Tuesday, July 14, 2020

"वो पहली नज़र" Final Part


Hope you all already read the first part of this story, if not than please go and read it fast.


        घर आकर अयान बहुत ज्यादा मायूस महसूस कर रहा था। और बार-बार कार्तिक की कही बात के बारे में ही सोचे जा रहा था। कि उसने क्यों गंदे शब्दों में उसकी बात का रिप्लाई दिया। लेकिन कुछ देर बाद उसने एक बात नोटिस की, कि कार्तिक को यह सुनकर कि, अयान को उससे प्यार है, जरा भी आश्चर्य महसूस नहीं हुआ। और ना ही उसने ऐसा कहा कि, वह स्ट्रेट है, या की वह गे नहीं है। अब इस बात का भी, अयान अपने मन को तसल्ली देने के लिए कई अर्थ निकालने लगा, कि हो सकता है कि वह भी गे हो, और बस कैफे में किसी को इस बारे में पता ना चले, इसलिए अयान से दूरी बना रहा हो। और जब कार्तिक ने गुस्से में उसे कैफे में आने से मना किया था, तब भी उसने ऐसा नहीं कहा था, कि वह स्ट्रैट है। यह सब सोचकर तो अब अयान की खुशी का ठिकाना ही नहीं था। और उसने ठान लिया कि वह कल फिर कार्तिक से बात करेगा, और कल पूरी बात किए बिना उसे जाने नहीं देगा।




    अगले दिन ठीक समय पर अयान कार्तिक से मिलने पहुंच गया।


कार्तिक :- "तुम फिर आ गए यार??"


अयान :- "I know तुम भी गे हो, और तुम्हारे कैफ़े में किसी को पता ना चले, इसलिए तुम मुझे खुद से दूर करना चाहते हो।"


कार्तिक :- (हँसते हुए) "हाँ मै गे हूँ, हाँ मै नहीं चाहता कि कैफ़े में किसी को इस बारे में पता चले। इसलिए तो मैने तुम्हे कैफ़े में आने से मना किया। और thank you की तुमने मेरी बात मान ली।"


अयान :- " हाँ तो फिर अब क्या problem है? I promise मैं इस बात को किसी को भी नही पता लगने दूंगा।"


कार्तिक :- "Thank you!! लेकिन जैसा तुम सोच रहे हो, वैसा हमारे बीच कुछ नही हो सकता।"


अयान:- (कार्तिक का हाँथ पकड़ते हुए) "एक मौका तो दे कर देखो। मैं सच मे तुम्हे बहुत प्यार करने लगा हूँ।"


कार्तिक :- (अपना हाँथ अयान के हाँथ से छुड़ाते हुए) "Dear बात तुम्हारी नही, मेरी है। मैं किसी से भी प्यार करने के लिए नही आया हूँ। मेरी कुछ जरूरतें हैं, और उन सब के सामने ये प्यार व्यार बहुत छोटी चीज़ है। मैं तुमसे request करता हूँ, मुझसे दूर रहो! Please!!"


      इतने में ही पीछे से एक गाड़ी से हॉर्न की आवाज आती है, और कार्तिक उस गाड़ी में बैठ कर वहां से चला जाता है।


           उस रात अयान के लिए सो पाना थोड़ा मुश्किल था।कार्तिक कई सारे सवाल छोड़ गया था, अयान के लिए। और उनके जवाब ढूंढ पाना नामुमकिन सा था। जब आप पहली नजर में ही किसी को अपना दिल दे बैठते हो, तो वह एहसास ही आपके अंदर, एक नए आप को जन्म दे देता है। वह इंसान आपके लिए फिर सारी दुनिया में सबसे ज्यादा खास बन जाता है। उसका हंसना, उसका बोलना, उसका मुस्कुराना, आपको बेहद अच्छा लगने लगता है। उस इंसान को पाने के लिए, उसके आसपास रहने के लिए, आप सारी दुनिया से भी लड़ने को तैयार हो जाते हो। वह पहली नजर का पहला प्यार, उन एहसासों में से एक है, जिसकी तुलना किसी और एहसास से की ही नहीं जा सकती। कार्तिक भी तो अयान का पहला प्यार था, तो वो उसे इतनी आसानी से कैसे जाने दे सकता था। अयान ने अपने दोस्तों से भी इस परेशानी के लिए कुछ सुझाव मांगे, और उन्हीं के निर्णय स्वरुप, अयान अब हर शाम ऑफिस खत्म होने के बाद, कैफे से कुछ दूरी बनाकर कार्तिक का इंतजार करने लगा। कार्तिक भी अयान को नोटिस करता, लेकिन नजरअंदाज कर वहां से चला जाता। ऐसा कुछ है 6-7 दिन लगातार होता रहा।



कार्तिक :- (अयान की तरफ आते हुए) "यार! क्यों अपना समय ऐसे बर्बाद कर रहे हो??"


अयान :- (मुस्कुरा कर) "ऐसा तुम्हे लग रहा होगा। मैं तो तुम्हे देख लेता हूं तो मेरा दिन अच्छा बन जाता है।"


कार्तिक :- ( अयान की बात सुन मुस्कुरा कर) "अरे वाह!! फिल्मी dailogue!! Hmmmmmm very good। कहीं और try करो तो शायद तुम्हारी दाल भी गल जाए।।"


अयान :- "शायद तुम मुझे अभी भी कोई stocker या फिर sex seeker समझ रहे हो। लेकिन मुझे तुमसे प्यार के अलावा कुछ और नही चाहिए।"


कार्तिक :- (हँसते हुए) "Sex seekers में daily देखता हूँ, trust me, i know तुम sex seeker नही हो। अगर तुम्हें केवल sex चाहिए होता, तो मुझे कोई प्रॉब्लम नही थी। लेकिन तुम्हे जो चाहिए, वो मेरे पास नही है।"



            इतना कहकर कार्तिक मुस्कुरा कर वहां से जाने लगता है, और अयान पीछे से उसका हाथ पकड़ कर उसे रोकता है।



अयान :- "क्या मतलब??? तुम्हारी बाते पहेलियों की तरह लगती है मुझे, मैं नही समझ पा रहा तुम क्या कहना चाहते हो?"



कार्तिक :- (अपना हाँथ अयान के से छुड़ाते हुए, मुस्कुरा कर) "बस इतना समझ लो की, मैं किसी के प्यार के काबिल नही हुँ। लेकिन तुम अच्छे लगे मुझे, तो जब भी free हो बता देना, मैं free में चलूंगा तुम्हारे साथ।"



         और कार्तिक हंसकर, अयान के गालों पर एक किस कर के, वहां से चला जाता है। और थोड़ी दूरी पर खड़ी एक गाड़ी में जाकर बैठ जाता है, और वह गाड़ी उसे वहां से ले कर चली जाती है।



           अब तो कार्तिक अयान के लिए एक पहेली बना जा रहा था, और कार्तिक की बातें, उसे उस पहेली में और उलझाती जा रही थी। लेकिन आज की कार्तिक की बातें, और उसके हर रोज अलग अलग गाड़ियों में बैठकर जाने से, कुछ तो एकदम साफ नजर आ रहा था, लेकिन अयान ऐसा कुछ कार्तिक के बारे में नहीं सोचना चाहता था।



         अगली रात जब कार्तिक कैफ़े से निकला, तो अयान उसका बेसब्री से इंतजार कर रहा था। और कार्तिक को अपनी ओर आते देख, उससे रहा नहीं गया और वह भागकर कार्तिक के पास गया और बोला।


अयान :- "मैं आज free हूँ, चलो मेरे साथ।"


कार्तिक :- (ठहाके लगा कर हँसते हुए) "क्या??? कहाँ चलो???"


अयान :- "तुमने कल कहा था ना, जब मैं free हूँ तब चलोगे मेरे साथ, तो चलो, आज मैं free हूँ।"


कार्तिक :- (मुस्कुराते हुए) "Sorry dear! आज ही मुझे 3 दिनों के लिए आगरा जाना है, अपने client के साथ। Sunday!!! Sunday को मिलते हैं, कैफ़े के बाद। अपना address देदो मैं पहुंच जाऊंगा।"


अयान :- (मुस्कुराते हुए) "नहीं। मैं खुद आ जाऊंगा तुम्हे लेने।"



          Sunday को मिलना तय कर अयान आज इतने दिनों बाद खुशी खुशी अपने फ्लैट पर वापस आया था। कार्तिक कि कहीं बाकी सब बातों को नजरअंदाज कर, वह सिर्फ इस बात से खुश था कि, Sunday को वह कार्तिक के साथ कुछ पल एक साथ बिताएगा।  उस रात थोड़ी चैन की नींद ली थी अयान ने। और इन 3 दिनों में ना जाने कितनी ही प्लानिंग कर ली थी उसने कि, कैसे घर को सजायेगा, खाने के लिए क्या होगा, क्या-क्या बातें होंगी, वगैराह - वगैराह।



         आखिर 3 दिन बीते और sunday भी आ गया। सुबह जल्दी आंख खुल गई थी आज अयान की, या यूं कहूं सारी रात नहीं सो पाया था कार्तिक से मिलने की खुशी में। सारा दिन घर की साफ सफाई और सजावट में निकला। और खाने में कुछ चाइनीज़ बनाना ही तय किया। रात होते ही अयान कार्तिक को लेने कैफ़े पहुंच गया, और कार्तिक को अपने साथ अपने फ्लैट पर ले आया।



कार्तिक :- (अयान के फ्लैट में अंदर आते हुए) "Nice house!"


अयान :- "Thank you! बताओ पहले कुछ drinks लोगे या खाना serve करूं।"


कार्तिक :- (अयान को अपनी बाहों में भरते हुए) "अरे मैं इस सब के लिए थोड़ी आया हूँ यंहा। तुम तो सीधे अपने बेडरूम में ले चलो।"



अयान :- (कार्तिक की आँखों मे प्यार से देखते हुए) "मुझे तो बस तुम्हारे साथ वक़्त बिताना है। तुम्हे जानना है, तुम्हे अपना प्यार समझना है।"


कार्तिक :- (मुस्कुराते हुए) "देखो! कहा था ना मैने, तुम औरों जैसे नहीं हो। और बस यही बात मुझे तुम्हारे पास नही आने देती।"



        इतना कहकर कार्तिक मुस्कुराते हुए, अयान से अलग होकर खाने की मेज की तरफ चला जाता है, और अयान भी उसके पीछे-पीछे वहां आता है।



अयान :- (कार्तिक के बैठने के लिए कुर्सी खींचते हुए) " मैं कब तुम्हें अभी कुछ commit करने के लिए कह रहा हूं, बस मेरे साथ थोड़ा वक्त बिताने को ही तो कह रहा हूं। शायद तुम्हें मेरा साथ पसंद आ जाए, और तुम्हें मुझे कम से कम एक मौका तो देना चाहिए।"


कार्तिक :- (अयान द्वारा खिसकाई कुर्सी पर बैठते हुए) "मैं पहले भी तुम्हे बता चुका हूँ, मैं ऐसा कुछ नही करना चाहता।"


अयान :- (कार्तिक के सामने वाली कुर्सी पर बैठते हुए) " वही तो मैं जानना चाहता हूं, कि आखिर ऐसा क्यों? क्या मैं तुम्हें पसंद नहीं? या फिर तुम्हारी life में कोई और है? अगर ऐसी कोई बात है, तो तुम मुझे बता सकते हो, I promise मैं कभी तुम्हारे रास्ते में नहीं आऊंगा।"


कार्तिक :- "अयान मैं एक escort हूँ, sex worker"


      कार्तिक की यह कहते ही वहां एकदम सन्नाटा सा हो जाता है। अयान बस कार्तिक ने जो कहा, उसे अपने दिमाग में बैठाने की कोशिश कर रहा था, और तभी कार्तिक ने ही बात को आगे बढ़ाया।


कार्तिक :- "I know यह सुनने के बाद तुम्हारी सारी feelings बदल जायेंगी। लेकिन सच मानो मुझे इससे कोई भी फर्क नहीं पड़ता। तुम अगर मेरे बारे में कुछ गलत सोचोगे, तो भी मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। और तुम चाहो तो मैं तुम्हारे साथ बेडरूम में भी चल सकता हूं, और अभी इस घर से बाहर भी जा सकता हूं। जैसा तुम्हें ठीक लगे, लेकिन यह मेरी सच्चाई है।"



अयान :- (कुछ देर सोचने के बाद ) "लेकिन क्यों?? अगर कैफ़े की payment से ज्यादा चाहिए, तो तुम कुछ और काम भी तो कर सकते हो।"


कार्तिक :- "मैं सिर्फ 8 तक पड़ा हूँ, और किसी भी काम से मुझे इतने पैसे नहीं मिलेंगे, जो अभी मिलते हैं। और कैफ़े तो बस दिन में खुद को busy रखने के लिए, और normal feel करने के लिए है बस।"


अयान :- "Normal मतलब??"


