ी दूर तक खींच कर लाता, फिर उसे वहीं छोड़, वापस लौट कर दूसरे suitcase को खींचकर पहले वाले के पास लाकर, थोड़ा दम भरता। ऐसा उसने पांच बार किया, तब कहीं जाकर building के entrance से main building तक पहुंच पाया। इस पूरे समय रोहित मदद के लिए अपने आसपास निगाहें दौड़ाता रहा। लेकिन एक तो saturday, ऊपर से दोपहर का समय, इसलिए उसे यह सारी मेहनत अकेले ही करनी पड़ी। तो रोहित का friend उसके साथ आना चाहता था, लेकिन अगले हफ्ते ही उसका IES का exam था। जिसकी तैयारी वह पूरी लगन से पिछले छह महीनों से कर रहा था। तो उसे disturb करना रोहित ने ठीक नहीं समझा। और वैसे भी इतने दिनों, रोहित का रहने और खाने-पीने का खास खयाल उसके friend और उसके मम्मी पापा ने रखा था, रोहित के लिए यह साथ ही काफी था। इस छोटी सी परेशानी को तो वह अकेले ही face कर सकता था। लेकिन अब एक और चुनौती रोहित के सामने थी, सीढ़ियां!!!!!  Main building में अंदर जाने के लिए उसे यह 10  12 सीढ़ियां चढ़कर जाना था, तब जाकर वह lift तक पहुंच सकता था।



        रोहित ने एक लंबी सांस भरी, और एक suitcase के ऊपर वाले handle को पूरे दम से खींचा। अगले ही पल, टूटने की आवाज के साथ, suitcase का handle अपने हाथ में लिए, रोहित जमीन पर जा गिरा। कुछ seconds बाद, अपने कपड़ों को झाड़ते हुए, रोहित उठा और तभी उसे एक जानी पहचानी सी खुशबू आने लगी। और कुछ देर में उस खुशबू का मालिक, रोहित कि "eye candy", "अविनाश" अपने हाथों में एक bag लिए, रोहित की तरफ ही बढ़ने लगा।



अविनाश :- "Do you need help??"

रोहित :- (अपने आप को साफ करते हुए) "Yes I do!!! But what are you doing here???"

अविनाश :- "Means??? I live here!!"

रोहित :- (आश्चर्य से अपनी आँखें बड़ी कर, हल्की सी मुस्कुराहट के साथ) "Ohhhhk!!!!! Which floor???"

अविनाश :- "21"

रोहित :- (झूठी हँसी हँसते हुए) "Ohhhk!! तो मतलब अब हम neighbors हैं!!! Ok!!! Thats good।"

अविनाश :- "Ok! So can I help you? To take this stuff up???"



         पहले तो रोहित ने "हाँ" मैं अपना सर हिलाया। लेकिन जैसे ही अविनाश रोहित के suitcases उठाने लगा, रोहित ने उसे चेताने के लिए बोला।


रोहित :- "आराम से, bag बहुत भारी हैं, और पुराने भी।"




         लेकिन रोहित अपनी बात पूरी कर पाता, उससे पहले ही अविनाश दोनों suitcases को side handle से उठाकर, साथ में अपना bag भी लिए, बड़ी ही आसानी से आधी सीढ़ियां भी चड़ गया था। और रोहित अपने पीठ पीछे laptop backpack और अपने हाथ में एक suitcase का handle लिए, उसे ऐसा करते देखे जा रहा था। जब अविनाश सारी सीढ़ियां चढ़ गया, तो उसे रोहित के साथ चलने की आवाज नहीं आई। तो उसने पीछे पलटकर रोहित को देखा, तो रोहित अभी भी वहीं खड़ा था, जहां वह पहले था। और बस अविनाश को घूरे जा रहा था।


अविनाश :- "Do you only have to bring these things up? Will you not go up?"




        अविनाश की बात सुनकर, रोहित ने उसे घूरना बन्द किआ, और भागता हुआ, अविनाश के पीछे - पीछे चलने लगा।



रोहित :- (आश्चर्यचकित स्वर में) "मैं literally  सही से इन bags को एक एक करके भी नही खींच पा रहा था। और तुमने...... मेरा मतलब आपने इतने आसानी से उठा लिया, वो भी दोनों bag एक साथ!!!! That is mind blowing !!!!"


अविनाश :- (अपने normal स्वर में) "Use your power at the right place, so you can also able to do it!!!"




        अविनाश दिखने में तो under 30 लगता था। लेकिन उसका व्यवहार, बात करने का तरीका, 60 plus से कम नहीं था, ऐसा रोहित का सोचना था। और अभी कुछ पलों की मुलाकात ने अविनाश के लिए रोहित की सोच को सच में ही बदल दिया था। दोनों lift से अपने floor पर भी पहुंच गए। और अविनाश ने रोहित के बताए flat के दरवाजे के सामने उसके bag भी रख दिए। रोहित ने अविनाश को "Thanks" बोला, और अविनाश बिल्कुल नपी तुली smile pass कर, हल्का सा सर हिलाकर, रोहित के flat के बिल्कुल बगल वाले flat में चला गया। और 2 seconds बाद ही वापस भी आ गया।


अविनाश :- "If you need anything, than plz let me know!!"


रोहित :- (मुस्कुराते हुए) "Thanks for your concern!!! But really I am fine now. And thanks for bags though!!!"


अविनाश :- "I understand, you are just going to be shifted, so you need several things, so just let me know, I am just a wall away!!!"


रोहित :- (मुस्कुराते हुए, अपने flat का lock खोलते हुए) " I am seriously fine, I have everything in these bags, so don't worry, I am good."




        दरअसल, रोहित को जरूरत तो बहुत सारी चीजों की थी। लेकिन एक तो अविनाश उसका office में senior, उसका training officer, और सबसे बड़ी बात, इतना ज्यादा खडूस। तो रोहित उसकी कोई भी मदद लेने से कतरा रहा था। और शायद कहीं ना कहीं अविनाश को भी यह बात नजर आ रही थी।



अविनाश :- "Seriously!!! You have Broome in your bag, to clean the house???"


रोहित :- "Ok! Fine! I need several things, the mattress, bedsheets, few vessels or many more...."


अविनाश :- (रोहित को बीच मे ही रोकते हुए) "Ok! Ok! There is a mall nearby, get freshenup, than I will take you there, you will find all that goods there!!"


रोहित :- (मुस्कुराते हुए) "Ok! I will meet you after 30 minutes!!"


अविनाश :- "Ok! Good!"


           दोनों अपने-अपने flat मैं चले जाते हैं। रोहित अपने सामान को अपने bedroom की fix अलमारी में रखता है। और नहाने के लिए चला जाता है। नहाते वक्त रोहित, अविनाश के बारे में ही सोचता है, कि "शायद अविनाश इतना भी खडूस नहीं, जितना वह दिखता है" caring nature का है, और gym तो 100% जाता है, तभी तो इतना strong है। थोड़ी देर बाद तैयार होकर रोहित अविनाश का door knock करता है। अविनाश भी तैयार होकर बाहर आता है। और दोनों पास के ही mall में जाकर, रोहित के लिए जरूरत के सभी सामान की खरीददारी करते हैं। सारा सामान खरीदते हुए दोनों को शाम हो जाती है, और रोहित को भूख भी लग आती है।


रोहित :- "Hey!!! मुझे अब बहुत तेज़ भूख लग रही है। कुछ खाएं???"

अविनाश :- "हाँ!!! Ground floor पर एक restorant है, वहां भी चल सकते हैं, और second floor पर dominoz और Mc-donald है। जहां भी जाना चाहो।"

रोहित :- "Restorant ही चलते हैं, भूख बहुत तेज़ लगी है, और pizza, burger नही खाना मुझे।"


        दोनों mall के ही एक restorant में खाने के लिए आ जाते हैं। लेकिन खाने का order सिर्फ रोहित ही करता है।


रोहित:- (मेज़ के इर्दगिर्द अपने खरीदे हुए सामान को रखते हुए) "तुम्हे..... मेरा मतलब है आपको बिल्कुल भी भूख नही है??? मुझसे तो अब बर्दाश्त ही नही हो रही भूख।"

अविनाश :- "हाँ!!! अब daily का यही routine बन गया है, office से कभी कभी late हो जाता है, तो late ही खाने की आदत है।"

रोहित :- (अविनाश की आँखों मे गौर से देखते हुए) "तुमने..... मेरा मतलब है आपने, lenses पहने हुए हैं क्या???"

अविनाश :- (अपनी आँखों को मलते हुए) "नहीं तो!!!! And you can say तुम, I dont mind।"

रोहित :- (अविनाश को गौर से देखते हुए) "नहीं!! मुझे अच्छे से याद है तुम्हारी.... मतलब आपकी आँखे काले रंग की है, लेकिन अभी ये मुझे कुछ कुछ ब्राउन सी लग रही हैं।"

अविनाश :- "तुमने ध्यान से नही देखा होगा, मेरी आँखे तो हमेशा से ऐसी ही हैं। और तुम मेरी आँखों पर क्यों इतना ध्यान दे रहे हो?"

रोहित :- (अविनाश के चेहरे से नज़रें हटाते हुए) "नहीं वो तो बस नज़र पड़ गयी इसलिए बोल दिया।"


       
        इतने में ही रोहित का order किया हुआ खाना, वहां मेज़ पर आ गया। रोहित ने अपना खाना खाया, और साथ-साथ कई बार अविनाश को भी खाने का offer दिया। लेकिन अविनाश ने हर वक्त अपना सर "ना" में ही हिलाया। और अपने mobile में व्यस्त रहा। खाना finish कर दोनों ने थोड़ा बचा हुआ सामान भी खरीदा। अब तक रात भी हो चली थी। और सारा सामान लेकर दोनों वापस flat पर आ गए। इस बार भी ज्यादातर सामान अविनाश ने ही उठाया। रोहित तो बस कम वजन के तीन चार bag ही लाने में, बुरी तरह से थक चुका था। अविनाश ने सारा सामान रोहित के flat के दरवाजे के बाहर ही रखा, और अपने flat का lock खोलने लगा।


रोहित :- (अपने हाँथो के bags को नीचे रखते हुए) "अब इतनी मदद की है, तो ये सारा सामान, अन्दर set करने भी थोड़ी help करदो।"


अविनाश :- "जरूर कर देता, लेकिन अब मेरी भूख का समय हो रहा है। और अब मुझसे control नही हो रहा। एक काम करो, सारा सामान अभी ऐसे ही रख दो, काल sunday है, आराम से set कर लेंगे।"



        इतना कहकर अविनाश सीधा अपने flat के अंदर चला गया। और रोहित बाहर ही खड़ा सोचता रहा, कि "शायद बहुत तेज ही भूख लगी है, इसको। बिना bye, good night! बोले ही अंदर चला गया। और मुझे भी thanks बोलने का मौका नहीं दिया। फिर वह भी अपने flat के अंदर आ गया, और धीरे-धीरे सारा सामान भी अंदर ले आया। अपने bedroom को थोड़ा बहुत साफ किया, और जमीन पर ही गद्दा बिछाया और सो गया।





आगे की कहानी जानने के लिए बने रहिये रोहित और अविनाश की इस चमकते आज के साथ, शायद बिता कल या आने वाला समय इतना सुनहरा ना हो।




Lots of love
Yuvraaj ❤️










 









Tuesday, July 14, 2020

"वो पहली नज़र" Final Part


Hope you all already read the first part of this story, if not than please go and read it fast.


        घर आकर अयान बहुत ज्यादा मायूस महसूस कर रहा था। और बार-बार कार्तिक की कही बात के बारे में ही सोचे जा रहा था। कि उसने क्यों गंदे शब्दों में उसकी बात का रिप्लाई दिया। लेकिन कुछ देर बाद उसने एक बात नोटिस की, कि कार्तिक को यह सुनकर कि, अयान को उससे प्यार है, जरा भी आश्चर्य महसूस नहीं हुआ। और ना ही उसने ऐसा कहा कि, वह स्ट्रेट है, या की वह गे नहीं है। अब इस बात का भी, अयान अपने मन को तसल्ली देने के लिए कई अर्थ निकालने लगा, कि हो सकता है कि वह भी गे हो, और बस कैफे में किसी को इस बारे में पता ना चले, इसलिए अयान से दूरी बना रहा हो। और जब कार्तिक ने गुस्से में उसे कैफे में आने से मना किया था, तब भी उसने ऐसा नहीं कहा था, कि वह स्ट्रैट है। यह सब सोचकर तो अब अयान की खुशी का ठिकाना ही नहीं था। और उसने ठान लिया कि वह कल फिर कार्तिक से बात करेगा, और कल पूरी बात किए बिना उसे जाने नहीं देगा।




    अगले दिन ठीक समय पर अयान कार्तिक से मिलने पहुंच गया।


कार्तिक :- "तुम फिर आ गए यार??"


अयान :- "I know तुम भी गे हो, और तुम्हारे कैफ़े में किसी को पता ना चले, इसलिए तुम मुझे खुद से दूर करना चाहते हो।"


कार्तिक :- (हँसते हुए) "हाँ मै गे हूँ, हाँ मै नहीं चाहता कि कैफ़े में किसी को इस बारे में पता चले। इसलिए तो मैने तुम्हे कैफ़े में आने से मना किया। और thank you की तुमने मेरी बात मान ली।"


अयान :- " हाँ तो फिर अब क्या problem है? I promise मैं इस बात को किसी को भी नही पता लगने दूंगा।"


कार्तिक :- "Thank you!! लेकिन जैसा तुम सोच रहे हो, वैसा हमारे बीच कुछ नही हो सकता।"


अयान:- (कार्तिक का हाँथ पकड़ते हुए) "एक मौका तो दे कर देखो। मैं सच मे तुम्हे बहुत प्यार करने लगा हूँ।"


कार्तिक :- (अपना हाँथ अयान के हाँथ से छुड़ाते हुए) "Dear बात तुम्हारी नही, मेरी है। मैं किसी से भी प्यार करने के लिए नही आया हूँ। मेरी कुछ जरूरतें हैं, और उन सब के सामने ये प्यार व्यार बहुत छोटी चीज़ है। मैं तुमसे request करता हूँ, मुझसे दूर रहो! Please!!"


      इतने में ही पीछे से एक गाड़ी से हॉर्न की आवाज आती है, और कार्तिक उस गाड़ी में बैठ कर वहां से चला जाता है।


           उस रात अयान के लिए सो पाना थोड़ा मुश्किल था।कार्तिक कई सारे सवाल छोड़ गया था, अयान के लिए। और उनके जवाब ढूंढ पाना नामुमकिन सा था। जब आप पहली नजर में ही किसी को अपना दिल दे बैठते हो, तो वह एहसास ही आपके अंदर, एक नए आप को जन्म दे देता है। वह इंसान आपके लिए फिर सारी दुनिया में सबसे ज्यादा खास बन जाता है। उसका हंसना, उसका बोलना, उसका मुस्कुराना, आपको बेहद अच्छा लगने लगता है। उस इंसान को पाने के लिए, उसके आसपास रहने के लिए, आप सारी दुनिया से भी लड़ने को तैयार हो जाते हो। वह पहली नजर का पहला प्यार, उन एहसासों में से एक है, जिसकी तुलना किसी और एहसास से की ही नहीं जा सकती। कार्तिक भी तो अयान का पहला प्यार था, तो वो उसे इतनी आसानी से कैसे जाने दे सकता था। अयान ने अपने दोस्तों से भी इस परेशानी के लिए कुछ सुझाव मांगे, और उन्हीं के निर्णय स्वरुप, अयान अब हर शाम ऑफिस खत्म होने के बाद, कैफे से कुछ दूरी बनाकर कार्तिक का इंतजार करने लगा। कार्तिक भी अयान को नोटिस करता, लेकिन नजरअंदाज कर वहां से चला जाता। ऐसा कुछ है 6-7 दिन लगातार होता रहा।



कार्तिक :- (अयान की तरफ आते हुए) "यार! क्यों अपना समय ऐसे बर्बाद कर रहे हो??"


अयान :- (मुस्कुरा कर) "ऐसा तुम्हे लग रहा होगा। मैं तो तुम्हे देख लेता हूं तो मेरा दिन अच्छा बन जाता है।"


कार्तिक :- ( अयान की बात सुन मुस्कुरा कर) "अरे वाह!! फिल्मी dailogue!! Hmmmmmm very good। कहीं और try करो तो शायद तुम्हारी दाल भी गल जाए।।"


अयान :- "शायद तुम मुझे अभी भी कोई stocker या फिर sex seeker समझ रहे हो। लेकिन मुझे तुमसे प्यार के अलावा कुछ और नही चाहिए।"


कार्तिक :- (हँसते हुए) "Sex seekers में daily देखता हूँ, trust me, i know तुम sex seeker नही हो। अगर तुम्हें केवल sex चाहिए होता, तो मुझे कोई प्रॉब्लम नही थी। लेकिन तुम्हे जो चाहिए, वो मेरे पास नही है।"



            इतना कहकर कार्तिक मुस्कुरा कर वहां से जाने लगता है, और अयान पीछे से उसका हाथ पकड़ कर उसे रोकता है।



अयान :- "क्या मतलब??? तुम्हारी बाते पहेलियों की तरह लगती है मुझे, मैं नही समझ पा रहा तुम क्या कहना चाहते हो?"



कार्तिक :- (अपना हाँथ अयान के से छुड़ाते हुए, मुस्कुरा कर) "बस इतना समझ लो की, मैं किसी के प्यार के काबिल नही हुँ। लेकिन तुम अच्छे लगे मुझे, तो जब भी free हो बता देना, मैं free में चलूंगा तुम्हारे साथ।"



         और कार्तिक हंसकर, अयान के गालों पर एक किस कर के, वहां से चला जाता है। और थोड़ी दूरी पर खड़ी एक गाड़ी में जाकर बैठ जाता है, और वह गाड़ी उसे वहां से ले कर चली जाती है।



           अब तो कार्तिक अयान के लिए एक पहेली बना जा रहा था, और कार्तिक की बातें, उसे उस पहेली में और उलझाती जा रही थी। लेकिन आज की कार्तिक की बातें, और उसके हर रोज अलग अलग गाड़ियों में बैठकर जाने से, कुछ तो एकदम साफ नजर आ रहा था, लेकिन अयान ऐसा कुछ कार्तिक के बारे में नहीं सोचना चाहता था।



         अगली रात जब कार्तिक कैफ़े से निकला, तो अयान उसका बेसब्री से इंतजार कर रहा था। और कार्तिक को अपनी ओर आते देख, उससे रहा नहीं गया और वह भागकर कार्तिक के पास गया और बोला।


अयान :- "मैं आज free हूँ, चलो मेरे साथ।"


कार्तिक :- (ठहाके लगा कर हँसते हुए) "क्या??? कहाँ चलो???"


अयान :- "तुमने कल कहा था ना, जब मैं free हूँ तब चलोगे मेरे साथ, तो चलो, आज मैं free हूँ।"


कार्तिक :- (मुस्कुराते हुए) "Sorry dear! आज ही मुझे 3 दिनों के लिए आगरा जाना है, अपने client के साथ। Sunday!!! Sunday को मिलते हैं, कैफ़े के बाद। अपना address देदो मैं पहुंच जाऊंगा।"


अयान :- (मुस्कुराते हुए) "नहीं। मैं खुद आ जाऊंगा तुम्हे लेने।"



          Sunday को मिलना तय कर अयान आज इतने दिनों बाद खुशी खुशी अपने फ्लैट पर वापस आया था। कार्तिक कि कहीं बाकी सब बातों को नजरअंदाज कर, वह सिर्फ इस बात से खुश था कि, Sunday को वह कार्तिक के साथ कुछ पल एक साथ बिताएगा।  उस रात थोड़ी चैन की नींद ली थी अयान ने। और इन 3 दिनों में ना जाने कितनी ही प्लानिंग कर ली थी उसने कि, कैसे घर को सजायेगा, खाने के लिए क्या होगा, क्या-क्या बातें होंगी, वगैराह - वगैराह।



         आखिर 3 दिन बीते और sunday भी आ गया। सुबह जल्दी आंख खुल गई थी आज अयान की, या यूं कहूं सारी रात नहीं सो पाया था कार्तिक से मिलने की खुशी में। सारा दिन घर की साफ सफाई और सजावट में निकला। और खाने में कुछ चाइनीज़ बनाना ही तय किया। रात होते ही अयान कार्तिक को लेने कैफ़े पहुंच गया, और कार्तिक को अपने साथ अपने फ्लैट पर ले आया।



कार्तिक :- (अयान के फ्लैट में अंदर आते हुए) "Nice house!"