कार्तिक :- "जब खुद को शीशे में देखता हूं तो घिन आती है, कैफे में काम करके थोड़ा normal महसूस होता है।"


अयान :- " मतलब तुम्हें खुद यह सब करना पसंद नहीं है। तो फिर क्यों करते हो?"


कार्तिक :- " गांव में मां है, दो बहने हैं, उनकी सारी जिम्मेदारी है मुझ पर। जब घर पैसे भेजता हूं, तो उस खुशी के आगे यह सब बहुत छोटा लगता है।"


अयान :- " कैफे में किसी को पता है तुम्हारे इस काम के बारे में?"


कार्तिक :- " नहीं!!  किसी को नहीं पता। पहले मैं दिल्ली में ही काम करता था। लेकिन फिर वहां धीरे-धीरे मेरे बारे में पता चलने लगा। तो मैं यहां गुड़गांव में आ गया। और मेरे कस्टमर्स तो वेबसाइट से आ ही जाते हैं।"


अयान :- "वेबसाइट???"


कार्तिक :- "Hmmmmm, Rentmen नाम की एक वेबसाइट है, वहां से मुझे मेरे कस्टमर्स मिल जाते हैं। मैं कोई सड़क छाप escort थोड़ी हूँ। (मुस्कुराते हुए)"


     कार्तिक की सारी बातें सुनकर अयान अब शांत हो जाता है। शाम तक जहां उसके मन में इतने सारे ख्याल, इतनी सारी बातें, चल रही थी। अब वह सब धुंधली हो चुकी थी। कार्तिक भी अयान की इस चुप्पी को समझता है, और कहता है।



कार्तिक :- " मैं समझ सकता हूं, तुम्हें अभी कैसा लग रहा होगा, यह सब सुनकर। इसलिए मैं तुम्हें खुद से दूर रहने के लिए कहता था। मैं तुम्हारे प्यार के लायक नहीं हूं। लेकिन जब भी तुम्हारी आंखों में देखता हूं, तो लगता है, कि यह सब छोड़ कर तुम्हारे साथ कहीं दूर चला जाऊं। लेकिन ऐसा कर पाना मेरे लिए मुमकिन नहीं। और मैं तुम्हारे लिए सही इंसान भी नहीं।"


       कार्तिक थोड़ी देर इंतजार करता है, कि शायद अब अयान कुछ बोलेगा, लेकिन अयान तो अभी भी, कार्तिक की बातों के बारे में ही सोचे जा रहा था।


कार्तिक :- "Ok तो फिर चलो, अब मुझे चलना चाहिए। तुमसे मिलकर, तुमसे बात करके, अच्छा लगा। तुम्हारी हफ्तों की कोशिशों ने मेरे दिल में भी तुम्हारे लिए जगह तो बना ही दी थी, लेकिन यह सही भी तो नहीं है। हमारी मुलाकातों का यहीं पर खत्म होना ही हमारे लिए ठीक रहेगा।"



       कार्तिक वहां से उठता है, और अयान के फ्लैट से बाहर चला जाता है। अयान अभी भी वही खाने की मेज पर बैठा कार्तिक की कहीं एक एक बात को समझने, और अपने दिल और दिमाग में उतारने की कोशिश करता है। इस रात का यूं अंत होगा यह तो ना अयान ने कभी सोचा था, नाही कार्तिक ने। कुछ देर बाद अयान का फोन बजता है, अयान फोन उठाता है, तो सामने से उसके दोनों दोस्त उससे आज रात की सारी बातें जानना चाहते थे। अयान के बताए अनुसार, आज अयान कार्तिक के सामने अपने प्यार का इजहार करने वाला था। लेकिन अयान के दोस्तों को सुनने को कुछ और ही मिलता है। अयान के दोस्तों को जब सारी बात पता चलती है, तो उन्होंने ना चाहते हुए भी अयान को कार्तिक से दूर रहने की सलाह दी। लेकिन ऐसा कर पाना अयान के लिए बेहद मुश्किल था। कुछ दिनों तक अयान के दिमाग और दिल के बीच एक द्वंद्व चलता रहा। जहां उसका दिमाग कार्तिक के दूसरे पहलू पर जोर देता। वही उसका दिल कार्तिक के प्रति प्यार का एहसास कराता। और इस उधेड़बुन में आखिरकार जीत हुई तो उस पहली नजर की, जो अयान के दिल में बहुत गहरी जगह बना चुकी थी। उसके आगे बाकी सब कुछ नजरअंदाज कर, अयान कैफे के बाहर कार्तिक के आने का इंतजार करने लगा।



कार्तिक :- (अयान को वहां देख कर, आश्चर्य से) "तुम!!!! मुझे नहीं लगा था, की अब मैं दोबारा तुम्हें कभी भी देखूंगा।"


अयान :- (कार्तिक की ओर बढ़ते हुए) "मेरे कुछ सवाल हैं, जिनका जवाब मुझे चाहिए।"


कार्तिक :- (अयान को साथ चलने का इशारा करते हुए) "बिल्कुल, आज मैं free हूँ, हम आराम से बात कर सकते हैं।"


अयान :- "तुम ये काम शौक से करते हो, या मजबूरी में?"


कार्तिक :- (अयान की तरफ देख कर, मुस्कुरा कर) "कोई भी ये काम शौक से तो नही ही करेगा।"


अयान :- "तो तुम ये काम छोड़ सकते हो??"


कार्तिक :- "इस काम की ज्यादा उम्र वैसे भी नही होती, आज से 8 10 साल बाद ही मुझे कोई नही पूछेगा।"


अयान :- (कार्तिक का हाँथ पकड़ कर) "तो जो कुछ समय बाद करना है, वो अभी ही क्यों नहीं। मैं इसमे तुम्हारी पूरी मदद करूँगा।"


कार्तिक :- (अयान की तरफ मुड़कर, उसके हाँथ के ऊपर हाँथ रख कर) " मेरा सच जानने के बाद भी तुम यहां खड़े हो, इसी से तुम्हारे लिए मेरे मन में बहुत respect है।  लेकिन दोनों बहनों की शादी, मां के लिए घर, इस काम के बिना, मैं यह सब नहीं कर पाऊंगा। और इन सब के लिए मैं तुम्हारी मदद नहीं लेना चाहूंगा। क्योंकि फिर तुम से पैसों की मदद लेकर, अगर मैं तुम्हारे साथ रहूंगा, तो वह भी मेरे इस काम के बराबर ही रहेगा। और मैं ऐसा बिल्कुल नहीं करूंगा। मैं बिल्कुल झूठ नहीं बोलूंगा, तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो। जब तुम बिना कुछ कहे, मेरे गुस्से में कही बातों को भी मान लेते हो, और आज यहां आकर मुझसे ऐसे बात करके, तुम्हारे लिए मेरी पसंद और बढ़ गई है। लेकिन अब इसे यहीं तक रखें, तो हम दोनों के लिए बेहतर रहेगा।"



      यह कहते वक्त कार्तिक की आंखें नम थी। इसके दो कारण थे। एक तो यह, कि वह खुद भी इस गंदगी से दूर जाना चाहता था, लेकिन अपनी मजबूरी की वजह से वह चाहकर भी ऐसा नहीं कर सकता था। और दूसरा कारण था अयान!!!! अयान वो पहला लड़का था, जो इतने दिनों से कार्तिक के आगे पीछे sex के लिए नहीं, बल्कि प्यार के लिए घूम रहा था। कार्तिक के मन में भी अब तक अयान के लिए एक खास जगह बन चुकी थी। लेकिन अयान का साथ कहीं उसे कमजोर ना बना दे, इसलिए वह अयान से दूरी बनाए रखना चाहता था। लेकिन आज अयान पीछे हटने के मूड में ही नहीं था।



अयान :- " मैं  भी तुमसे कोई झूठ नहीं बोल रहा, लेकिन तुमसे मिलने से पहले, मैंने कभी सोचा तक नहीं था, कि मुझे कभी प्यार भी होगा। वह भी एक लड़के से। तो मैं अपने पहले प्यार को इतनी आसानी से तो नहीं जाने दूंगा। मैं यह बिल्कुल नहीं चाहता, कि कुछ सालों के बाद, मैं यह सोचूं, कि शायद ऐसा किया होता, या यह कोशिश की होती, तो शायद आज हमारी जिंदगी कुछ और होती। तो मैं वह सब try कर लेना चाहता हूं, जिससे मैं तुम्हें अपनी जिंदगी में हमेशा के लिए कैद कर सकूं। और मैं चाहता हूं कि तुम भी मुझे एक मौका दो। अगर मैं ऐसा नहीं कर पाता, तो तुम आजाद रहोगे मेरी तरफ से। और मैं तुम्हें कभी परेशान नहीं करूंगा। लेकिन तुम्हें मेरे भरोसे पर बस एक बार भरोसा तो करना ही होगा।"



        इस समय अयान की आंखों में जो विश्वास की चमक थी, कार्तिक के लिए उसे नजरअंदाज करना नामुमकिन था। और वह बिना कुछ सोचे समझे, अयान की आंखों में देखकर, "हां" मैं अपना सर हिला देता है। और अयान के चेहरे को अपने हाथों में पकड़ कर, उसके होठों पर kiss करता है।



थम सा गया है ये जहाँ,

आगोश में आकर तेरे।

रुक सी गई है ये धड़कन,

छू के होठों को तेरे।

मैं तो चाहूं रुकना, तेरी बाहों में हमेशा के लिए।

लेकिन जब जिस्म से निकले ये रूह,

तो नाम तेरा ही आए लबों पे मेरे।



        कुछ समय बाद सब कुछ एक परियों की कहानियों की तरह होने लगा था। कार्तिक अब अयान के साथ उसके फ्लैट में शिफ्ट हो गया था। अयान ने अपनी ही कंपनी के कॉल सेंटर में कार्तिक की जॉब लगवा दी थी। कार्तिक ने इंग्लिश बोलना पहले से ही सीख रखा था, जो उसके काम के लिए भी फायदेमंद था। और उसका फायदा अयान को भी मिला, और थोड़ी जद्दोजहद के बाद कार्तिक को कॉल सेंटर की जॉब मिल गई थी। दिखने में कार्तिक किसी हीरो से कम नहीं था। जिसका फायदा वह अभी तक अच्छे रुपए खर्च करने वाले कस्टमर्स की तलाश में उठाया करता था। और इसी खूबसूरती का फायदा अयान ने भी उठाया। दिल्ली की कई मॉडलिंग एजेंसीज में कार्तिक का पोर्टफोलियो भेजा, और धीरे-धीरे कार्तिक को मॉडलिंग के असाइनमेंट भी मिलने लगे। तो जिन पैसों के खातिर कार्तिक जिस्मफरोशी किया करता था, उसका इंतजाम अयान ने अपनी सूझबूझ से कर दिया था। रही बात कार्तिक के अयान के साथ उसके फ्लैट में रहने की, तो इसके लिए भी अयान ने ही कार्तिक को मनाया था। अयान के लिए अब कार्तिक से दूर रहना थोड़ा मुश्किल हो गया था। उधर कार्तिक भी एक शर्त पर ऐसा करने को राजी हुआ था, कि जितना खर्चा उसका अभी अकेले रहने पर होता है, कम से कम उतने रुपए अयान को कार्तिक से लेने ही होंगे। और दोनों अपनी अपनी रजामंदी से एक साथ एक फ्लैट में रह रहे थे।



        इसी बीच दोनों का रिश्ता भी मजबूत हो रहा था। जहां अयान तो कार्तिक के लिए अपने प्यार का इजहार पहले ही कर चुका था, वहीं अब कार्तिक भी इस रिश्ते को प्यार का नाम दे रहा था। कार्तिक की तरफ से बढ़ती नजदीकियों को अयान ने kissing, hugging, cuddling तक ही रोका हुआ था। कार्तिक के मन में कभी यह बात ना आए की, शारीरिक संबंध अयान की, की हुई मदद के लिए हैं। इसलिए  अयान उस सही समय के इंतजार में कार्तिक से थोड़ी दूरी बनाए हुए था। कार्तिक ने फोन पर अपने घर वालों की बात अयान से कराई थी, और अयान के भी दोस्त वीडियो कॉलिंग के जरिए दोनों को साथ देख चुके थे। अयान कि वह शायरी की डायरी जो अभी तक सिर्फ अयान की निजी वस्तुओं में शामिल थी, अब कार्तिक अयान की हर एक शायरी पढ़ चुका था, और वाहवाही भी कर चुका था। अयान की उन शायरियों को एक किताब का रूप देने के लिए कार्तिक बार-बार अयान को मनाता भी था। और बातों ही बातों में कार्तिक के फ्यूचर प्लांस का अयान को एल्म हो चुका था। कार्तिक की सबसे पहली priority अपनी बहनों की, किसी अच्छे घर में, बड़ी धूमधाम से शादी करने की थी। और उसके बाद कार्तिक एक कैफ़े भी खोलना चाहता था। और इसके लिए उसने अभी तक कुछ savings भी कर रखी थीं।