अयान :- "Thank you! बताओ पहले कुछ drinks लोगे या खाना serve करूं।"


कार्तिक :- (अयान को अपनी बाहों में भरते हुए) "अरे मैं इस सब के लिए थोड़ी आया हूँ यंहा। तुम तो सीधे अपने बेडरूम में ले चलो।"



अयान :- (कार्तिक की आँखों मे प्यार से देखते हुए) "मुझे तो बस तुम्हारे साथ वक़्त बिताना है। तुम्हे जानना है, तुम्हे अपना प्यार समझना है।"


कार्तिक :- (मुस्कुराते हुए) "देखो! कहा था ना मैने, तुम औरों जैसे नहीं हो। और बस यही बात मुझे तुम्हारे पास नही आने देती।"



        इतना कहकर कार्तिक मुस्कुराते हुए, अयान से अलग होकर खाने की मेज की तरफ चला जाता है, और अयान भी उसके पीछे-पीछे वहां आता है।



अयान :- (कार्तिक के बैठने के लिए कुर्सी खींचते हुए) " मैं कब तुम्हें अभी कुछ commit करने के लिए कह रहा हूं, बस मेरे साथ थोड़ा वक्त बिताने को ही तो कह रहा हूं। शायद तुम्हें मेरा साथ पसंद आ जाए, और तुम्हें मुझे कम से कम एक मौका तो देना चाहिए।"


कार्तिक :- (अयान द्वारा खिसकाई कुर्सी पर बैठते हुए) "मैं पहले भी तुम्हे बता चुका हूँ, मैं ऐसा कुछ नही करना चाहता।"


अयान :- (कार्तिक के सामने वाली कुर्सी पर बैठते हुए) " वही तो मैं जानना चाहता हूं, कि आखिर ऐसा क्यों? क्या मैं तुम्हें पसंद नहीं? या फिर तुम्हारी life में कोई और है? अगर ऐसी कोई बात है, तो तुम मुझे बता सकते हो, I promise मैं कभी तुम्हारे रास्ते में नहीं आऊंगा।"


कार्तिक :- "अयान मैं एक escort हूँ, sex worker"


      कार्तिक की यह कहते ही वहां एकदम सन्नाटा सा हो जाता है। अयान बस कार्तिक ने जो कहा, उसे अपने दिमाग में बैठाने की कोशिश कर रहा था, और तभी कार्तिक ने ही बात को आगे बढ़ाया।


कार्तिक :- "I know यह सुनने के बाद तुम्हारी सारी feelings बदल जायेंगी। लेकिन सच मानो मुझे इससे कोई भी फर्क नहीं पड़ता। तुम अगर मेरे बारे में कुछ गलत सोचोगे, तो भी मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। और तुम चाहो तो मैं तुम्हारे साथ बेडरूम में भी चल सकता हूं, और अभी इस घर से बाहर भी जा सकता हूं। जैसा तुम्हें ठीक लगे, लेकिन यह मेरी सच्चाई है।"



अयान :- (कुछ देर सोचने के बाद ) "लेकिन क्यों?? अगर कैफ़े की payment से ज्यादा चाहिए, तो तुम कुछ और काम भी तो कर सकते हो।"


कार्तिक :- "मैं सिर्फ 8 तक पड़ा हूँ, और किसी भी काम से मुझे इतने पैसे नहीं मिलेंगे, जो अभी मिलते हैं। और कैफ़े तो बस दिन में खुद को busy रखने के लिए, और normal feel करने के लिए है बस।"


अयान :- "Normal मतलब??"


कार्तिक :- "जब खुद को शीशे में देखता हूं तो घिन आती है, कैफे में काम करके थोड़ा normal महसूस होता है।"


अयान :- " मतलब तुम्हें खुद यह सब करना पसंद नहीं है। तो फिर क्यों करते हो?"


कार्तिक :- " गांव में मां है, दो बहने हैं, उनकी सारी जिम्मेदारी है मुझ पर। जब घर पैसे भेजता हूं, तो उस खुशी के आगे यह सब बहुत छोटा लगता है।"


अयान :- " कैफे में किसी को पता है तुम्हारे इस काम के बारे में?"


कार्तिक :- " नहीं!!  किसी को नहीं पता। पहले मैं दिल्ली में ही काम करता था। लेकिन फिर वहां धीरे-धीरे मेरे बारे में पता चलने लगा। तो मैं यहां गुड़गांव में आ गया। और मेरे कस्टमर्स तो वेबसाइट से आ ही जाते हैं।"


अयान :- "वेबसाइट???"


कार्तिक :- "Hmmmmm, Rentmen नाम की एक वेबसाइट है, वहां से मुझे मेरे कस्टमर्स मिल जाते हैं। मैं कोई सड़क छाप escort थोड़ी हूँ। (मुस्कुराते हुए)"


     कार्तिक की सारी बातें सुनकर अयान अब शांत हो जाता है। शाम तक जहां उसके मन में इतने सारे ख्याल, इतनी सारी बातें, चल रही थी। अब वह सब धुंधली हो चुकी थी। कार्तिक भी अयान की इस चुप्पी को समझता है, और कहता है।



कार्तिक :- " मैं समझ सकता हूं, तुम्हें अभी कैसा लग रहा होगा, यह सब सुनकर। इसलिए मैं तुम्हें खुद से दूर रहने के लिए कहता था। मैं तुम्हारे प्यार के लायक नहीं हूं। लेकिन जब भी तुम्हारी आंखों में देखता हूं, तो लगता है, कि यह सब छोड़ कर तुम्हारे साथ कहीं दूर चला जाऊं। लेकिन ऐसा कर पाना मेरे लिए मुमकिन नहीं। और मैं तुम्हारे लिए सही इंसान भी नहीं।"


       कार्तिक थोड़ी देर इंतजार करता है, कि शायद अब अयान कुछ बोलेगा, लेकिन अयान तो अभी भी, कार्तिक की बातों के बारे में ही सोचे जा रहा था।


कार्तिक :- "Ok तो फिर चलो, अब मुझे चलना चाहिए। तुमसे मिलकर, तुमसे बात करके, अच्छा लगा। तुम्हारी हफ्तों की कोशिशों ने मेरे दिल में भी तुम्हारे लिए जगह तो बना ही दी थी, लेकिन यह सही भी तो नहीं है। हमारी मुलाकातों का यहीं पर खत्म होना ही हमारे लिए ठीक रहेगा।"



       कार्तिक वहां से उठता है, और अयान के फ्लैट से बाहर चला जाता है। अयान अभी भी वही खाने की मेज पर बैठा कार्तिक की कहीं एक एक बात को समझने, और अपने दिल और दिमाग में उतारने की कोशिश करता है। इस रात का यूं अंत होगा यह तो ना अयान ने कभी सोचा था, नाही कार्तिक ने। कुछ देर बाद अयान का फोन बजता है, अयान फोन उठाता है, तो सामने से उसके दोनों दोस्त उससे आज रात की सारी बातें जानना चाहते थे। अयान के बताए अनुसार, आज अयान कार्तिक के सामने अपने प्यार का इजहार करने वाला था। लेकिन अयान के दोस्तों को सुनने को कुछ और ही मिलता है। अयान के दोस्तों को जब सारी बात पता चलती है, तो उन्होंने ना चाहते हुए भी अयान को कार्तिक से दूर रहने की सलाह दी। लेकिन ऐसा कर पाना अयान के लिए बेहद मुश्किल था। कुछ दिनों तक अयान के दिमाग और दिल के बीच एक द्वंद्व चलता रहा। जहां उसका दिमाग कार्तिक के दूसरे पहलू पर जोर देता। वही उसका दिल कार्तिक के प्रति प्यार का एहसास कराता। और इस उधेड़बुन में आखिरकार जीत हुई तो उस पहली नजर की, जो अयान के दिल में बहुत गहरी जगह बना चुकी थी। उसके आगे बाकी सब कुछ नजरअंदाज कर, अयान कैफे के बाहर कार्तिक के आने का इंतजार करने लगा।



कार्तिक :- (अयान को वहां देख कर, आश्चर्य से) "तुम!!!! मुझे नहीं लगा था, की अब मैं दोबारा तुम्हें कभी भी देखूंगा।"


अयान :- (कार्तिक की ओर बढ़ते हुए) "मेरे कुछ सवाल हैं, जिनका जवाब मुझे चाहिए।"


कार्तिक :- (अयान को साथ चलने का इशारा करते हुए) "बिल्कुल, आज मैं free हूँ, हम आराम से बात कर सकते हैं।"


अयान :- "तुम ये काम शौक से करते हो, या मजबूरी में?"


कार्तिक :- (अयान की तरफ देख कर, मुस्कुरा कर) "कोई भी ये काम शौक से तो नही ही करेगा।"


अयान :- "तो तुम ये काम छोड़ सकते हो??"