           अब बारी थी अयान के मम्मी पापा को, अयान के और कार्तिक के रिश्ते के बारे में बताने की। अयान के दोस्तों ने उसे सलाह दी, कि वह खुद ग्वालियर जाकर उन्हें इस बारे में बताएं। और अयान भी इस सुझाव को मान गया। कार्तिक और अयान की आज रात की ट्रेन थी। लेकिन आज सुबह से ही कार्तिक की तबीयत थोड़ी ठीक नहीं लग रही थी, उसे हल्का बुखार भी था, हल्का फ्लू जैसा भी लग रहा था। कार्तिक ने आज के अपने सारे काम कैंसिल कर घर पर रहना ही तय किया, और कुछ दवा भी खाई। जिससे उसे थोड़ा आराम भी मिल गया। अयान भी आज कार्तिक के साथ घर पर ही रुकना चाहता था, लेकिन कार्तिक ने उसे जबरदस्ती ऑफिस भेज दिया। शाम को जब अयान घर वापस आया, तो कार्तिक को सुबह से भी ज्यादा बुखार था। उसने सबसे पहले रात के ग्वालियर की ट्रेन के टिकट कैंसिल किए, और कार्तिक को पास के ही एक क्लीनिक पर ले गया। डॉक्टर ने भी कार्तिक को चेक किया और फ्लू की 3 दिन की दवा देकर वापस भेज दिया।



        रात भर अयान कार्तिक के सिरहाने ही बैठा रहा, और ठंडे पानी की पट्टियां उसके सर पर बदलता रहा। लेकिन उस डॉक्टर की दी दवा का कुछ खास असर उसे कार्तिक के ऊपर दिखाई नहीं दे रहा था। अब तो कार्तिक की skin पर कई जगह  rashes भी नजर आने लगे थे। और कार्तिक को normal से कहीं ज्यादा पसीना भी आ रहा था। दोनों ने सुबह का इंतजार किया। सुबह होते ही अयान कार्तिक को अलकेमिस्ट हॉस्पिटल ले गया। कार्तिक को हॉस्पिटल में एडमिट कर ड्रिप लगा दी गई, और कुछ टेस्ट करवाए गए। शाम तक सभी टेस्ट की रिपोर्ट आ चुकी थी। डॉक्टर ने अयान को अपने केबिन में बुलाया, और बताया कि कार्तिक को HIV Infection है, और यह थर्ड स्टेज यानी AIDS है।



          यह सुनने के बाद अयान के कानों में बस कार्तिक की बातें, उसकी हंसी ही गूंजने लगी। उसके सामने बैठे डॉक्टर ने इसके बाद जो भी बोला अयान को कुछ भी सुनाई ही नहीं दिया। कुछ देर बाद अयान वहां से उठा और सीधा कार्तिक के पास आया, और उसे जोर से गले लगा लिया। इस वक्त वहां कार्तिक के पास 2 नर्स भी खड़ी थी, लेकिन अयान को तो सिर्फ कार्तिक ही दिखाई दे रहा था। अयान की आंखों से आंसू बहे जा रहे थे। लेकिन उसके मुंह से एक भी शब्द नहीं निकल रहा था। कार्तिक बार-बार अयान से उसके रोने की वजह पूछे जा रहा था। लेकिन अयान के कानों में अभी भी बस कार्तिक की हंसी ही गूँजे जा रही थी। अयान कार्तिक की ना तो कोई बात सुन रहा था, और ना ही उसे अपनी बाहों से अलग कर रहा था। डॉक्टर ने वहां आकर कार्तिक को सारी बात बताई। यह सब सुनना कार्तिक के लिए भी बिल्कुल आसान नहीं था। आंखें तो कार्तिक की भी आंसुओं से भर गई थी। लेकिन उसने अभी भी अयान को समझाना और उसे चुप कराना ही सही समझा। कार्तिक ने डॉक्टर से उसके पास बचे समय के बारे में पूछा, और डॉक्टर ने कुछ हफ्ते या 1 महीने का उत्तर कार्तिक को बड़ी दबी जबान में दिया। कार्तिक के जोर देने पर अयान का भी blood टेस्ट करवाया गया, जिसमे उसकी रिपोर्ट negative आयी।



        कार्तिक की जिद पर अयान दूसरे ही दिन कार्तिक को वापस घर ले आया। कार्तिक की हालत तो उसकी बिगड़ी तबीयत की वजह से खराब ही थी, लेकिन अयान की भी तबीयत ना सोने, और बेहद रोने की वजह से खराब लग रही थी। यह हफ्ता दोनों के लिए बहुत कठिनाइयों से भरा गया। जहां अयान सब कुछ छोड़कर बस कार्तिक के छोटे-छोटे काम करने, उसे हर तरीके से आराम देने में लगा रहा, वहीं कार्तिक भी अयान के सामने नॉर्मल रहने का दिखावा करता रहा। कार्तिक अपना दर्द और तकलीफ तो अयान से छुपा सकता था, लेकिन शरीर पर बढ़ते निशान, उसका गिरता वजन, उसके चेहरे का बदला रंग, यह सब छुपा पाना नामुमकिन था। लेकिन इस एक हफ्ते भर में दोनों एक दूसरे से बिछड़ने के लिए सहज और तैयार हो गए थे। इसके लिए कार्तिक ने अयान के मन को बहुत मजबूत बना दिया था। लेकिन कार्तिक का मन रखने के लिए अयान सहज़ तो हो गया था, अपने चेहरे पर मुस्कुराहट भी ले आया था, लेकिन उसके मन में उठते तूफान, और कार्तिक से दूर होने के एहसास ने गहरी जगह बना ली थी। इस हफ्ते भर में अयान ने कार्तिक की मम्मी और बहनों को भी गांव से बुलवाकर, कार्तिक से मिलवाया था। कार्तिक ने भी अपनी सारी savings अयान को सौंप दी थी। और उसकी बहनों की शादी का जिम्मा भी अब अयान के हवाले था।



         अब कार्तिक की तबीयत पहले से कई ज्यादा खराब हो चुकी थी। अब तो बिना ऑक्सीजन सिलेंडर के उसे सांस लेने में भी कठिनाई होती थी। अब कार्तिक का सारा समय बिस्तर में लेटे हुए ही निकल जाता था। अयान भी सारे काम छोड़कर सिर्फ कार्तिक को आराम देने में ही लगा हुआ था। कार्तिक की ज़िद पर अयान ने एक शायरी तुरंत बनाकर कार्तिक को सुनाई।



"क्या होता है प्यार,


यह हमने तुमसे मिलकर है जाना।


आंखों की मदहोशी ने,


बना दिया है तुम्हारा दीवाना।


यूं तो देखे हैं हमने कई हसीन चेहरे बाज़ारों में,


सादगी की कोई बराबरी ही नहीं,


तुम्हें देखकर हमने है माना।"



           यह वो आखरी शायरी थी, जो कार्तिक ने अयान के मुंह से सुनी। और अयान की गोद में मुस्कुराकर कार्तिक ने कहा "फिर मिलेंगे" और अपनी आखिरी सांसें ली।



       अयान के लिए यह बहुत कठिन समय था। यूं तो दोनों ने इस समय के लिए एक दूसरे को बहुत हिम्मत दी थी, बहुत ढांढस बंधाया था। लेकिन जब यह समय सच में अयान के सामने था, तो उसके लिए इस समय का सामना करना बेहद ही मुश्किल था। रोते बिलखते अयान ने कार्तिक की मां और बहनों को वापस गुड़गांव बुलाया। और सारी जिम्मेदारी के साथ कार्तिक को इस दुनिया से विदा किया।




         कुछ सालों बाद कार्तिक की इच्छा के अनुसार, अयान ने उसकी दोनों बहनों की शादी करवाई, और गांव में उसकी मां के घर को नया रूप भी दिया। वह कैफ़े जहां कार्तिक काम किया करता था, अयान ने अब उस कैफ़े की half owenership भी खरीद ली है, और ऑफिस के बाद अब अयान अपना सारा समय उसी कैफे में बिताता है। कार्तिक की कमी को तो अब कैसे भी पूरा नहीं किया जा सकता, लेकिन कार्तिक के साथ बिताए अच्छे समय की यादों का सहारा ही अयान के लिए काफी है। अयान के दोनों दोस्तों के साथ साथ अब उसके मम्मी पापा का भी साथ उसके साथ है। कार्तिक के बारे में, और अपने एहसासों के बारे में, अयान अपने मम्मी पापा को अवगत करा चुका है। थोड़ा मुश्किल जरूर रहा, लेकिन अयान के मम्मी पापा ने अब उसे इस हाल में भी अपना लिया है। और इस सबमें अयान के दोस्तों की भी अहम भूमिका रही है।




     अयान को फिर से उसकी शायरियों ने सहारा दिया है। लेकिन इस बार अयान अकेला नहीं है। उसके अब ऑफिस में अच्छे दोस्त भी हैं, और कैफ़े का स्टाफ भी अब उसका परिवार बन गया है। और सबसे अहम, कार्तिक की यादें अब हमेशा उसके चेहरे पर एक मीठी मुस्कान बिखेरी रहती हैं।




"तेरी यादों का आलम,

कुछ इस तरह छाया है।

हर समय, हर घड़ी, हर पल,

घेरे मुझे तेरा साया है।

अब तक अकेलेपन के अंधेरे से भरा था मेरा जीवन,

अब इस वीराने में भी,

मेरे साथ तेरा अक्स नजर आया है।"


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Lots of love

Yuvraaj ❤️ 






Friday, July 10, 2020

"वो पहली नज़र" Part - I

Hello dear friends,
       I am again here with my new story "वो पहली नज़र" I know you all like this story as previous ones. Please give your valuable comments after reading it.




"जाने क्यों दिल आज उदास सा है,
मन मे छुपा कोई राज़ सा है,
तन्हा हम थे तन्हा ये सफ़र था,
मिल जाओ अब बस तुम,
यही बाक़ी एक ख़्वाब सा है।"



        अयान को शायरी लिखने का शौक काफी समय से था। अब तक उसने अपनी शायरियों से न जाने कितनी ही डायरियां भर डाली थीं। लेकिन आज तक किसी को भी अपनी एक भी शायरी ना ही पढ़ाई थी, ना ही सुनाई थी। यह शायरियां तो बस अयान के लिए उसका खाली समय काटने का जरिया थी। उसके अकेलेपन की साथी थी। इन शायरियों से ही वह अपने जीवन में जैसे चाहे वैसे रंग भर लिया करता था।


         अयान तिवारी, ग्वालियर शहर में अपने मम्मी पापा के साथ रहता था। अयान के मम्मी पापा दोनों ही ग्वालियर की जीवाजी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर थे। अयान बचपन से ही अपनी दादी के बहुत करीब था। मम्मी पापा के काम पर जाने के बाद दादी ही उसकी मां थी, दोस्त थी, पहली शिक्षिका थी। दादी ने बड़े लाड प्यार से अयान को पाल पोस कर बड़ा किया था। लेकिन दादी की बढ़ती उम्र और बिगड़ती तबीयत की वजह से अयान को उनका साथ ज्यादा लंबे समय तक ना मिल सका। दादी को संगीत से बड़ा लगाव था। वह घर के काम करते वक्त, अयान के साथ खेलते वक्त, कोई ना कोई धुन गुनगुनाया करती थी। और उन्हीं धुनों को शब्द देने के प्रयासों से, अयान को शायरी का शौक लग गया था। अब तो जब भी अयान को खाली समय मिलता था, वह अपनी डायरी और पेन लेकर कुछ सोच में डूब जाया करता था। कम उम्र से ही अकेले समय बिताने की वजह से अयान का स्वभाव ही बन गया था, उसे ज्यादा भीड़ भाड़ में रहना ज्यादा पसंद नहीं था। इसी स्वभाव के कारण पूरी schooling में उसके मात्र दो ही दोस्त थे। लेकिन उनकी दोस्ती भी काफी गहरी थी। लेकिन उन दोनों का साथ भी अयान को बारहवीं कक्षा के बाद छोड़ना पड़ा। वे दोनों IIT की तैयारी करने के लिए कोटा चले गए थे। उन्होंने अयान के मम्मी-पापा को अयान को भी साथ भेजने के लिए काफी मनाया, लेकिन अयान के मम्मी-पापा 1 साल बर्बाद करने के बिल्कुल पक्ष में नहीं थे।




         अयान का दाखिला ग्वालियर के आईटीएम कॉलेज में इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में करा दिया गया, और 4 सालों के बाद कॉलेज केंपस ड्राइव से अयान को गुड़गांव की एक एमएनसी, हनीवेल में जॉब भी मिल गई थी। उसका ऑफिस गुड़गांव के सुशांत lok-1 में था और वहीं पास के तारिका अपार्टमेंट में उसने एक फ्लैट भी किराए पर ले लिया था। यहां तक का यह सफर पढ़ने और सुनने में जितना सरल लग रहा है, इतना आसान अयान के लिए बिल्कुल नहीं था। हां यह सफर शायद इतना मुश्किल ना होता, अगर अयान इस सफर में अपने साथ कोई हमराही लेकर चलता। दादी का जाना, मम्मी पापा का काम में व्यस्त रहना, दोस्तों से अलग किए जाना, इस सब से अयान ने खुद को एक दीवार के पीछे कैद कर लिया था, यहां अगर उसके चेहरे पर कोई मुस्कुराहट ला सकता था, तो वो थी उसकी शायरियां। कॉलेज के 4 सालों और गुड़गांव में अब तक इस एक साल में अयान ने कभी किसी को अपने करीब आने की इजाजत ही नहीं दी थी। स्कूल के दोनों दोस्तों से अक्सर कर फोन पर बातें होती थी। उससे उम्मीद थी कि उनके कॉलेज खत्म होने के बाद शायद उन लोगों को भी दिल्ली नोएडा या गुरुग्राम में जॉब मिल जाएगी। लेकिन अब उस उम्मीद ने भी अपना दम तोड़ दिया था। अयान के एक दोस्त को बैंगलोर और दूसरे को पुणे में जॉब मिल गई थी। वैसे तो अयान अपनी सारी बातें अपने दोस्तों के साथ सांझा किया करता था, लेकिन फिर भी एक अकेलापन, उसके साथ किसी के ना होने का भाव, उसे हमेशा घेरे रहता था। और इस सब के लिए वो स्वयं ही जिम्मेदार था।




           वैसे तो अयान ने अपनी दिनचर्या कुछ इस तरह से बना ली थी, कि उसे किसी की जरूरत भी नहीं थी। सुबह 6:30 बजे उठने के बाद, 7:00 बजे तक फ्रेश होकर सोसाइटी के पार्क में जोगिंग, और थोड़ा व्यायाम। 8:30 तक नहा धोकर तैयार हो जाना, ब्रेकफास्ट में हमेशा की तरह दो अंडे का हाफ फ्राय और दो टोस्ट, एक कप गरमागरम कॉपी के साथ। 9:15 से 9:30 के बीच ऑफिस की कैब का इंतजार। 10:00 am से 7:00 pm तक ऑफिस। रात 8:00 बजे तक घर आकर फ्रेश होकर सोसाइटी के पार्क में थोड़ा टहलना और अपनी डायरी में कुछ शायरियों के साथ थोड़ा समय बिताना। रात 12:00 बजे तक खाना खा कर सो जाना। पूरा हफ्ता तो इसी दिनचर्या में कैसे निकल जाता था, अयान ज्यादा गौर नहीं करता था। लेकिन sunday!!! आज ऑफिस की छुट्टी होने के कारण अयान को कुछ और काम ढूंढने पड़ते थे, जिनमें वह खुद को व्यस्त रख सके। आज के दिन के लिए घर की साफ-सफाई, कपड़ों की धुलाई, सुपर मार्केट से हफ्ते भर का राशन, दूध, फल सब्जी लाना। ग्वालियर में घर पर फोन से बात करना, या कभी कभी वीडियो कॉल करना। फिर दोस्तों के साथ कॉन्फ्रेंसिंग कॉल। इन सभी में अपना पूरा दिन निकाल देना। सूरज ढलते ही अपने घर की बालकनी या फिर सोसायटी पार्क में अपनी डायरी के साथ समय बिताना, और अपनी शायरीयों में खो जाना।




"यूँ तो देखा है मैने, हज़ारों चेहरों में छुपे वो ख्वाब,


आईना बन खुद को खुद का अक्स वो दिखाते हैं,


चाहते तो हैं, चकोर बन छू लें चाँद की ऊंचाई को,


दिन के शोर में, उनके बिखरने की आवाज़ नही सुन पाते हैं।"




           एक दिन अपनी दिनचर्या से तंग आकर अयान में सोचा कि क्यों ना पुणे या बेंगलुरु में ही जॉब सर्च की जाए। इससे वह कम से कम अपने एक दोस्त के शहर में तो रह सकेगा। उसने पुणे और बेंगलुरु की तमाम एमएनसी में अपना रिज्यूम ऑनलाइन सेंड कर दिया।  कुछ एक दो कंपनियों से उसे रिटर्न मेल भी आया, लेकिन कहीं से भी उसे वह उत्तर नहीं मिला जिसकी तलाश अयान कर रहा था। इसके साथ ही कुछ कंपनियों ने उसके लिए एक रास्ता और खोला, कि वह वहां आकर इंटरव्यू दे सकता है। लेकिन अपनी जमी जमाई नौकरी को छोड़ कर, किसी अनजान शहर में फिर से नौकरी की तलाश में लगना, उसे यह ऑप्शन कुछ ठीक ना लगा। और फिर इसी अकेलेपन को अपनी किस्मत मान कर कुछ महीने ऐसे ही गुजर गए।



         Sunday की दिनचर्या का अनुसरण करते हुए, जब अयान अपने दोस्तों से फ़ोन पर बात कर रहा था, तो उसने अपने दोस्तों को उनकी कंपनी में वैकेंसी के बारे में पूछा। जिस पर अयान के एक दोस्त ने उसे सलाह दी, कि वह ऐसा सिर्फ हमारे साथ रहने के लिए ना करें। अगर कल को फिर से हमारा ट्रांसफर किसी दूसरे शहर में हो गया, या फिर हमारी कंपनी ने हमें विदेश भेज दिया, तो फिर अयान क्या करेगा। इसलिए सबसे अच्छा रास्ता है कि, अयान जहां है, वहीं लोगों के साथ घुले मिले, दोस्त बनाए, पार्टियों में जाए। अब अयान के दोस्त ने उसे यह सलाह दे तो दी थी, लेकिन वह भी कहीं ना कहीं यह जानता था, कि जो अयान इन 21 सालों में ऐसा नहीं कर पाया, अब ना जाने ऐसा करना उसके बस में होगा भी या नहीं।



         कुछ दिनों बाद रात के 12:00 बजे अयान का फोन बजा। अयान ने जब फोन उठाया, तब सामने से उसके दोस्तों की आवाज आई "happy birthday to you"। आज अयान का जन्मदिन था। अयान तो इस दिन को भूल ही गया था। उसके दोस्तों के उस फ़ोन कॉल ने उसे याद दिलाया कि आज अयान पूरे 22 साल का हो गया है। दादी के जाने के बाद से अयान ने अपना बर्थडे सेलिब्रेट ही नहीं किया था। उसी दिन सुबह ग्वालियर से भी उसके मम्मी पापा ने अयान को फोन पर बधाई दी। आज ऑफिस में भी HR की तरफ से अयान की डेस्क पर बर्थडे केक सजाया गया, और उसके डेस्क के आस पास के ही colleague केक कटवाने भी आ गए। सब ने तालियां बजाई और अयान ने केक काटा। सब अयान को विश करके, केक खा कर, अपने-अपने डेस्क पर जा ही रहे थे, कि अयान ने हिचकिचाते हुए बोला।


अयान :- "Office के बाद, treat के लिए चलें???"



         वहां उपस्थित सभी लोग थोड़े हैरान थे। क्योंकि यह पहली बार था कि अयान पार्टी की बात कर रहा था। आज तक अगर उसे कोई अपनी पार्टी में बुलाता था, तो अयान ना जाने का कोई ना कोई बहाना दे देता था। ऑफिस में भी सबसे अलग ही रहता था, लंच भी सबसे अलग ही करता था। पहले तो ऑफिस के कुछ colleagues ने अयान को अपने साथ लंच करने, कॉफी पर चलने, दारू पार्टी और भी न जाने क्या-क्या, के लिए साथ में आने का न्योता दिया। लेकिन हर बार मना कर देने की वजह से, अब कोई भी अयान को साथ आने के लिए पूछता भी नहीं था। और आज अयान की तरफ से पार्टी की बात सुनकर सभी चकित थे। लेकिन मुफ्त का खाना और ड्रिंक्स किसे नहीं पसंद, तो सभी शाम को पार्टी के लिए मान भी गए।



        ऑफिस के बाद सभी ने पास के ही क्रॉस पॉइंट मॉल के कैफे दिल्ली हाइट्स में जाना तय किया। सभी ने अपनी-अपनी पसंदीदा ड्रिंक्स और फूड ऑर्डर किया। अयान के लिए यह पहला मौका था, जब वह इस तरीके की पार्टी में मौजूद हो, और तो और वह पार्टी जिसके लिए उसने खुद ही लोगों को बुलाया हो। यह अयान के दोस्तों का ही आईडिया था, जिससे अयान जहां है वहीं कुछ दोस्त बना सके। वैसे तो अपनी दिनचर्या से हटकर कुछ नया करने में अयान को थोड़ी असहजता तो हो रही थी, लेकिन अब वह अपनी एक ही रफ्तार से चलती जिंदगी से तंग आ गया था। तो कुछ नया करना उसके लिए बेहद जरूरी भी हो गया था। और शायद यहां अयान को उसकी किस्मत ही लेकर आई थी। अयान ने खुद के लिए बस एक coke ही ऑर्डर की थी। जिसे लेकर आया एक वेटर, जिसके batch पर उसका नाम "कार्तिक" लिखा हुआ था।



          कार्तिक से अयान की नजरें कुछ यूं मिली, कि अयान वहां और लोगों की उपस्थिति ही भूल कर, बस उन आंखों में ही खो गया। अयान बेसुध कार्तिक को यूं देखे जा रहा था, मानो इतने सालों की घोर तपस्या का आज अयान को फल मिल गया हो। अयान की पलकें तब झपकी जब उसके कानों में कार्तिक की आवाज गूंजी।



कार्तिक :- "Sir!!!!! Sir!!!!! Sir!!!! आपका आर्डर.......!!!"



          अयान ने कार्तिक के हाथों में trey में रखी coke को उठा लिया, और वह कार्तिक को thanks कहना चाहता था, लेकिन मानो उसके होंठ सिल गए हो, और वह कुछ ना कह सका। कार्तिक भी अपना काम कर वहां से दूसरी टेबल पर चला गया। उस रात वहां मौजूद अयान के colleagues ने क्या बातें की, अयान से कुछ कहा भी या नहीं, अयान को कुछ याद ही नहीं रहा। याद रहा तो बस एक चेहरा, और उसकी आवाज। जो अभी भी अयान के कानों में गूंज रही थी। उस पूरी रात अयान के लिए सो पाना थोड़ा मुश्किल था। अयान बस अपनी करवटें बदलता रहा, और कार्तिक का चेहरा उसे अपनी बंद आंखों से भी साफ साफ दिखाई दे रहा था।



        अगली सुबह अयान अपनी सारी दिनचर्या को दरकिनार कर, जल्दी से नहा धोकर, तैयार होकर  सुबह 8:00 बजे ही, उसी कैफ़े पर पहुंच गया, जहां उसने कल उस इंसान को देखा था, जिसने उसकी दिल की धड़कनों को ही बढ़ा दिया था। लेकिन कैफ़े तक कि यह भागदौड़ आयान की व्यर्थ ही गई। कैफ़े के खुलने में अभी समय था। अयान वहीं पास पड़ी एक बेंच पर बैठकर, कैफ़े खुलने का इंतजार करने लगा। दरअसल उसे इंतजार तो सिर्फ उन आंखों का था, जिसने उसे रात भर सोने नहीं दिया था। वहीं बैठे बैठे थोड़ी देर बाद अयान ने अपनी डायरी निकाल ली, और कोई नई शायरी लिखने लग गया।




"आंखे ये मेरी तुमसे क्या कहती हैं तुम सुनो,


कानों में मेरे सरगम सी बजती है तुम कहो,


लबों पर जो ये बात आई है वो कहदो,


चुप हैं सारि बातें बस दिल मेरा ये कहे,


संग तेरे हवाओं में, फ़िज़ाओं में, उड़ता मैं रहूँ,


संग तेरे जीना है, मरना है, बस इतना ही कहूँ।"



      अपने ख्यालों में डूबे हुए, जब अयान की नजर उसकी घड़ी पर पड़ी, तो उसे पता चला कि 10:30 हो चुके हैं। और वह अपने ऑफिस के लिए लेट हो गया है। और उसने जब कैफे के दरवाजे की तरफ देखा, तो वह अभी भी बंद ही था। अयान ने और इंतजार करने से अच्छा ऑफिस जाना ही बेहतर समझा, और वह भागता हुआ ऑफिस पहुंच गया।  आज साल भर में यह पहली बार था, कि अयान 1 घंटे देरी से ऑफिस में आया हो, उसके colleagues ने उसका हाल चाल पूछा, और सब कल की पार्टी के लिए अयान को धन्यवाद भी दे रहे थे। और यह नया एहसास अयान को बेहद पसंद भी आ रहा था। और वह हंसते मुस्कुराते सभी से बात भी कर रहा था, और सभी का अभिवादन भी स्वीकार कर रहा था। अयान ने जैसे-तैसे घड़ी को बार-बार देख कर अपना आज का ऑफिस का समय निकाला, और 7 बजते ही भागते हुए, सीधे उसी कैफ़े कि, उसी टेबल पर जाकर बैठ गया। और जिसका इंतजार वह सुबह से ही कर रहा था, वही चेहरा मुस्कुराते हुए अयान की ओर बढ़ा और बोला।



कार्तिक :- "Good evening sir! Your order?