कार्तिक :- "इस काम की ज्यादा उम्र वैसे भी नही होती, आज से 8 10 साल बाद ही मुझे कोई नही पूछेगा।"


अयान :- (कार्तिक का हाँथ पकड़ कर) "तो जो कुछ समय बाद करना है, वो अभी ही क्यों नहीं। मैं इसमे तुम्हारी पूरी मदद करूँगा।"


कार्तिक :- (अयान की तरफ मुड़कर, उसके हाँथ के ऊपर हाँथ रख कर) " मेरा सच जानने के बाद भी तुम यहां खड़े हो, इसी से तुम्हारे लिए मेरे मन में बहुत respect है।  लेकिन दोनों बहनों की शादी, मां के लिए घर, इस काम के बिना, मैं यह सब नहीं कर पाऊंगा। और इन सब के लिए मैं तुम्हारी मदद नहीं लेना चाहूंगा। क्योंकि फिर तुम से पैसों की मदद लेकर, अगर मैं तुम्हारे साथ रहूंगा, तो वह भी मेरे इस काम के बराबर ही रहेगा। और मैं ऐसा बिल्कुल नहीं करूंगा। मैं बिल्कुल झूठ नहीं बोलूंगा, तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो। जब तुम बिना कुछ कहे, मेरे गुस्से में कही बातों को भी मान लेते हो, और आज यहां आकर मुझसे ऐसे बात करके, तुम्हारे लिए मेरी पसंद और बढ़ गई है। लेकिन अब इसे यहीं तक रखें, तो हम दोनों के लिए बेहतर रहेगा।"



      यह कहते वक्त कार्तिक की आंखें नम थी। इसके दो कारण थे। एक तो यह, कि वह खुद भी इस गंदगी से दूर जाना चाहता था, लेकिन अपनी मजबूरी की वजह से वह चाहकर भी ऐसा नहीं कर सकता था। और दूसरा कारण था अयान!!!! अयान वो पहला लड़का था, जो इतने दिनों से कार्तिक के आगे पीछे sex के लिए नहीं, बल्कि प्यार के लिए घूम रहा था। कार्तिक के मन में भी अब तक अयान के लिए एक खास जगह बन चुकी थी। लेकिन अयान का साथ कहीं उसे कमजोर ना बना दे, इसलिए वह अयान से दूरी बनाए रखना चाहता था। लेकिन आज अयान पीछे हटने के मूड में ही नहीं था।



अयान :- " मैं  भी तुमसे कोई झूठ नहीं बोल रहा, लेकिन तुमसे मिलने से पहले, मैंने कभी सोचा तक नहीं था, कि मुझे कभी प्यार भी होगा। वह भी एक लड़के से। तो मैं अपने पहले प्यार को इतनी आसानी से तो नहीं जाने दूंगा। मैं यह बिल्कुल नहीं चाहता, कि कुछ सालों के बाद, मैं यह सोचूं, कि शायद ऐसा किया होता, या यह कोशिश की होती, तो शायद आज हमारी जिंदगी कुछ और होती। तो मैं वह सब try कर लेना चाहता हूं, जिससे मैं तुम्हें अपनी जिंदगी में हमेशा के लिए कैद कर सकूं। और मैं चाहता हूं कि तुम भी मुझे एक मौका दो। अगर मैं ऐसा नहीं कर पाता, तो तुम आजाद रहोगे मेरी तरफ से। और मैं तुम्हें कभी परेशान नहीं करूंगा। लेकिन तुम्हें मेरे भरोसे पर बस एक बार भरोसा तो करना ही होगा।"



        इस समय अयान की आंखों में जो विश्वास की चमक थी, कार्तिक के लिए उसे नजरअंदाज करना नामुमकिन था। और वह बिना कुछ सोचे समझे, अयान की आंखों में देखकर, "हां" मैं अपना सर हिला देता है। और अयान के चेहरे को अपने हाथों में पकड़ कर, उसके होठों पर kiss करता है।



थम सा गया है ये जहाँ,

आगोश में आकर तेरे।

रुक सी गई है ये धड़कन,

छू के होठों को तेरे।

मैं तो चाहूं रुकना, तेरी बाहों में हमेशा के लिए।

लेकिन जब जिस्म से निकले ये रूह,

तो नाम तेरा ही आए लबों पे मेरे।



        कुछ समय बाद सब कुछ एक परियों की कहानियों की तरह होने लगा था। कार्तिक अब अयान के साथ उसके फ्लैट में शिफ्ट हो गया था। अयान ने अपनी ही कंपनी के कॉल सेंटर में कार्तिक की जॉब लगवा दी थी। कार्तिक ने इंग्लिश बोलना पहले से ही सीख रखा था, जो उसके काम के लिए भी फायदेमंद था। और उसका फायदा अयान को भी मिला, और थोड़ी जद्दोजहद के बाद कार्तिक को कॉल सेंटर की जॉब मिल गई थी। दिखने में कार्तिक किसी हीरो से कम नहीं था। जिसका फायदा वह अभी तक अच्छे रुपए खर्च करने वाले कस्टमर्स की तलाश में उठाया करता था। और इसी खूबसूरती का फायदा अयान ने भी उठाया। दिल्ली की कई मॉडलिंग एजेंसीज में कार्तिक का पोर्टफोलियो भेजा, और धीरे-धीरे कार्तिक को मॉडलिंग के असाइनमेंट भी मिलने लगे। तो जिन पैसों के खातिर कार्तिक जिस्मफरोशी किया करता था, उसका इंतजाम अयान ने अपनी सूझबूझ से कर दिया था। रही बात कार्तिक के अयान के साथ उसके फ्लैट में रहने की, तो इसके लिए भी अयान ने ही कार्तिक को मनाया था। अयान के लिए अब कार्तिक से दूर रहना थोड़ा मुश्किल हो गया था। उधर कार्तिक भी एक शर्त पर ऐसा करने को राजी हुआ था, कि जितना खर्चा उसका अभी अकेले रहने पर होता है, कम से कम उतने रुपए अयान को कार्तिक से लेने ही होंगे। और दोनों अपनी अपनी रजामंदी से एक साथ एक फ्लैट में रह रहे थे।



        इसी बीच दोनों का रिश्ता भी मजबूत हो रहा था। जहां अयान तो कार्तिक के लिए अपने प्यार का इजहार पहले ही कर चुका था, वहीं अब कार्तिक भी इस रिश्ते को प्यार का नाम दे रहा था। कार्तिक की तरफ से बढ़ती नजदीकियों को अयान ने kissing, hugging, cuddling तक ही रोका हुआ था। कार्तिक के मन में कभी यह बात ना आए की, शारीरिक संबंध अयान की, की हुई मदद के लिए हैं। इसलिए  अयान उस सही समय के इंतजार में कार्तिक से थोड़ी दूरी बनाए हुए था। कार्तिक ने फोन पर अपने घर वालों की बात अयान से कराई थी, और अयान के भी दोस्त वीडियो कॉलिंग के जरिए दोनों को साथ देख चुके थे। अयान कि वह शायरी की डायरी जो अभी तक सिर्फ अयान की निजी वस्तुओं में शामिल थी, अब कार्तिक अयान की हर एक शायरी पढ़ चुका था, और वाहवाही भी कर चुका था। अयान की उन शायरियों को एक किताब का रूप देने के लिए कार्तिक बार-बार अयान को मनाता भी था। और बातों ही बातों में कार्तिक के फ्यूचर प्लांस का अयान को एल्म हो चुका था। कार्तिक की सबसे पहली priority अपनी बहनों की, किसी अच्छे घर में, बड़ी धूमधाम से शादी करने की थी। और उसके बाद कार्तिक एक कैफ़े भी खोलना चाहता था। और इसके लिए उसने अभी तक कुछ savings भी कर रखी थीं।



           अब बारी थी अयान के मम्मी पापा को, अयान के और कार्तिक के रिश्ते के बारे में बताने की। अयान के दोस्तों ने उसे सलाह दी, कि वह खुद ग्वालियर जाकर उन्हें इस बारे में बताएं। और अयान भी इस सुझाव को मान गया। कार्तिक और अयान की आज रात की ट्रेन थी। लेकिन आज सुबह से ही कार्तिक की तबीयत थोड़ी ठीक नहीं लग रही थी, उसे हल्का बुखार भी था, हल्का फ्लू जैसा भी लग रहा था। कार्तिक ने आज के अपने सारे काम कैंसिल कर घर पर रहना ही तय किया, और कुछ दवा भी खाई। जिससे उसे थोड़ा आराम भी मिल गया। अयान भी आज कार्तिक के साथ घर पर ही रुकना चाहता था, लेकिन कार्तिक ने उसे जबरदस्ती ऑफिस भेज दिया। शाम को जब अयान घर वापस आया, तो कार्तिक को सुबह से भी ज्यादा बुखार था। उसने सबसे पहले रात के ग्वालियर की ट्रेन के टिकट कैंसिल किए, और कार्तिक को पास के ही एक क्लीनिक पर ले गया। डॉक्टर ने भी कार्तिक को चेक किया और फ्लू की 3 दिन की दवा देकर वापस भेज दिया।



        रात भर अयान कार्तिक के सिरहाने ही बैठा रहा, और ठंडे पानी की पट्टियां उसके सर पर बदलता रहा। लेकिन उस डॉक्टर की दी दवा का कुछ खास असर उसे कार्तिक के ऊपर दिखाई नहीं दे रहा था। अब तो कार्तिक की skin पर कई जगह  rashes भी नजर आने लगे थे। और कार्तिक को normal से कहीं ज्यादा पसीना भी आ रहा था। दोनों ने सुबह का इंतजार किया। सुबह होते ही अयान कार्तिक को अलकेमिस्ट हॉस्पिटल ले गया। कार्तिक को हॉस्पिटल में एडमिट कर ड्रिप लगा दी गई, और कुछ टेस्ट करवाए गए। शाम तक सभी टेस्ट की रिपोर्ट आ चुकी थी। डॉक्टर ने अयान को अपने केबिन में बुलाया, और बताया कि कार्तिक को HIV Infection है, और यह थर्ड स्टेज यानी AIDS है।



          यह सुनने के बाद अयान के कानों में बस कार्तिक की बातें, उसकी हंसी ही गूंजने लगी। उसके सामने बैठे डॉक्टर ने इसके बाद जो भी बोला अयान को कुछ भी सुनाई ही नहीं दिया। कुछ देर बाद अयान वहां से उठा और सीधा कार्तिक के पास आया, और उसे जोर से गले लगा लिया। इस वक्त वहां कार्तिक के पास 2 नर्स भी खड़ी थी, लेकिन अयान को तो सिर्फ कार्तिक ही दिखाई दे रहा था। अयान की आंखों से आंसू बहे जा रहे थे। लेकिन उसके मुंह से एक भी शब्द नहीं निकल रहा था। कार्तिक बार-बार अयान से उसके रोने की वजह पूछे जा रहा था। लेकिन अयान के कानों में अभी भी बस कार्तिक की हंसी ही गूँजे जा रही थी। अयान कार्तिक की ना तो कोई बात सुन रहा था, और ना ही उसे अपनी बाहों से अलग कर रहा था। डॉक्टर ने वहां आकर कार्तिक को सारी बात बताई। यह सब सुनना कार्तिक के लिए भी बिल्कुल आसान नहीं था। आंखें तो कार्तिक की भी आंसुओं से भर गई थी। लेकिन उसने अभी भी अयान को समझाना और उसे चुप कराना ही सही समझा। कार्तिक ने डॉक्टर से उसके पास बचे समय के बारे में पूछा, और डॉक्टर ने कुछ हफ्ते या 1 महीने का उत्तर कार्तिक को बड़ी दबी जबान में दिया। कार्तिक के जोर देने पर अयान का भी blood टेस्ट करवाया गया, जिसमे उसकी रिपोर्ट negative आयी।



        कार्तिक की जिद पर अयान दूसरे ही दिन कार्तिक को वापस घर ले आया। कार्तिक की हालत तो उसकी बिगड़ी तबीयत की वजह से खराब ही थी, लेकिन अयान की भी तबीयत ना सोने, और बेहद रोने की वजह से खराब लग रही थी। यह हफ्ता दोनों के लिए बहुत कठिनाइयों से भरा गया। जहां अयान सब कुछ छोड़कर बस कार्तिक के छोटे-छोटे काम करने, उसे हर तरीके से आराम देने में लगा रहा, वहीं कार्तिक भी अयान के सामने नॉर्मल रहने का दिखावा करता रहा। कार्तिक अपना दर्द और तकलीफ तो अयान से छुपा सकता था, लेकिन शरीर पर बढ़ते निशान, उसका गिरता वजन, उसके चेहरे का बदला रंग, यह सब छुपा पाना नामुमकिन था। लेकिन इस एक हफ्ते भर में दोनों एक दूसरे से बिछड़ने के लिए सहज और तैयार हो गए थे। इसके लिए कार्तिक ने अयान के मन को बहुत मजबूत बना दिया था। लेकिन कार्तिक का मन रखने के लिए अयान सहज़ तो हो गया था, अपने चेहरे पर मुस्कुराहट भी ले आया था, लेकिन उसके मन में उठते तूफान, और कार्तिक से दूर होने के एहसास ने गहरी जगह बना ली थी। इस हफ्ते भर में अयान ने कार्तिक की मम्मी और बहनों को भी गांव से बुलवाकर, कार्तिक से मिलवाया था। कार्तिक ने भी अपनी सारी savings अयान को सौंप दी थी। और उसकी बहनों की शादी का जिम्मा भी अब अयान के हवाले था।



         अब कार्तिक की तबीयत पहले से कई ज्यादा खराब हो चुकी थी। अब तो बिना ऑक्सीजन सिलेंडर के उसे सांस लेने में भी कठिनाई होती थी। अब कार्तिक का सारा समय बिस्तर में लेटे हुए ही निकल जाता था। अयान भी सारे काम छोड़कर सिर्फ कार्तिक को आराम देने में ही लगा हुआ था। कार्तिक की ज़िद पर अयान ने एक शायरी तुरंत बनाकर कार्तिक को सुनाई।



"क्या होता है प्यार,


यह हमने तुमसे मिलकर है जाना।


आंखों की मदहोशी ने,


बना दिया है तुम्हारा दीवाना।


यूं तो देखे हैं हमने कई हसीन चेहरे बाज़ारों में,


सादगी की कोई बराबरी ही नहीं,


तुम्हें देखकर हमने है माना।"



           यह वो आखरी शायरी थी, जो कार्तिक ने अयान के मुंह से सुनी। और अयान की गोद में मुस्कुराकर कार्तिक ने कहा "फिर मिलेंगे" और अपनी आखिरी सांसें ली।



       अयान के लिए यह बहुत कठिन समय था। यूं तो दोनों ने इस समय के लिए एक दूसरे को बहुत हिम्मत दी थी, बहुत ढांढस बंधाया था। लेकिन जब यह समय सच में अयान के सामने था, तो उसके लिए इस समय का सामना करना बेहद ही मुश्किल था। रोते बिलखते अयान ने कार्तिक की मां और बहनों को वापस गुड़गांव बुलाया। और सारी जिम्मेदारी के साथ कार्तिक को इस दुनिया से विदा किया।




         कुछ सालों बाद कार्तिक की इच्छा के अनुसार, अयान ने उसकी दोनों बहनों की शादी करवाई, और गांव में उसकी मां के घर को नया रूप भी दिया। वह कैफ़े जहां कार्तिक काम किया करता था, अयान ने अब उस कैफ़े की half owenership भी खरीद ली है, और ऑफिस के बाद अब अयान अपना सारा समय उसी कैफे में बिताता है। कार्तिक की कमी को तो अब कैसे भी पूरा नहीं किया जा सकता, लेकिन कार्तिक के साथ बिताए अच्छे समय की यादों का सहारा ही अयान के लिए काफी है। अयान के दोनों दोस्तों के साथ साथ अब उसके मम्मी पापा का भी साथ उसके साथ है। कार्तिक के बारे में, और अपने एहसासों के बारे में, अयान अपने मम्मी पापा को अवगत करा चुका है। थोड़ा मुश्किल जरूर रहा, लेकिन अयान के मम्मी पापा ने अब उसे इस हाल में भी अपना लिया है। और इस सबमें अयान के दोस्तों की भी अहम भूमिका रही है।




     अयान को फिर से उसकी शायरियों ने सहारा दिया है। लेकिन इस बार अयान अकेला नहीं है। उसके अब ऑफिस में अच्छे दोस्त भी हैं, और कैफ़े का स्टाफ भी अब उसका परिवार बन गया है। और सबसे अहम, कार्तिक की यादें अब हमेशा उसके चेहरे पर एक मीठी मुस्कान बिखेरी रहती हैं।




"तेरी यादों का आलम,

कुछ इस तरह छाया है।

हर समय, हर घड़ी, हर पल,

घेरे मुझे तेरा साया है।

अब तक अकेलेपन के अंधेरे से भरा था मेरा जीवन,

अब इस वीराने में भी,

मेरे साथ तेरा अक्स नजर आया है।"


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Lots of love

Yuvraaj ❤️ 






Friday, July 10, 2020

"वो पहली नज़र" Part - I

Hello dear friends,
       I am again here with my new story "वो पहली नज़र" I know you all like this story as previous ones. Please give your valuable comments after reading it.




"जाने क्यों दिल आज उदास सा है,
मन मे छुपा कोई राज़ सा है,
तन्हा हम थे तन्हा ये सफ़र था,
मिल जाओ अब बस तुम,
यही बाक़ी एक ख़्वाब सा है।"



        अयान को शायरी लिखने का शौक काफी समय से था। अब तक उसने अपनी शायरियों से न जाने कितनी ही डायरियां भर डाली थीं। लेकिन आज तक किसी को भी अपनी एक भी शायरी ना ही पढ़ाई थी, ना ही सुनाई थी। यह शायरियां तो बस अयान के लिए उसका खाली समय काटने का जरिया थी। उसके अकेलेपन की साथी थी। इन शायरियों से ही वह अपने जीवन में जैसे चाहे वैसे रंग भर लिया करता था।


         अयान तिवारी, ग्वालियर शहर में अपने मम्मी पापा के साथ रहता था। अयान के मम्मी पापा दोनों ही ग्वालियर की जीवाजी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर थे। अयान बचपन से ही अपनी दादी के बहुत करीब था। मम्मी पापा के काम पर जाने के बाद दादी ही उसकी मां थी, दोस्त थी, पहली शिक्षिका थी। दादी ने बड़े लाड प्यार से अयान को पाल पोस कर बड़ा किया था। लेकिन दादी की बढ़ती उम्र और बिगड़ती तबीयत की वजह से अयान को उनका साथ ज्यादा लंबे समय तक ना मिल सका। दादी को संगीत से बड़ा लगाव था। वह घर के काम करते वक्त, अयान के साथ खेलते वक्त, कोई ना कोई धुन गुनगुनाया करती थी। और उन्हीं धुनों को शब्द देने के प्रयासों से, अयान को शायरी का शौक लग गया था। अब तो जब भी अयान को खाली समय मिलता था, वह अपनी डायरी और पेन लेकर कुछ सोच में डूब जाया करता था। कम उम्र से ही अकेले समय बिताने की वजह से अयान का स्वभाव ही बन गया था, उसे ज्यादा भीड़ भाड़ में रहना ज्यादा पसंद नहीं था। इसी स्वभाव के कारण पूरी schooling में उसके मात्र दो ही दोस्त थे। लेकिन उनकी दोस्ती भी काफी गहरी थी। लेकिन उन दोनों का साथ भी अयान को बारहवीं कक्षा के बाद छोड़ना पड़ा। वे दोनों IIT की तैयारी करने के लिए कोटा चले गए थे। उन्होंने अयान के मम्मी-पापा को अयान को भी साथ भेजने के लिए काफी मनाया, लेकिन अयान के मम्मी-पापा 1 साल बर्बाद करने के बिल्कुल पक्ष में नहीं थे।