       लेकिन अयान कोई उत्तर तो तब देता, जब उसने कुछ सुना होता। वो तो बस कार्तिक के चेहरे को, उसकी आँखों को, उसकी वो प्यारी सी मुस्कुराहट को ही देखे जा रहा था।




कार्तिक :- "Sir!!!! Sir!!!! Your order????"


अयान :- (कार्तिक की आवाज़ सुन, हड़बड़ा कर) "Fried rice, munchurian, and a coke"


कार्तिक :- (मुस्कुराते हुए) "Ok Sir! Your order will take 10 to 15 minutes"




          इतना कहकर कार्तिक तो वहां से दूसरी टेबल पर चला गया, लेकिन अयान की नजरें कार्तिक का ही पीछा करती रही। जब कार्तिक, अयान की तरफ देखता, तो अयान अपने मोबाइल में, या फिर इधर उधर देखने लगता और फिर थोड़ी देर बाद, वह फिर से कार्तिक को मुस्कुराते हुए, दूसरे लोगों से बात करते देखने लगता। कुछ देर बाद कार्तिक ने अयान का आर्डर उसको दिया और अयान ने कार्तिक को थैंक्स बोला और अपना खाना खाने लगा। जो खाना 30 मिनट में खत्म किया जा सकता था, अयान ने उसे खत्म करने में पूरे 2 घंटे से ज्यादा का समय लिया। क्योंकि वह सिर्फ खाना खाने तो वहां नहीं आया था ना। जब कार्तिक अयान की टेबल साफ करने आया।


कार्तिक :- (झूठे बर्तनों को उठाते हुए) "Anything else sir???"


अयान :- ( कार्तिक की आँखों मे देखते हुए) " I want a coffee with you!!!"


कार्तिक :-  "What sir???"


अयान :- ( अपनी नज़रें चुराते हुए) "Coffee!!! I want a coffee!!"


कार्तिक :- "Ok sir! And sir please make sure, this is your last order, we are closing in 1 hour!"


अयान :- "Ok Fine !"


       

         अब कैफ़े की लाइट्स धीरे धीरे बन्द होने लगी थीं। कैफ़े का स्टाफ भी अपनी यूनिफार्म बदल चुका था। अयान भी अपनी कॉफ़ी  खत्म कर अपने मोबाइल में ध्यान देने का नाटक कर रहा था।



कार्तिक :- (अयान की टेबल की तरफ हाँथ बढ़ाते हुए) "Can i take that cup sir??"


अयान :- (मोबाइल एक तरफ रखते हुए) "yes! Sure!!"


कार्तिक :- (मुस्कुरा कर कप उठाते हुए) "Have a good night sir!"


अयान :- (कार्तिक को देखकर मुस्कुराते हुए) "Thaks! You too!!"




         आज उस कैफ़े से निकलने वाला सबसे आखरी गेस्ट अयान ही था। अयान वहां से टहलते हुए, मुस्कुराते हुए, गुनगुनाते हुए, अपने फ्लैट की ओर चल दिया। आज से पहले अयान को गुड़गांव में इतना खुश कभी नहीं देखा था। अयान को देखकर कोई नहीं कह सकता था, कि अयान कुछ महीनों पहले, अकेलेपन के कारण, यह शहर छोड़ कर जाना चाहता होगा। आज तो अयान को देखकर लग रहा था, मानो उसे इस शहर से प्यार हो, और वह हमेशा के लिए यही बस जाना चाहता हो।




        आज अयान रात 12:00 बजे अपने घर वापस आया था, और आते ही अपने बैग से डायरी निकालकर कार्तिक को याद करके कुछ शायरी लिखने लगा था।



"कितनी मदहोश हैं ये आँखे, इनमे डूबने को दिल करता है,


कितना मासूम है ये चेहरा, इसे चूमने को दिल करता है,


अब यूँ दूर रहकर, और ना तड़पाओ मुझे,


अब तो बस तुम्हे अपना बनाने को दिल करता है।"




         अब से अयान की यही नई दिनचर्या हो गई थी। ऑफिस के बाद का सारा समय अब अयान का उसी कैफे में बीतने लगा था। और अगर कोई दूसरा वेटर अयान के पास आता था, तो वह उसे कार्तिक को ही आर्डर लेने के लिए बुला देने को कहता था। कैफे के मैनेजर को तो इस बात से कोई प्रॉब्लम नहीं थी, लेकिन अब उस कैफे के स्टाफ में कार्तिक और इस नए गेस्ट को लेकर कानाफूसी जरूर शुरू हो गई थी। Sunday के दिनों में तो अयान अपना सारा काम निपटा कर दोपहर से ही कैफे में जाकर बैठ जाया करता था, और रात को कैफ़े बंद होने पर ही वहां से वापस आया करता था। लेकिन ऐसा सिर्फ 12 दिनों तक ही चला। कैफे में अब अयान को कार्तिक का गेस्ट कहकर, कार्तिक को खुलेआम चिढ़ाया जाने लगा था। और कार्तिक को यह मजाक बिल्कुल पसंद नहीं आ रहा था। तो कार्तिक ने तय किया कि आज जब वह गेस्ट आएगा, तो कार्तिक उससे बात करेगा। और अयान के कैफे में आते ही बाकी का स्टाफ कार्तिक की तरफ देख कर मुस्कुराने लगा, उसे आंख मार कर उसे चिढ़ाने लगा। कार्तिक ने जैसा सोचा था वैसा ही किया।




अयान :- (कार्तिक को अपनी ओर आता देख, मुस्कुरा कर) "Hello Kartik! How are you??"


कार्तिक :- (अयान की तरफ थोड़े रूखे भाव मे देखते हुए) "I am not good!!! Can we talk for some time??"


अयान :- (कार्तिक को असमंजस में देखते हुए) "Yeah! Sure!"


कार्तिक :- (कैफ़े के बाहर चलने का इशारा करते हुए) "Follow me"



       कार्तिक कैफे के बाहर आ कर, कैफ़े से थोड़ी दूर आ जाता है, और अयान भी उसके पीछे-पीछे वैसा ही करता है


कार्तिक :- (अयान को अब थोड़े गुस्से से देखते हुए) "क्या problem है??"


अयान :- (मुस्कुरा कर कार्तिक को देखते हुए) "कैसी problem??"


कार्तिक :- "Look! Nobody is kid here! Why are you doing this??"


अयान :- (फिरसे मुस्कुरा कर) "What i did??"


कार्तिक :- (चिढ़ते हुए) "Dont behave like a stocker dude!!!"


अयान :- (हँसते हुए) "मैं कहाँ किसी को stock कर रहा हूँ, मैं तो बस यहाँ खाने पीने आता हूँ।"


कार्तिक :- (झुंझलाते हुए) "ज्यादा न oversmart बनने की जरूरत नहीं है, अगर सिर्फ खाने पीने आते तो बात यहाँ तक आती ही नहीं। देखो यार, मैं इस job में कोई पन्गा चाहता ही नही हूँ। मैं यहाँ बिल्कुल सीधे साधे तरीके से, बिना किसी की नज़रों में आये, शांति से काम करना चाहता हूँ बस। तो तुम इस कैफ़े से ओर मुझसे दूर ही रहो। समझे।"



        इतना कहकर कार्तिक वहां से गुस्से में वापस कैफे में चला जाता है। और अयान बस वहां खड़ा मुस्कुराता हुआ, कार्तिक की बातों के बारे में सोचता हुआ, थोड़ी देर तो वहीं खड़ा रहता है, और फिर मुस्कुरा कर वापस अपने फ्लैट पर लौट आता है। वापस आकर अयान बस कार्तिक के बारे में ही सोचता रहता है, और मुस्कुराता रहता है। अयान ने आज कार्तिक को इस रूप में पहली बार देखा था, और उसे कार्तिक का गुस्सा करना बहुत पसंद आ गया था। वह कार्तिक के बारे में सोच ही रहा होता है, कि उसके फोन की घंटी बजती है। यह फोन उसके दोस्तों का कॉन्फ्रेंस कॉल होता है। अयान अपने दोस्तों से आज इस समय कॉल करने का कारण पूछता है। तो उसका एक दोस्त कहता है, कि बस उसका उन दोनों से बात करने का मन कर रहा था। उन तीनों में थोड़ी देर इधर-उधर की बातें भी होती हैं। लेकिन आज के इस कॉल में अयान के दोनों दोस्तों को ही अयान के बात करने के अंदाज में कुछ बदलाव लगने लगता है। और वे दोनों अयान पर जोर देने लगते हैं, उन्हें बताने के लिए, कि अयान आज इतना खुशमिजाज क्यों है। अयान भी बिना शर्माए उन दोनों को बता देता है, कि शायद उसे प्यार हो गया है। उसे कोई बहुत पसंद आ गया है, वह अब हमेशा उसके आसपास ही रहना चाहता है, अब बहुत खुश रहने लगा है, ऑफिस में भी लोगों से घुलने मिलने लगा है, और अब उसे यह शहर भी पसंद आने लगा है। अयान के दोनों दोस्त यह बात सुनकर बेहद खुश हो जाते हैं। और अयान से उसका नाम पूछते हैं। अयान बिना हिचके कार्तिक का नाम उन्हें बता देता है। जिस पर आयान का एक दोस्त बोलता है, कि उसने सही से नहीं सुना क्या अयान ने "कार्तिका" कहा?? जिस पर अयान उन्हें बताता है, कि कार्तिक एक लड़का है। इस पर अयान के दोनों दोस्त कुछ देर के लिए शांत हो जाते हैं। फिर थोड़ी देर बाद अयान का एक दोस्त पूछता है "अयान तू गे है क्या??" इस पर अयान उन्हें जवाब देता है, कि उसे नहीं पता। लेकिन उसने जब कार्तिक को पहली बार देखा था, वह सब कुछ भूल गया था। वहां सिर्फ कार्तिक के अलावा उसे कोई और नजर नहीं आ रहा था। बस वो पहली नजर में ही वह कार्तिक को हमेशा के लिए अपना बना लेना चाहता था। और क्या यह आकर्षण है, यह जानने के लिए उसने बहुत समय कार्तिक के आसपास गुजारा। लेकिन इससे कार्तिक के लिए उसका खिंचाव बढ़ता ही गया। तो अगर यह प्यार है, तो हाँ अयान को कार्तिक से प्यार है। और अगर इसे गे होना कहते हैं, तो हाँ अयान गे है।


        अयान की बातें सुनकर उसके दोनों दोस्त शांत हो चुके थे। थोड़ी देर के सन्नाटे के बाद अयान ने अपने दोस्तों से पूछा कि "क्या इस बात से उनकी दोस्ती पर कोई फर्क पड़ेगा??" जिसका उत्तर अयान के एक दोस्त ने दिया कि "नहीं यार ऐसा कुछ भी नहीं होगा, वह तीनों हमेशा पक्के दोस्त रहेंगे।" और अयान के दूसरे दोस्त ने भी इस बात पर हामी भरी। थोड़ी देर और उन तीनों में कार्तिक के बारे में बातें होती रहीं। फिर वे तीनों एक-दूसरे को गुड नाइट बोलकर सोने चले गए।