         अयान का दाखिला ग्वालियर के आईटीएम कॉलेज में इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में करा दिया गया, और 4 सालों के बाद कॉलेज केंपस ड्राइव से अयान को गुड़गांव की एक एमएनसी, हनीवेल में जॉब भी मिल गई थी। उसका ऑफिस गुड़गांव के सुशांत lok-1 में था और वहीं पास के तारिका अपार्टमेंट में उसने एक फ्लैट भी किराए पर ले लिया था। यहां तक का यह सफर पढ़ने और सुनने में जितना सरल लग रहा है, इतना आसान अयान के लिए बिल्कुल नहीं था। हां यह सफर शायद इतना मुश्किल ना होता, अगर अयान इस सफर में अपने साथ कोई हमराही लेकर चलता। दादी का जाना, मम्मी पापा का काम में व्यस्त रहना, दोस्तों से अलग किए जाना, इस सब से अयान ने खुद को एक दीवार के पीछे कैद कर लिया था, यहां अगर उसके चेहरे पर कोई मुस्कुराहट ला सकता था, तो वो थी उसकी शायरियां। कॉलेज के 4 सालों और गुड़गांव में अब तक इस एक साल में अयान ने कभी किसी को अपने करीब आने की इजाजत ही नहीं दी थी। स्कूल के दोनों दोस्तों से अक्सर कर फोन पर बातें होती थी। उससे उम्मीद थी कि उनके कॉलेज खत्म होने के बाद शायद उन लोगों को भी दिल्ली नोएडा या गुरुग्राम में जॉब मिल जाएगी। लेकिन अब उस उम्मीद ने भी अपना दम तोड़ दिया था। अयान के एक दोस्त को बैंगलोर और दूसरे को पुणे में जॉब मिल गई थी। वैसे तो अयान अपनी सारी बातें अपने दोस्तों के साथ सांझा किया करता था, लेकिन फिर भी एक अकेलापन, उसके साथ किसी के ना होने का भाव, उसे हमेशा घेरे रहता था। और इस सब के लिए वो स्वयं ही जिम्मेदार था।




           वैसे तो अयान ने अपनी दिनचर्या कुछ इस तरह से बना ली थी, कि उसे किसी की जरूरत भी नहीं थी। सुबह 6:30 बजे उठने के बाद, 7:00 बजे तक फ्रेश होकर सोसाइटी के पार्क में जोगिंग, और थोड़ा व्यायाम। 8:30 तक नहा धोकर तैयार हो जाना, ब्रेकफास्ट में हमेशा की तरह दो अंडे का हाफ फ्राय और दो टोस्ट, एक कप गरमागरम कॉपी के साथ। 9:15 से 9:30 के बीच ऑफिस की कैब का इंतजार। 10:00 am से 7:00 pm तक ऑफिस। रात 8:00 बजे तक घर आकर फ्रेश होकर सोसाइटी के पार्क में थोड़ा टहलना और अपनी डायरी में कुछ शायरियों के साथ थोड़ा समय बिताना। रात 12:00 बजे तक खाना खा कर सो जाना। पूरा हफ्ता तो इसी दिनचर्या में कैसे निकल जाता था, अयान ज्यादा गौर नहीं करता था। लेकिन sunday!!! आज ऑफिस की छुट्टी होने के कारण अयान को कुछ और काम ढूंढने पड़ते थे, जिनमें वह खुद को व्यस्त रख सके। आज के दिन के लिए घर की साफ-सफाई, कपड़ों की धुलाई, सुपर मार्केट से हफ्ते भर का राशन, दूध, फल सब्जी लाना। ग्वालियर में घर पर फोन से बात करना, या कभी कभी वीडियो कॉल करना। फिर दोस्तों के साथ कॉन्फ्रेंसिंग कॉल। इन सभी में अपना पूरा दिन निकाल देना। सूरज ढलते ही अपने घर की बालकनी या फिर सोसायटी पार्क में अपनी डायरी के साथ समय बिताना, और अपनी शायरीयों में खो जाना।




"यूँ तो देखा है मैने, हज़ारों चेहरों में छुपे वो ख्वाब,


आईना बन खुद को खुद का अक्स वो दिखाते हैं,


चाहते तो हैं, चकोर बन छू लें चाँद की ऊंचाई को,


दिन के शोर में, उनके बिखरने की आवाज़ नही सुन पाते हैं।"




           एक दिन अपनी दिनचर्या से तंग आकर अयान में सोचा कि क्यों ना पुणे या बेंगलुरु में ही जॉब सर्च की जाए। इससे वह कम से कम अपने एक दोस्त के शहर में तो रह सकेगा। उसने पुणे और बेंगलुरु की तमाम एमएनसी में अपना रिज्यूम ऑनलाइन सेंड कर दिया।  कुछ एक दो कंपनियों से उसे रिटर्न मेल भी आया, लेकिन कहीं से भी उसे वह उत्तर नहीं मिला जिसकी तलाश अयान कर रहा था। इसके साथ ही कुछ कंपनियों ने उसके लिए एक रास्ता और खोला, कि वह वहां आकर इंटरव्यू दे सकता है। लेकिन अपनी जमी जमाई नौकरी को छोड़ कर, किसी अनजान शहर में फिर से नौकरी की तलाश में लगना, उसे यह ऑप्शन कुछ ठीक ना लगा। और फिर इसी अकेलेपन को अपनी किस्मत मान कर कुछ महीने ऐसे ही गुजर गए।



         Sunday की दिनचर्या का अनुसरण करते हुए, जब अयान अपने दोस्तों से फ़ोन पर बात कर रहा था, तो उसने अपने दोस्तों को उनकी कंपनी में वैकेंसी के बारे में पूछा। जिस पर अयान के एक दोस्त ने उसे सलाह दी, कि वह ऐसा सिर्फ हमारे साथ रहने के लिए ना करें। अगर कल को फिर से हमारा ट्रांसफर किसी दूसरे शहर में हो गया, या फिर हमारी कंपनी ने हमें विदेश भेज दिया, तो फिर अयान क्या करेगा। इसलिए सबसे अच्छा रास्ता है कि, अयान जहां है, वहीं लोगों के साथ घुले मिले, दोस्त बनाए, पार्टियों में जाए। अब अयान के दोस्त ने उसे यह सलाह दे तो दी थी, लेकिन वह भी कहीं ना कहीं यह जानता था, कि जो अयान इन 21 सालों में ऐसा नहीं कर पाया, अब ना जाने ऐसा करना उसके बस में होगा भी या नहीं।



         कुछ दिनों बाद रात के 12:00 बजे अयान का फोन बजा। अयान ने जब फोन उठाया, तब सामने से उसके दोस्तों की आवाज आई "happy birthday to you"। आज अयान का जन्मदिन था। अयान तो इस दिन को भूल ही गया था। उसके दोस्तों के उस फ़ोन कॉल ने उसे याद दिलाया कि आज अयान पूरे 22 साल का हो गया है। दादी के जाने के बाद से अयान ने अपना बर्थडे सेलिब्रेट ही नहीं किया था। उसी दिन सुबह ग्वालियर से भी उसके मम्मी पापा ने अयान को फोन पर बधाई दी। आज ऑफिस में भी HR की तरफ से अयान की डेस्क पर बर्थडे केक सजाया गया, और उसके डेस्क के आस पास के ही colleague केक कटवाने भी आ गए। सब ने तालियां बजाई और अयान ने केक काटा। सब अयान को विश करके, केक खा कर, अपने-अपने डेस्क पर जा ही रहे थे, कि अयान ने हिचकिचाते हुए बोला।


अयान :- "Office के बाद, treat के लिए चलें???"



         वहां उपस्थित सभी लोग थोड़े हैरान थे। क्योंकि यह पहली बार था कि अयान पार्टी की बात कर रहा था। आज तक अगर उसे कोई अपनी पार्टी में बुलाता था, तो अयान ना जाने का कोई ना कोई बहाना दे देता था। ऑफिस में भी सबसे अलग ही रहता था, लंच भी सबसे अलग ही करता था। पहले तो ऑफिस के कुछ colleagues ने अयान को अपने साथ लंच करने, कॉफी पर चलने, दारू पार्टी और भी न जाने क्या-क्या, के लिए साथ में आने का न्योता दिया। लेकिन हर बार मना कर देने की वजह से, अब कोई भी अयान को साथ आने के लिए पूछता भी नहीं था। और आज अयान की तरफ से पार्टी की बात सुनकर सभी चकित थे। लेकिन मुफ्त का खाना और ड्रिंक्स किसे नहीं पसंद, तो सभी शाम को पार्टी के लिए मान भी गए।



        ऑफिस के बाद सभी ने पास के ही क्रॉस पॉइंट मॉल के कैफे दिल्ली हाइट्स में जाना तय किया। सभी ने अपनी-अपनी पसंदीदा ड्रिंक्स और फूड ऑर्डर किया। अयान के लिए यह पहला मौका था, जब वह इस तरीके की पार्टी में मौजूद हो, और तो और वह पार्टी जिसके लिए उसने खुद ही लोगों को बुलाया हो। यह अयान के दोस्तों का ही आईडिया था, जिससे अयान जहां है वहीं कुछ दोस्त बना सके। वैसे तो अपनी दिनचर्या से हटकर कुछ नया करने में अयान को थोड़ी असहजता तो हो रही थी, लेकिन अब वह अपनी एक ही रफ्तार से चलती जिंदगी से तंग आ गया था। तो कुछ नया करना उसके लिए बेहद जरूरी भी हो गया था। और शायद यहां अयान को उसकी किस्मत ही लेकर आई थी। अयान ने खुद के लिए बस एक coke ही ऑर्डर की थी। जिसे लेकर आया एक वेटर, जिसके batch पर उसका नाम "कार्तिक" लिखा हुआ था।



          कार्तिक से अयान की नजरें कुछ यूं मिली, कि अयान वहां और लोगों की उपस्थिति ही भूल कर, बस उन आंखों में ही खो गया। अयान बेसुध कार्तिक को यूं देखे जा रहा था, मानो इतने सालों की घोर तपस्या का आज अयान को फल मिल गया हो। अयान की पलकें तब झपकी जब उसके कानों में कार्तिक की आवाज गूंजी।



कार्तिक :- "Sir!!!!! Sir!!!!! Sir!!!! आपका आर्डर.......!!!"



          अयान ने कार्तिक के हाथों में trey में रखी coke को उठा लिया, और वह कार्तिक को thanks कहना चाहता था, लेकिन मानो उसके होंठ सिल गए हो, और वह कुछ ना कह सका। कार्तिक भी अपना काम कर वहां से दूसरी टेबल पर चला गया। उस रात वहां मौजूद अयान के colleagues ने क्या बातें की, अयान से कुछ कहा भी या नहीं, अयान को कुछ याद ही नहीं रहा। याद रहा तो बस एक चेहरा, और उसकी आवाज। जो अभी भी अयान के कानों में गूंज रही थी। उस पूरी रात अयान के लिए सो पाना थोड़ा मुश्किल था। अयान बस अपनी करवटें बदलता रहा, और कार्तिक का चेहरा उसे अपनी बंद आंखों से भी साफ साफ दिखाई दे रहा था।



        अगली सुबह अयान अपनी सारी दिनचर्या को दरकिनार कर, जल्दी से नहा धोकर, तैयार होकर  सुबह 8:00 बजे ही, उसी कैफ़े पर पहुंच गया, जहां उसने कल उस इंसान को देखा था, जिसने उसकी दिल की धड़कनों को ही बढ़ा दिया था। लेकिन कैफ़े तक कि यह भागदौड़ आयान की व्यर्थ ही गई। कैफ़े के खुलने में अभी समय था। अयान वहीं पास पड़ी एक बेंच पर बैठकर, कैफ़े खुलने का इंतजार करने लगा। दरअसल उसे इंतजार तो सिर्फ उन आंखों का था, जिसने उसे रात भर सोने नहीं दिया था। वहीं बैठे बैठे थोड़ी देर बाद अयान ने अपनी डायरी निकाल ली, और कोई नई शायरी लिखने लग गया।




"आंखे ये मेरी तुमसे क्या कहती हैं तुम सुनो,


कानों में मेरे सरगम सी बजती है तुम कहो,


लबों पर जो ये बात आई है वो कहदो,


चुप हैं सारि बातें बस दिल मेरा ये कहे,


संग तेरे हवाओं में, फ़िज़ाओं में, उड़ता मैं रहूँ,


संग तेरे जीना है, मरना है, बस इतना ही कहूँ।"



      अपने ख्यालों में डूबे हुए, जब अयान की नजर उसकी घड़ी पर पड़ी, तो उसे पता चला कि 10:30 हो चुके हैं। और वह अपने ऑफिस के लिए लेट हो गया है। और उसने जब कैफे के दरवाजे की तरफ देखा, तो वह अभी भी बंद ही था। अयान ने और इंतजार करने से अच्छा ऑफिस जाना ही बेहतर समझा, और वह भागता हुआ ऑफिस पहुंच गया।  आज साल भर में यह पहली बार था, कि अयान 1 घंटे देरी से ऑफिस में आया हो, उसके colleagues ने उसका हाल चाल पूछा, और सब कल की पार्टी के लिए अयान को धन्यवाद भी दे रहे थे। और यह नया एहसास अयान को बेहद पसंद भी आ रहा था। और वह हंसते मुस्कुराते सभी से बात भी कर रहा था, और सभी का अभिवादन भी स्वीकार कर रहा था। अयान ने जैसे-तैसे घड़ी को बार-बार देख कर अपना आज का ऑफिस का समय निकाला, और 7 बजते ही भागते हुए, सीधे उसी कैफ़े कि, उसी टेबल पर जाकर बैठ गया। और जिसका इंतजार वह सुबह से ही कर रहा था, वही चेहरा मुस्कुराते हुए अयान की ओर बढ़ा और बोला।



कार्तिक :- "Good evening sir! Your order?



       लेकिन अयान कोई उत्तर तो तब देता, जब उसने कुछ सुना होता। वो तो बस कार्तिक के चेहरे को, उसकी आँखों को, उसकी वो प्यारी सी मुस्कुराहट को ही देखे जा रहा था।




कार्तिक :- "Sir!!!! Sir!!!! Your order????"


अयान :- (कार्तिक की आवाज़ सुन, हड़बड़ा कर) "Fried rice, munchurian, and a coke"


कार्तिक :- (मुस्कुराते हुए) "Ok Sir! Your order will take 10 to 15 minutes"




          इतना कहकर कार्तिक तो वहां से दूसरी टेबल पर चला गया, लेकिन अयान की नजरें कार्तिक का ही पीछा करती रही। जब कार्तिक, अयान की तरफ देखता, तो अयान अपने मोबाइल में, या फिर इधर उधर देखने लगता और फिर थोड़ी देर बाद, वह फिर से कार्तिक को मुस्कुराते हुए, दूसरे लोगों से बात करते देखने लगता। कुछ देर बाद कार्तिक ने अयान का आर्डर उसको दिया और अयान ने कार्तिक को थैंक्स बोला और अपना खाना खाने लगा। जो खाना 30 मिनट में खत्म किया जा सकता था, अयान ने उसे खत्म करने में पूरे 2 घंटे से ज्यादा का समय लिया। क्योंकि वह सिर्फ खाना खाने तो वहां नहीं आया था ना। जब कार्तिक अयान की टेबल साफ करने आया।


कार्तिक :- (झूठे बर्तनों को उठाते हुए) "Anything else sir???"


अयान :- ( कार्तिक की आँखों मे देखते हुए) " I want a coffee with you!!!"


कार्तिक :-  "What sir???"


अयान :- ( अपनी नज़रें चुराते हुए) "Coffee!!! I want a coffee!!"


कार्तिक :- "Ok sir! And sir please make sure, this is your last order, we are closing in 1 hour!"


अयान :- "Ok Fine !"


       

         अब कैफ़े की लाइट्स धीरे धीरे बन्द होने लगी थीं। कैफ़े का स्टाफ भी अपनी यूनिफार्म बदल चुका था। अयान भी अपनी कॉफ़ी  खत्म कर अपने मोबाइल में ध्यान देने का नाटक कर रहा था।



कार्तिक :- (अयान की टेबल की तरफ हाँथ बढ़ाते हुए) "Can i take that cup sir??"


अयान :- (मोबाइल एक तरफ रखते हुए) "yes! Sure!!"


कार्तिक :- (मुस्कुरा कर कप उठाते हुए) "Have a good night sir!"


अयान :- (कार्तिक को देखकर मुस्कुराते हुए) "Thaks! You too!!"




         आज उस कैफ़े से निकलने वाला सबसे आखरी गेस्ट अयान ही था। अयान वहां से टहलते हुए, मुस्कुराते हुए, गुनगुनाते हुए, अपने फ्लैट की ओर चल दिया। आज से पहले अयान को गुड़गांव में इतना खुश कभी नहीं देखा था। अयान को देखकर कोई नहीं कह सकता था, कि अयान कुछ महीनों पहले, अकेलेपन के कारण, यह शहर छोड़ कर जाना चाहता होगा। आज तो अयान को देखकर लग रहा था, मानो उसे इस शहर से प्यार हो, और वह हमेशा के लिए यही बस जाना चाहता हो।




        आज अयान रात 12:00 बजे अपने घर वापस आया था, और आते ही अपने बैग से डायरी निकालकर कार्तिक को याद करके कुछ शायरी लिखने लगा था।



"कितनी मदहोश हैं ये आँखे, इनमे डूबने को दिल करता है,


कितना मासूम है ये चेहरा, इसे चूमने को दिल करता है,


अब यूँ दूर रहकर, और ना तड़पाओ मुझे,


अब तो बस तुम्हे अपना बनाने को दिल करता है।"




         अब से अयान की यही नई दिनचर्या हो गई थी। ऑफिस के बाद का सारा समय अब अयान का उसी कैफे में बीतने लगा था। और अगर कोई दूसरा वेटर अयान के पास आता था, तो वह उसे कार्तिक को ही आर्डर लेने के लिए बुला देने को कहता था। कैफे के मैनेजर को तो इस बात से कोई प्रॉब्लम नहीं थी, लेकिन अब उस कैफे के स्टाफ में कार्तिक और इस नए गेस्ट को लेकर कानाफूसी जरूर शुरू हो गई थी। Sunday के दिनों में तो अयान अपना सारा काम निपटा कर दोपहर से ही कैफे में जाकर बैठ जाया करता था, और रात को कैफ़े बंद होने पर ही वहां से वापस आया करता था। लेकिन ऐसा सिर्फ 12 दिनों तक ही चला। कैफे में अब अयान को कार्तिक का गेस्ट कहकर, कार्तिक को खुलेआम चिढ़ाया जाने लगा था। और कार्तिक को यह मजाक बिल्कुल पसंद नहीं आ रहा था। तो कार्तिक ने तय किया कि आज जब वह गेस्ट आएगा, तो कार्तिक उससे बात करेगा। और अयान के कैफे में आते ही बाकी का स्टाफ कार्तिक की तरफ देख कर मुस्कुराने लगा, उसे आंख मार कर उसे चिढ़ाने लगा। कार्तिक ने जैसा सोचा था वैसा ही किया।




अयान :- (कार्तिक को अपनी ओर आता देख, मुस्कुरा कर) "Hello Kartik! How are you??"


कार्तिक :- (अयान की तरफ थोड़े रूखे भाव मे देखते हुए) "I am not good!!! Can we talk for some time??"


अयान :- (कार्तिक को असमंजस में देखते हुए) "Yeah! Sure!"


कार्तिक :- (कैफ़े के बाहर चलने का इशारा करते हुए) "Follow me"



       कार्तिक कैफे के बाहर आ कर, कैफ़े से थोड़ी दूर आ जाता है, और अयान भी उसके पीछे-पीछे वैसा ही करता है


कार्तिक :- (अयान को अब थोड़े गुस्से से देखते हुए) "क्या problem है??"


अयान :- (मुस्कुरा कर कार्तिक को देखते हुए) "कैसी problem??"


कार्तिक :- "Look! Nobody is kid here! Why are you doing this??"


अयान :- (फिरसे मुस्कुरा कर) "What i did??"


कार्तिक :- (चिढ़ते हुए) "Dont behave like a stocker dude!!!"