        दो -  एक दिन तो अयान ने यही सोच में निकाल दिए, कि वह कार्तिक के पास कैसे जाए, उससे कैसे बात करें। उसने 10 12 दिन में जो भी प्रयास किए थे, जो कि उसके लिए सबसे ज्यादा कठिन थे, उस कैफे के मैनेजर, वहां के स्टाफ से थोड़ी बहुत दोस्ती करना, कार्तिक की आखरी बात से यह साफ था, कि अयान के वे सभी प्रयास व्यर्थ हो चुके थे। फिर 1 दिन कार्तिक के पास जाकर अपने मन की बात उसे कहने के लिए अयान ने बहुत हिम्मत जुटाई, और ऑफिस के बाद कैफे से थोड़ी दूरी पर, कार्तिक के बाहर आने का इंतजार करने लगा। उसने कैफे के बाहर ही कार्तिक से बात करना सही समझा। क्योंकि अगर वह कैफ़े के अंदर जाकर, सबके सामने कार्तिक को बात करने के लिए अकेले में चलने को कहता, तो हो सकता था कि कार्तिक बुरा मान जाता, और पहले से भी ज्यादा गुस्सा करता।



         करीब रात 11:30 पर कार्तिक और बाकी का स्टाफ कैफे से बाहर आ गए। और कुछ देर आपस में बात करके, सभी अपने अपने घरों की ओर चले गए। अयान भी कार्तिक के पीछे पीछे बढ़ने लगा। कार्तिक थोड़ी दूरी पर जाकर, एक बस स्टॉप पर खड़ा शायद किसी का इंतजार करने लगा। अयान उसके पास जाता, इससे पहले वहां एक काले रंग की गाड़ी आई, जिसमें 2 लड़के बैठे हुए थे। कार्तिक ने उनसे कुछ बात की, और उनकी गाड़ी में बैठ गया। और वह गाड़ी दिल्ली की तरफ चली गई। अयान वहां खड़ा बस उस गाड़ी को जाते देखता रहा, और वह सोचने लगा कि जहां तक उसे कैफे के स्टाफ से पता चला था, कि कार्तिक सुशांत lok-1 के सी ब्लॉक में कहीं किराए के कमरे में अकेला रहता है, फिर यह दिल्ली की तरफ क्यों जा रहा है। वह कई सवाल लिए वहां से अपने फ्लैट पर आ गया। और रात भर उस गाड़ी और उसमें बैठे उन लड़कों के बारे में ही सोचता रहा।



       अगले दिन अयान ने सोच लिया था, कि आज तो वह हर हाल में कार्तिक से बात करेगा। और रात को वह फिर इंतजार करने लगा, कैफे के बाहर कार्तिक के आने का। लेकिन आज अयान थोड़ी सी तैयारी के साथ आया था, अपने साथ कुछ फूलों का गुलदस्ता भी लाया था। कार्तिक के बाहर आते ही अयान उसका पीछा करने लगा। और कार्तिक के कल वाले बस स्टॉप पर पहुंचने से पहले ही, उसने कार्तिक को आवाज लगाकर रोक लिया।




कार्तिक :- (अयान को अपनी ओर आता देख) "यहां क्या कर रहे हो तुम??"


अयान :- (कार्तिक की तरफ गुलदस्ता बढ़ाते हुए) "तुम्हारा इंतेज़ार कर रहा था। तुमसे माँफी मांगनी थी।"


कार्तिक :- (अपने हांथो से गुलदस्ता अयान की तरफ धकेलते हुए) "इसकी कोई जरूरत नही, और ना ही मुझसे माँफी मांगने की कोई जरूरत है, बस मुझसे दूर रहो।"


अयान :- "नहीं रह सकता। I Like You"


कार्तिक :- (अयान की बात सुन, हंसकर) " क्या??"


अयान :- (कार्तिक को हंसता देख, मुस्कुरा कर) " सच मे। जबसे तुम्हे पहली बार देखा है, मैं बहुत attracted feel कर रहा हूँ। और इन कुछ दिनों में तो शायद मैं तुमसे प्यार भी करने लगा हुँ।"


कार्तिक :- (और जोर से हँसते हुए) "प्यार??? तुम मुझे जानते भी नही हो। एक काम करो, घर जाओ, पेंट उतारो, और मेरे बारे में सोच कर अच्छे से हिलाओ, 2 मिनट में सारा प्यार बाहर आ जायेगा, और तुम हल्का महसूस करोगे।"


       इतना कहकर हंसते हुए कार्तिक वहां से जाने लगता है, और हंसते हुए बड़बड़ा के जाता है, "प्यार करता हूं"। अयान कार्तिक को रोकने के लिए फिर से उसके पीछे जाता है, और उसी बस स्टॉप पर कार्तिक आज किसी दूसरी गाड़ी में बैठकर जा रहा होता है। कुछ देर अयान वहीं खड़ा रहता है, और थोड़ी देर बाद मन मारकर अपने फ्लैट पर वापस आ जाता है।




    क्या अयान कार्तिक को अपने दिल का हाल बता पायेगा? क्या कार्तिक अयान के दिल की बात समझ पायेगा? ऐसे कई सवालों को जानने के लिए बने रहे अयान और कार्तिक के साथ। Next part will be uploaded soon. Hope you like my this story as previous ones. Plz give your valuable comments here or wherever you read this story.





Lots of love

Yuvraaj ❤️


   























Friday, June 5, 2020

कहानी -Final parr

     Hello friends,
                     Please read first part of this story than you can easily be connected with this second part.


    रात तक पुनीत का कोई message ना पाकर अमोल से रहा नही गया, और उसने पुनीत को message किआ।


Rahul :-
"Hey my sunshine"
"Where r u?"
"I'm still waiting for ur msg 🤞🤞😍"


      फिर जब देर रात तक पुनीत का कोई भी message नही आया, तो अमोल अपना मन मार कर सोने चला गया। लेकिन पुनीत को एक message करने के बाद।


Rahul :-
"Hey my love ❤️"
"Mujhe lagta he tum so gaye"
"Chalo koi baat nhi"
"Ham kal baat karenge"
"Good night meri jaan 😍"
"I love you ❤️😍"


       अमोल के लिए ये सब कोई नई बात नही थी, वो अक्सर कर सभी से इसी अंदाज में बात करता था। ये उसके बात करने का, और सामने वाले लड़के को पूरी तरह अपने जाल में फ़साने का पुराना पैंतरा था। लेकिन पुनीत के साथ कुछ बातें नई थी, एक तो पुनीत के बारे में बिना जाने कि वह GAY है या STRAIGHT अमोल ने उसे messages किए थे। और पुनीत के बारे में अभी तक उसने प्रज्वल से एक भी बात share नहीं की थी। वरना अमोल किसी भी लड़के से बात करने से पहले प्रज्वल की सलाह जरूर लेता था। लेकिन पुनीत के बारे में अभी तक प्रज्वल अनजान था। और इसका कारण था अनमोल की feelings। अमोल पुनीत के लिए बाकी लड़कों से ज्यादा आकर्षित था, और उसने पहले कभी इतना ज्यादा किसी लड़के के बारे में सोचा नहीं था। इन 10 दिनों में उसने केतकी से भी एक बार भी फोन पर बात नहीं की थी। और ना ही केतकी के किसी भी messages का reply दिया था। लेकिन वह पुनीत के लिए इतना क्यों सोच रहा है, यह सवाल उसने अभी तक खुद से नहीं किया था।



        दूसरे दिन पुनीत ने, सुबह उठ कर सबसे पहले अपने mobile का net on किआ, और राहुल के messages का reply दिया।


Puneet :-
"Sorry rahul"
"Kal study me kuch jyada hi busy ho gaya tha to online nhi aa paya"


     
           ये पहली बार था जब किसी लड़के ने पुनीत को i love you बोला हो। राहुल का वो message पड़ कर पुनीत का चेहरा एक दम लाल हो चुका था, ओर हल्की सी मुस्कान भी छा गयी थी। इस वक़्त वो राहुल के ही ख्यालो में था, की उसके mobile पर messenger की notification bell बाजी। उसने देखा तो ये राहुल का ही message था।


 
Rahul :-
"Good morning love 😍"
"It's ok, no need to say sorry to me ❤️"


Puneet :-
"Very good morning"
"Hey"
"Kya me tumhari pic dekh sakta hu???"


Rahul :-
"Pic"


Puneet :-
"Agar nhi dena chahte to koi problem nhi"
"Bs me dekhna chahta tha ki tum kaise dikhte ho"


Rahul :-
"Bs imagine karlo"
"Wese me kuch khas nhi dikhta"


Puneet :-
"Actually, jab me tumhare baare me sochta hu"
"Us waqt me tumhara chehra imagine karna chahta hu"
"Lekin mujhe pata hi nhi he ki tum kaise dikhte ho"
"Bs isiliye"
"Agar pic nhi send karoge to mujhe bilkul bhi bura nhi lagega"



       अब पुनीत की इस बात को अमोल कैसे टाल सकता था। पहले तो अमोल ने सोचा कि कोई fake pic या फिर प्रज्वल की कोई pic send कर देना चाहिए। लेकिन फिर उसे लगा, की अगर पुनीत उससे मिलने के लिए मान गया, और फिर इस fake pic की वजह से गड़बड़ हुई, तो अच्छा नही होगा। और फिर अमोल ने पुनीत को अपनी real pic ही send कर दी।


Rahul :-
"Dekh lo"
"Me janta hu ki me jyada handsome nhi hu"
"Agar me tumhe pasand nhi to saaf saaf bata dena"


Puneet :-
"Nhi esa nhi he"
"Tum acche dikhte ho"
"Nice pic"


Rahul :-
"Thank you"


Puneet :-
"Chalo baad me baat karta hu, college jana he"
"Tum kya karte ho???"


Rahul :-
"Ok, mujhe bhi kahi jana he"
"Baad me baat karenge"


Puneet :-
"Ok"
"Bye"
"Tc"


Rahul :-
"Bye my love 😘"



       अमोल को कोई काम तो नहीं था, लेकिन वह अपनी personal information अभी पुनीत के साथ discuss नहीं करना चाहता था। इसलिए कुछ देर के लिए offline आना ही उसे सही लगा। वैसे तो वह पुनीत की फोटो देखकर बहुत आकर्षित महसूस करता था। लेकिन वह उसके दिल की आवाज थी, और दिमाग में तो बस हमेशा की तरह पुनीत को relationship में लाना और फिर physical होना ही था। और यह सब प्यारी प्यारी बातें तो अमोल को हर किसी से करने की आदत थी। रही बात प्रज्वल को पुनीत के बारे में अभी तक कुछ ना बताने की, तो अमोल ऐसा सिर्फ इसलिए कर रहा था, क्योंकि पुनीत कोई पुणे का आम GAY लड़का नहीं था। पुनीत का कोई दूसरा fake account भी नहीं था। और पुनीत अभी तक पुणे के किसी दूसरे GAY लड़के से भी नहीं मिला था। तो अमोल, प्रज्वल को पुनीत को एक ट्रॉफी की तरह दिखाना चाहता था। वह प्रज्वल को सब बताएगा लेकिन जब पुनीत उसके साथ relationship में आने को तैयार हो जाएगा तब। और यह सब अमोल ने उन 7 दिनों की अपनी research के दौरान सोचा था, जब पुनीत का कोई भी reply ना आने पर उसने facebook, instagram और सभी Gay Dating Apps पर की थी। और इस सारी जानकारी से उसे विश्वास हो गया था, कि पुनीत अभी तक अपने closet में ही है।



      अब यूं तो प्रज्वल, अमोल का बहुत अच्छा दोस्त था। लेकिन प्रज्वल अमोल से दिखने में अच्छा दिखता था। अमोल और प्रज्वल पुणे की किसी भी GAY party या PUB में साथ जाते थे, तो सभी लड़के प्रज्वल को ही देखते थे, उससे ही बात करते थे। यहां तक कि अमोल के कई relationships भी प्रज्वल ने ही बनवाए थे। अमोल को कहीं ना कहीं यह बात खटकती थी। जबकि प्रज्वल अमोल को अपना best friend मानता था। उसे अमोल कि इस ईर्ष्या की भनक भी नहीं थी।



       वहीं दूसरी ओर पुनीत जो अभी तक राहुल के बारे में सोचता रहता था, और अब तो उसके पास अपनी इस सोच को देने के लिए एक चेहरा भी था। पहले प्यार के कहानी किस्से सुन रखे थे पुनीत ने, और अब राहुल की उस फोटो में ही अपनी कहानी ढूंढने की कोशिश करने लगा था। यह पुनीत के साथ पहली बार हो रहा था, कि उसका ध्यान पढ़ाई से ज्यादा अपने मोबाइल में था। और ऐसा करते वक्त उसके मन में एक ही सवाल था, "क्या यही प्यार है?"