अयान :- (हँसते हुए) "मैं कहाँ किसी को stock कर रहा हूँ, मैं तो बस यहाँ खाने पीने आता हूँ।"


कार्तिक :- (झुंझलाते हुए) "ज्यादा न oversmart बनने की जरूरत नहीं है, अगर सिर्फ खाने पीने आते तो बात यहाँ तक आती ही नहीं। देखो यार, मैं इस job में कोई पन्गा चाहता ही नही हूँ। मैं यहाँ बिल्कुल सीधे साधे तरीके से, बिना किसी की नज़रों में आये, शांति से काम करना चाहता हूँ बस। तो तुम इस कैफ़े से ओर मुझसे दूर ही रहो। समझे।"



        इतना कहकर कार्तिक वहां से गुस्से में वापस कैफे में चला जाता है। और अयान बस वहां खड़ा मुस्कुराता हुआ, कार्तिक की बातों के बारे में सोचता हुआ, थोड़ी देर तो वहीं खड़ा रहता है, और फिर मुस्कुरा कर वापस अपने फ्लैट पर लौट आता है। वापस आकर अयान बस कार्तिक के बारे में ही सोचता रहता है, और मुस्कुराता रहता है। अयान ने आज कार्तिक को इस रूप में पहली बार देखा था, और उसे कार्तिक का गुस्सा करना बहुत पसंद आ गया था। वह कार्तिक के बारे में सोच ही रहा होता है, कि उसके फोन की घंटी बजती है। यह फोन उसके दोस्तों का कॉन्फ्रेंस कॉल होता है। अयान अपने दोस्तों से आज इस समय कॉल करने का कारण पूछता है। तो उसका एक दोस्त कहता है, कि बस उसका उन दोनों से बात करने का मन कर रहा था। उन तीनों में थोड़ी देर इधर-उधर की बातें भी होती हैं। लेकिन आज के इस कॉल में अयान के दोनों दोस्तों को ही अयान के बात करने के अंदाज में कुछ बदलाव लगने लगता है। और वे दोनों अयान पर जोर देने लगते हैं, उन्हें बताने के लिए, कि अयान आज इतना खुशमिजाज क्यों है। अयान भी बिना शर्माए उन दोनों को बता देता है, कि शायद उसे प्यार हो गया है। उसे कोई बहुत पसंद आ गया है, वह अब हमेशा उसके आसपास ही रहना चाहता है, अब बहुत खुश रहने लगा है, ऑफिस में भी लोगों से घुलने मिलने लगा है, और अब उसे यह शहर भी पसंद आने लगा है। अयान के दोनों दोस्त यह बात सुनकर बेहद खुश हो जाते हैं। और अयान से उसका नाम पूछते हैं। अयान बिना हिचके कार्तिक का नाम उन्हें बता देता है। जिस पर आयान का एक दोस्त बोलता है, कि उसने सही से नहीं सुना क्या अयान ने "कार्तिका" कहा?? जिस पर अयान उन्हें बताता है, कि कार्तिक एक लड़का है। इस पर अयान के दोनों दोस्त कुछ देर के लिए शांत हो जाते हैं। फिर थोड़ी देर बाद अयान का एक दोस्त पूछता है "अयान तू गे है क्या??" इस पर अयान उन्हें जवाब देता है, कि उसे नहीं पता। लेकिन उसने जब कार्तिक को पहली बार देखा था, वह सब कुछ भूल गया था। वहां सिर्फ कार्तिक के अलावा उसे कोई और नजर नहीं आ रहा था। बस वो पहली नजर में ही वह कार्तिक को हमेशा के लिए अपना बना लेना चाहता था। और क्या यह आकर्षण है, यह जानने के लिए उसने बहुत समय कार्तिक के आसपास गुजारा। लेकिन इससे कार्तिक के लिए उसका खिंचाव बढ़ता ही गया। तो अगर यह प्यार है, तो हाँ अयान को कार्तिक से प्यार है। और अगर इसे गे होना कहते हैं, तो हाँ अयान गे है।


        अयान की बातें सुनकर उसके दोनों दोस्त शांत हो चुके थे। थोड़ी देर के सन्नाटे के बाद अयान ने अपने दोस्तों से पूछा कि "क्या इस बात से उनकी दोस्ती पर कोई फर्क पड़ेगा??" जिसका उत्तर अयान के एक दोस्त ने दिया कि "नहीं यार ऐसा कुछ भी नहीं होगा, वह तीनों हमेशा पक्के दोस्त रहेंगे।" और अयान के दूसरे दोस्त ने भी इस बात पर हामी भरी। थोड़ी देर और उन तीनों में कार्तिक के बारे में बातें होती रहीं। फिर वे तीनों एक-दूसरे को गुड नाइट बोलकर सोने चले गए।




        दो -  एक दिन तो अयान ने यही सोच में निकाल दिए, कि वह कार्तिक के पास कैसे जाए, उससे कैसे बात करें। उसने 10 12 दिन में जो भी प्रयास किए थे, जो कि उसके लिए सबसे ज्यादा कठिन थे, उस कैफे के मैनेजर, वहां के स्टाफ से थोड़ी बहुत दोस्ती करना, कार्तिक की आखरी बात से यह साफ था, कि अयान के वे सभी प्रयास व्यर्थ हो चुके थे। फिर 1 दिन कार्तिक के पास जाकर अपने मन की बात उसे कहने के लिए अयान ने बहुत हिम्मत जुटाई, और ऑफिस के बाद कैफे से थोड़ी दूरी पर, कार्तिक के बाहर आने का इंतजार करने लगा। उसने कैफे के बाहर ही कार्तिक से बात करना सही समझा। क्योंकि अगर वह कैफ़े के अंदर जाकर, सबके सामने कार्तिक को बात करने के लिए अकेले में चलने को कहता, तो हो सकता था कि कार्तिक बुरा मान जाता, और पहले से भी ज्यादा गुस्सा करता।



         करीब रात 11:30 पर कार्तिक और बाकी का स्टाफ कैफे से बाहर आ गए। और कुछ देर आपस में बात करके, सभी अपने अपने घरों की ओर चले गए। अयान भी कार्तिक के पीछे पीछे बढ़ने लगा। कार्तिक थोड़ी दूरी पर जाकर, एक बस स्टॉप पर खड़ा शायद किसी का इंतजार करने लगा। अयान उसके पास जाता, इससे पहले वहां एक काले रंग की गाड़ी आई, जिसमें 2 लड़के बैठे हुए थे। कार्तिक ने उनसे कुछ बात की, और उनकी गाड़ी में बैठ गया। और वह गाड़ी दिल्ली की तरफ चली गई। अयान वहां खड़ा बस उस गाड़ी को जाते देखता रहा, और वह सोचने लगा कि जहां तक उसे कैफे के स्टाफ से पता चला था, कि कार्तिक सुशांत lok-1 के सी ब्लॉक में कहीं किराए के कमरे में अकेला रहता है, फिर यह दिल्ली की तरफ क्यों जा रहा है। वह कई सवाल लिए वहां से अपने फ्लैट पर आ गया। और रात भर उस गाड़ी और उसमें बैठे उन लड़कों के बारे में ही सोचता रहा।



       अगले दिन अयान ने सोच लिया था, कि आज तो वह हर हाल में कार्तिक से बात करेगा। और रात को वह फिर इंतजार करने लगा, कैफे के बाहर कार्तिक के आने का। लेकिन आज अयान थोड़ी सी तैयारी के साथ आया था, अपने साथ कुछ फूलों का गुलदस्ता भी लाया था। कार्तिक के बाहर आते ही अयान उसका पीछा करने लगा। और कार्तिक के कल वाले बस स्टॉप पर पहुंचने से पहले ही, उसने कार्तिक को आवाज लगाकर रोक लिया।




कार्तिक :- (अयान को अपनी ओर आता देख) "यहां क्या कर रहे हो तुम??"


अयान :- (कार्तिक की तरफ गुलदस्ता बढ़ाते हुए) "तुम्हारा इंतेज़ार कर रहा था। तुमसे माँफी मांगनी थी।"


कार्तिक :- (अपने हांथो से गुलदस्ता अयान की तरफ धकेलते हुए) "इसकी कोई जरूरत नही, और ना ही मुझसे माँफी मांगने की कोई जरूरत है, बस मुझसे दूर रहो।"


अयान :- "नहीं रह सकता। I Like You"


कार्तिक :- (अयान की बात सुन, हंसकर) " क्या??"


अयान :- (कार्तिक को हंसता देख, मुस्कुरा कर) " सच मे। जबसे तुम्हे पहली बार देखा है, मैं बहुत attracted feel कर रहा हूँ। और इन कुछ दिनों में तो शायद मैं तुमसे प्यार भी करने लगा हुँ।"


कार्तिक :- (और जोर से हँसते हुए) "प्यार??? तुम मुझे जानते भी नही हो। एक काम करो, घर जाओ, पेंट उतारो, और मेरे बारे में सोच कर अच्छे से हिलाओ, 2 मिनट में सारा प्यार बाहर आ जायेगा, और तुम हल्का महसूस करोगे।"


       इतना कहकर हंसते हुए कार्तिक वहां से जाने लगता है, और हंसते हुए बड़बड़ा के जाता है, "प्यार करता हूं"। अयान कार्तिक को रोकने के लिए फिर से उसके पीछे जाता है, और उसी बस स्टॉप पर कार्तिक आज किसी दूसरी गाड़ी में बैठकर जा रहा होता है। कुछ देर अयान वहीं खड़ा रहता है, और थोड़ी देर बाद मन मारकर अपने फ्लैट पर वापस आ जाता है।




    क्या अयान कार्तिक को अपने दिल का हाल बता पायेगा? क्या कार्तिक अयान के दिल की बात समझ पायेगा? ऐसे कई सवालों को जानने के लिए बने रहे अयान और कार्तिक के साथ। Next part will be uploaded soon. Hope you like my this story as previous ones. Plz give your valuable comments here or wherever you read this story.





Lots of love

Yuvraaj ❤️


   























Shadi.Com Part - III

Hello friends,                      If you directly landed on this page than I must tell you, please read it's first two parts, than you...