        College से घर आने के बाद, पुनीत, राहुल की facebook profile check करने लगा। और वहां से उसे राहुल के बारे में कुछ भी जानकारी नहीं मिली। सिवाय उसके date of birth के। अब वह भी real थी, या नहीं पुनीत sure नहीं था। और इसी को लेकर वह राहुल से chat करना चाहता था। उसके बारे में और जानना चाहता था।


Puneet :-
"Hey"
"Free ho gaye???"


       अमोल का तो हर time messenger on ही रहता था। लेकिन अभी वह केतकी से फोन पर बात कर रहा था, और बेमन से उसे इतने दिन बात ना करने के लिए कुछ कहानियां बनाकर मना रहा था। थोड़ी देर बाद उसने पुनीत का message देखा और chat शुरू की।


Rahul :-
"Sorry my love ❤️"
"Busy tha thoda"
"Or batao, hws ur day?"


Puneet :-
"As usual"
"But aaj kuch khas hua 😊"


Rahul :-
"Kya 🤔"


Puneet :-
"Aaj mene tumhari photo dekhi 😊"


Rahul :-
"Accha! Or kaisi lagi??"


Puneet :-
"Bahut acchi 👌"


Rahul :-
"Thank you my love 😘"


Puneet :-
"Hey"
"Kya me kuch poochhu???"


Rahul :-
"Haan meri jaan ❤️"


Puneet :-
"Mene tumhari profile dekhi"
"Usme mujhe kuch bhi nhi dikha"
"Siway kuch videos or kuch wese wale pics ke"


Rahul :-
"Wo sab bhi to jaroori he meri jaan 😘"
"Kya tumhe pasand nhi?"


Puneet :-
"Haan pasand he lekin ese openly to bilkul nhi"
"Khair, mujhe ye poochna tha, ki tumne apne baare me kuch bataya hi nhi"
"Kaha rehte ho"
"Kya karte ho"
"Kya pasand he tumhari"



Rahul :-
"Bs itni si baat"
"Me tumhare dil me rehta hu ❤️"
"Tumse pyar karta hu 😍"
"Tumhe pasand karta hu 😚"
"Or ek baat batau, me Top hu 😘"


Puneet :-
"Mene ye sab nhi poocha tha!!!"
"Mere kehne ka mtlb tha"
"Tumhari age kya he"
"Study karte ho ya job"
"Pune me kaha rehte ho"
"Or acchi baat he ki tum Top ho, lekin ye janne ki mujhe koi jaroort nhi 😂"


Rahul :-
"Ok ek kaam karte he"
"Ye sari baate ham milke karte he"
"What u say?"


Puneet :-
"Pehle jaan to lu tumhe acche se"
"Fir mil bhi lunga"


Rahul :-
"Bharosa nhi mujh pr?"
"Ghabrao nhi, me tumhara rape nhi karunga"



Puneet :-
"Very funny!!"
"Baat bharose ki nhi"
"Mujhe kuch bhi nhi pata tumhare baare me"
"Kuch to batao"


Rahul :-
"Accha ek shart pe"
"Me tumhe apni real id se friend request send karta hu"
"Waha se tumhe mere baare me sab pata chal jayega"
"Lekin me esa tb hi karunga"
"Jab tum kal mujhse milo 😍😍"


Puneet :-
"Ok done!"


Rahul :-
"Cool!"
"Kal sham 5 bje"
"Tea villa"


Puneet :-
"Done 👍"



       अमोल ने अपनी real id से पुनीत को friend request भेज कर message किआ।


Amol :-
"Hi"
"It's me meri jaan 😍😍😘"


Puneet :-
"Ok Mr. Rahul means Mr. Amol 👍"


Amol :-
"To kal sham pakka?"


Puneet :-
"Haan bilkul"
"Ab deal ki he to nibhani to padegi"


Amol :-
"Ok my love 😘"
"Wese tumne ek baat ka jawab nhi dia"


Puneet :-
"Kya???"


Rahul :-
"T / B / V ??"


Puneet :-
"Ye kya he???"


Amol :-
"Are mtlb tum kya ho?"
"Top, bottom ya vers??"


Puneet :-
"Top"


Amol :-
"😳😳😳"
"Mazak kar rahe ho na??"


Puneet :-
" Q mazak tum hi kar sakte ho kya 😂"
"Or wese mujhe nhi pata is baare me"


Amol :-
"Nahi pata matlb?? 🤔🤔"


Puneet :-
"Nhi pata mtlb nhi pata"
"Accha chalo ab bye"
"Mujhe jana he"


Amol :-
"Accha chalo kal milke pata karte he is baare me 😘😘"
"Bye my love 😍"
"Kal ka intezar rahega mujhe 😚😚"


Puneet :-
"Bye"




         
         अमोल के real account से जो basic information पुनीत ढूंढ रहा था, वह उसे मिल गई थी। लेकिन अमोल की profile में उसकी कई लड़कियों के साथ pictures उसका relationship status और भी कई ऐसे सवाल थे, जो पुनीत के दिमाग में उठ रहे थे। लेकिन इससे भी बड़ी उलझन थी, कल अमोल से होने वाली मुलाकात। पुनीत excited भी था और nervous भी। अमोल से पहली बार मिलने के एहसास मात्र से ही पुनीत के अंतर्मन में कई उमंगों का प्रभाव होने लगा था। अब तो कल सुबह का इंतजार इतनी बेसब्री से होने लगा था, कि मानो इससे अधिक महत्वपूर्ण कुछ है ही नहीं पुनीत के जीवन में।



        उधर अमोल भी excited था, कि कल वह पुनीत से पहली बार मिलेगा। वह लड़का जिसकी केवल एक फोटो ने अमोल को सब कुछ भुलाने को मजबूर कर दिया। वह लड़का जिस से ज्यादा attractive शायद ही पुणे शहर में कोई और हो। और सबसे ज्यादा important बात यह थी कि इस लड़के से पहली मुलाकात अमोल ने खुद अकेले ही fix की थी, बिना प्रज्वल की मदद के।



       और वह पल आ ही गया जिसका इंतजार दोनों को ही बेसब्री से था। शाम को 5:00 बजते ही अमोल Tea villa cafe के दरवाजे पर टकटकी लगाए पुनीत के आने का इंतजार करने लगा। अमोल इतना बेसब्र था, कि वह 3:00 बजे से ही वहां आकर बैठ गया था। और अब तक 3 चाय और 2 कॉफि भी पी चुका था। और cafe के दरवाजे की आहट पर जब अमोल ने उस तरफ देखा, तो अमोल की आंखों की चमक से यह अंदाज़ा लगाया जा सकता था, कि मानो वह पुनीत को नहीं बल्कि कामदेव को स्वयं देख रहा हो। पुनीत का cafe के दरवाजे से अमोल की टेबल तक का सफर, अमोल को यह विश्वास दिलाना चाहता था, कि यह वह आखिरी लड़का है जिसे अमोल हर पल देखना चाहेगा। वह चेहरा, वह आंखें, वह मुस्कुराहट, यह सब केवल अमोल की आंखें नहीं देख रही थी, बल्कि अमोल के शरीर का रोम रोम इस अप्रतिम पल का साक्षी था।  पुनीत को अपने सामने देखकर अमोल मंत्रमुग्ध हो चुका था, और उसका उसकी किसी भी इंद्री पर कोई काबू नहीं था। पुनीत ने पास आकर अपना हाथ उसकी तरफ बढ़ाया।


पुनीत :- (अमोल को खुद को घूरते हुए देख कर, मुस्कुरा कर) "Hello!! क्या हुआ??  मैं इतना बुरा लग रहा हूँ क्या??"

अमोल :- (पुनीत से नज़रें हटाते हुए) "hey! नहीं! मेने बस आज से पहले इतना खूबसूरत किसी को देखा ही नहीं"

पुनीत :- (अमोल की बात सुनकर हंसते हुए) "वैसे एक बात तो notice की है मेने, flirt बहुत करते हो तुम"

अमोल :- (मुस्कुराकर पुनीत को देखते हुए) "तुम्हे देख कर खुद को रोक नही पता, इसलिए"

पुनीत :- (हंसते हुए) "अच्छा ये बताओ, ज्यादा wait तो नही करवाया?"

अमोल :- "नहीं बस मैं भी अभी ही आया हूँ"

पुनीत :- "Okkk ! So our first date !"

अमोल :- "हाँ ! हमारी first date ! सो क्या order करू तुम्हारे लिए ?"


     
       दोनों ने आज अच्छा वक्त साथ बिताया, और एक दूसरे के बारे में भी दोनों को काफ़ी कुछ जानने को मिला। पुनीत के पास अमोल के लिए कई सारे सवाल भी थे, जो उसने अमोल से पूछे। और अमोल की तरफ से उसे कई सही, और कुछ झूठे जवाब भी मिले। अमोल ने पुनीत के साथ कई selfies भी click की। और दोनों ने अपनी first date को अच्छे से enjoy किआ।


     रात को दोनों में कुछ देर chat भी हुई।


Puneet :-
"Hey"
"Aaj bohot accha laga tumse milkr"


Amol :-
"Haan mujhe bhi"
"Kya hua??"
"Aaj is time online?? 🤔🤔"
"Study nhi karni??"


Puneet :-
"Man nhi lag raha tha aaj"
"Bs hamari first date ke baare me hi soch raha tha 😊"


Amol :-
"Accha 😍😍"
"Kya soch rahe the 😚😚"


Puneet :-
"Ye mera first time tha"
"Aaj me pehli baar kisi ladke se mila"
"Mene socha to nhi tha ki esa kabhi kuch hoga"
"Lekin tumse milke mujhe kafi accha laga"
"Ek baat bolu??"


Amol :-
"Haan"
"Bilkul bolo meri jaan 😘😘"


Puneet :-
"Thank you mujhse milne ke liye"
"Mujhe friend request bhejne ke liye"
"Mujhse chat karne ke liye"
"😊"


Amol :-
"Ab me ek baat bolu?"


Puneet :-
"Haan bolo"


Amol :-
" I Love You Jaan 😘😚😍"


Puneet :-
"I love u too 😊"


Amol :-
"Sach me ??"


Puneet :-
"Haan"
"I think it's happening"
"I love u Mr. Amol 😚"



       यह पुनीत के लिए केवल प्यार का इजहार नहीं था, इतने सालों में उसने खुद को जिन दरवाजों के पीछे छिपा कर रखा था, आज अमोल के साथ और उसके प्यार ने, पुनीत को भी आजाद कर दिया था। और वहीं अमोल के लिए यह सब कुछ उसके लिए कुछ सीढ़ियां थी, जो उसने चढ़ ली थी। और अब उसकी मंजिल कुछ ज्यादा दूर नहीं थी। अमोल ने सबसे पहले पुनीत की chat के screeshots लिए और आज शाम की selfies इसके साथ ही सारे screenshots प्रज्वल को भेज दिए।



      प्रज्वल भी यह सब देखकर थोड़ा सा हैरान था, कि इतना सुंदर लड़का अमोल के जाल में कैसे फंस गया। लेकिन उसने अमोल को बस एक ही message return किया।



Rohit :-
"Congrats buddy 👌👍"


      अब पुनीत और अमोल की मुलाकातों का सिलसिला भी आम हो चला था। और पुनीत के मन में अमोल के लिए प्यार भी बढ़ता जा रहा था। और ऐसा नहीं था कि अमोल, पुनीत के लिए कुछ महसूस ही नहीं कर रहा था, लेकिन पुनीत के प्रति अपनी भावनाओं से ज्यादा, वो अमोल के लिए एक ट्रॉफी ज्यादा था। वह पुनीत से हर मुलाकात की फोटो प्रज्वल को send किया करता था। और रात को अपनी और पुनीत की chat की screenshots भी प्रज्वल को दिखाया करता था।



       एक दिन अमोल ने पुनीत को अपने घर पर invite किया। पुनीत समझ तो रहा था कि इस invitation का क्या मतलब है। लेकिन अब उसे भी अपने प्यार को आगे बढ़ाने में कोई एतराज नहीं था। दोनों मिले कई सारी ईधर उधर की बातें भी हुई। और अमोल ने जिस अंतिम मकसद के लिए पुनीत को friend request भेजी थी, जिस उम्मीद में वह पुनीत से घंटों chatting किया करता था, आज अमोल ने पुनीत के लिए अपने अंतर्मन की सभी feelings को बस एक तरफ ही मोड़ दिया था। और पुनीत ने भी प्यार के अहसास में बंध कर खुद को अमोल को सौंप दिया था। पुनीत के लिए यह सब उसके रिश्ते की बढ़ती मजबूती का इशारा था। वही अमोल जो पुनीत से चाहता था आज उसे मिल चुका था।



         रात को जब पुनीत अपने बिस्तर पर सोने की कोशिश कर रहा था, तो उसके जहन में अमोल के साथ बिताए आज के हसीन पलों की यादें ही चल रही थी। और इन्हीं सब के बीच उसके चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कुराहट आ गई जब उसके फोन पर अमोल का message आया।


Amol :-
"Hey"
"So gaye kya??"



Puneet :-
"Nhi neend nhi aa rahi thi"
"Tumhare baare me hi soch raha tha 😊"


Amol :-
"Accha"
"Or wo kya meri jaan 😚"


Puneet :-
"Bs aaj ke baare me"
"Ab mujhe sharm aa rahi he 😘"


Amol :-
"Are jaanu"
"Isme sharmane wali kya baat he"
"Ye sab to normal si baat he 😘"
"Itna mt socho is baare me"
"Haan sochna he to ye socho"
"Or kya naya kar sakte he 😚😚"
"Konsi nayi nayi positions try kar sakte he 😘😘"



Puneet :-
"Are bs bhi karo"
"Chalo ab jao"
"Baad me baat karte he"
"Kal college he mera to sona padega 😚"


Amol :-
"Ok love ❤️"
"Bye"
"Good night"
"Love u 😍😍😘"


Puneet :-
"Bye"
"Love u 2"
"😚😘😍"




        पुनीत तो अपना mobile side में रख कर सो गया। लेकिन अमोल को अभी कहां नींद आने वाली थी। अमोल ने अभी तक प्रज्वल को आज के बारे में कहां बताया था। प्रज्वल को जलाने के लिए, अमोल ने थोड़ा बहुत बढ़ा चढ़ाकर, पूरा किस्सा प्रज्वल से message में शेयर किया। और यूं ही facebook पर time paas करते हुए उसके हाथ अचानक रुक गए। और उसने  किसी को एक message किया।



Rahul :-
"Hey"
"I like ur pics 😘"



       अब शायद आप समझ ही गए होंगे कि यह message राहुल या अमोल ने किसे और क्यों किया होगा। आगे यह chatting क्या मोड़ लेती है, पुनीत का क्या होता है, यह सब शायद हम सभी जानते ही हैं। हमें भी शायद कभी ना कभी, किसी ना किसी ने ऐसा message किया ही होगा। और शायद यह कहानी पढ़ने वालों में कुछ लोग ऐसे भी होंगे जिन्होंने ऐसा message किसी को भेजा भी होगा। यह कहानी लिखने का उद्देश्य किसी को सही और किसी को गलत दिखाना नहीं था। मैं बस दिखाना चाहता था आज की सच्चाई। आज अगर आप अपना messenger खोलें तो आपको सैंकडों chat heads मिल जाएंगे जिनकी chat आज भी अधूरी पड़ी होगी। या जिन लोगों से हमने कभी बहुत अच्छी chat की हुई होगी, उन्हें आज हम "hi" तक नहीं बोलते होंगे। आज आपके messenger में कम से कम एक message तो ऐसा जरूर होगा, जो आपसे मिलना चाहता होगा। कोई आपके साथ फोन पर बात करना चाह रहा होगा। कोई आपके साथ relationship में जाना चाहता होगा। या कोई बस आपके साथ sex करना चाहता होगा। और आप सभी यह सच भी जानते होंगे कि ये सभी chat कैसे end होंगी, या हो जाएंगी।



          क्या आप जानते हैं कि आज हमें लैला मजनू, हीर रांझा, सोनी महिवाल, के जैसी कहानियां और उनके जैसा प्यार क्यों नहीं दिखता। ऐसा नहीं है कि अब ऐसा प्यार नहीं होता, या ऐसे लोग नहीं होते, बस फर्क इतना है कि अब हम इनके बारे में सुनना नहीं चाहते, पड़ना नहीं चाहते, बात नहीं करना चाहते। आज ज्यादातर लोग सच्चे प्यार से ज्यादा instant love में भरोसा रखते है। आपने कितने ही लोग देखे होंगे जो facebook पर post डाल कर या आपको message कर के, relationship ऐसे ढूंढ रहे होते हैं, जैसे बाजार में खिलौना। और आप ऐसे लोगों को भी जरूर जानते होंगे जिनका यह नया वाला relationship कितने दिन चलेगा आप उंगलियों पर बता पाने में सक्षम होंगे।



         तो इसका मतलब यह नहीं कि आज प्यार की परिभाषा ही बदल गई है। प्यार तो बस प्यार होता है, ना इसका कोई रंग होता है, ना ही उसका कोई size। लेकिन आज की सबसे बड़ी समस्या ही यही है, कि अब प्यार में रंग भी मायने रखता है, और size भी। अब प्यार को ढूंढा जाता है, उसे परखा जाता है, तोला जाता है, और अगर किसी कसौटी पर वह प्यार ना कसा जा सके, तो आज नया प्यार बाजार में ढूंढने और प्यार पाने वालों की कोई कमी नहीं है।


 
        आज हमारे आसपास की हर चीज के रंग रूप बदल रहे हैं। और शायद यह जरूरी भी है। लेकिन इन सभी के बीच कुछ भावनाएं ऐसी हैं, जो यदि ना बदली जाए, तो ही वे सही मायने में फल-फूल सकती हैं। और उसमें से एक है प्यार।  अगर हम प्यार को सिर्फ प्यार रहने दें, तो शायद हमारी इस अधूरी कहानी को भी पूरा किया जा सकेगा। और शायद इससे प्यार अपने असली रूप में लौट सकेगा।




         आप आज के इस नए प्यार के बारे में क्या सोचते हैं अपने विचार मुझे जरूर बताएं।


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Lots of love
Yuvraaj ❤️

   
     



   
   






Wednesday, June 3, 2020

कहानी

        Hello friends i am again here to tell you some another story, this is the story about today's world. How the human beings thinks now and how they behave with other ones. Hope you like my this is story as my previous ones.


Romeo Juliet, लैला मजनू , हीर रांझा  ये केवल नाम नहीं है, बल्कि ये सभी वो एहसास हैं, वो भावनाएं हैं, जो हर किसी इंसान के अंदर कभी ना कभी किसी ना किसी समय अवश्य जागृत होती हैं। ये एहसास है प्यार का एहसास, एक ऐसा प्यार जो दो इंसानों को दिल से जोड़ता है, एक ऐसा बंधन जो ना दिखाई देते हुए भी दो इंसानों को कभी एक दूसरे से दूर नहीं जाने देता है।  लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस तरीके के कहानी किस्से अब हमें क्यों नहीं सुनाई देते। अब क्यों हमें कोई लैला मजनू नहीं दिखाई देते, क्यों आज के जमाने में प्यार ने अपनी परिभाषा बदल ली है। चलिए मैं आपको एक कहानी सुनाता हूं एक "अधूरी कहानी" वैसे तो यह कहानी अधूरी है लेकिन यह कहानी आज के समय में प्यार के बदलती परिभाषा को दर्शाती है। अब वैसे तो यह कहानी किसी भी शहर की हो सकती है और किन्हीं भी दो लोगों के बीच की हो सकती है चाहे वह लड़का हो या लड़की, लेकिन मैं इस gay community से belong  करता हूं, तो स्वाभाविक है कि मैं अपनी कहानी के किरदारों को अपनी community से ही चुनूँगा। तो चलिए शुरू करते हैं "कहानी"।


       किसी भी कहानी मे सबसे अहम भूमिका निभाते हैं, उसके किरदार। यह किरदार ही किसी भी कहानी को अमर और यादगार बनाने में सक्षम होते हैं। तो आइए आपको मिलवाऊं मैं अपनी इस कहानी के किरदारों से। यूं तो किसी भी कहानी को पूर्ण करने में कई किरदारों का सहयोग होता है लेकिन कुछ किरदार ऐसे होते हैं, जिनके इर्द-गिर्द ही सारी कहानी गढ़ी और लिखी जाती है, ऐसे ही दो महत्वपूर्ण किरदार हैं, अमोल और पुनीत। तो चलिए आपका परिचय कराते हैं अमोल और पुनीत से।


       अमोल पुणे के अंजनी नगर के एक आलीशान घर में पला बडा, अपने family business का इकलौता वारिस है। इकलौते होने की वजह से बड़े ही लाड प्यार से हमेशा घिरा रहता है। "श्री इंटरप्राइजेज" पुणे की केमिकल इंडस्ट्री का एक जाना माना नाम है, जिसे यहां तक पहुंचाने में अमोल के पिता और दादा की कड़ी मेहनत का नतीजा है। अब इसके आगे के सफर को और ऊंचाइयों पर पहुंचाने का दारोमदार अमोल के कंधों पर है। अमोल "विश्वकर्मा इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी" से अपने केमिकल इंजीनियरिंग के द्वितीय वर्ष में है।  यूं तो अमोल को पढ़ाई लिखाई का कोई ज्यादा शौक नहीं है, लेकिन घरवालों के दबाव में वह थोड़ा बहुत पढ़ भी लेता है। लेकिन उसका मन बस दोस्तों के साथ पार्टी करने और यहां वहां आवारागर्दी करने में ही लगा रहता था। अमोल बहुत ही ज़िद्दी, पैसों की वजह से बिगड़ा हुआ, घमंडी, एक बार अगर कुछ ठान ले तो उसे पूरा करके ही दम लेने वाला लड़का है, लेकिन यह गुस्सा यह जुनून उसने आज तक किसी अच्छे काम के लिए तो नहीं ही दिखाया था। देखने में कुछ खास तो ना था, लेकिन अपने पापा के पैसों की वजह से स्कूल - कॉलेज की सभी लड़कियों के बीच काफी popular था। दिखावे के लिए अमूल की भी स्कूल में कई गर्लफ्रेंड रह चुकी थी,  और अभी कॉलेज में भी केतकी के साथ facebook का relationship status complicated था।  दिखावे के लिए इसलिए क्योंकि अमोल के जीवन का यह सबसे बड़ा secret था, कि उसे लड़कियों में जरा भी दिलचस्पी नहीं थी। लेकिन इस बात को एक गहरे राज की तरह कहीं छुपा कर रखा हुआ था, और दिखावे के लिए लड़कियों के साथ घूम फिरा करता था।


      आइए अब आपको मिलाते हैं कहानी के दूसरे किरदार, पुनीत से। भोली सूरत, घुंघराले बाल, हल्की भूरी आंखें, आंखों को घेरे काली घनी पलकें, चौड़ी भवें, तीखी नाक, हल्के लाल होठ, सुनहरा दुबला शरीर । और क्या ही तारीफ करूं पुनीत के नैन नक्श की । इन सब के ऊपर वह मनमोहक मुस्कुराहट। पुनीत को अगर कोई एक बार देख ले तो उसकी छवि को इतनी आसानी से नहीं भुला सकता । और पुनीत की तारीफ बस यहीं खत्म नहीं होती, शारीरिक सुंदरता के कहीं ऊपर है, पुनीत के स्वभाव की निर्मलता उसकी सादगी और भोलापन। यह सभी खूबियां पुनीत को अपनी मां से विरासत में ही मिली है। पुनीत के पिता पुणे एयरपोर्ट पर ग्राउंड स्टाफ की नौकरी करते हैं। और अपनी पत्नी और बेटे के साथ विमान नगर के एक क्वार्टर में रहते हैं। पुनीत के माता पिता का बस एक ही सपना है कि उनका बेटा एक पायलट बन जाए। तो अपने सपने को पूरा करने के लिए अपने जीवन भर की जमा पूंजी से पुनीत का दाखिला पुणे इंस्टीट्यूट ऑफ एविएशन टेक्नोलॉजी में पायलट के कोर्स में करा दिया गया है। पुनीत भी पढ़ने लिखने में बहुत होशियार है, तो उसे भी अपने मां-बाप के सपने को पूरा करने में उतनी ही दिलचस्पी है, और वह बहुत मेहनत भी करता है, अपने मां-बाप की आकांक्षाओं पर खरा उतरने की । पुनीत अपने माता-पिता की आर्थिक स्थिति को अच्छे से समझता है, इसलिए उसने उनसे कभी भी कोई गैर जरूरी चीजें नहीं मांगी और ना ही कभी कोई शौक रखने के बारे में सोचा। स्कूल से सीधे घर और घर से सीधे स्कूल बस यही उसकी दिनचर्या रहा करती थी। उसके अच्छे स्वभाव के कारण उसके कई दोस्त भी थे, लेकिन वे सभी स्कूल तक ही सीमित थे। कॉलेज में भी उसके कुछ दोस्त बन गए थे और कई लड़कियों ने उसे रिझाने की कोशिश भी की थी। लेकिन पुनीत के सामने उसके माता-पिता का लक्ष्य साफ-साफ चमकता दिखता था। लड़कियों पर ध्यान ना देने की एक वजह और थी, उसकी दिलचस्पी। पुनीत को जबसे होश संभाला तबसे ही लड़कों में ही रुचि थी, और वह कई लड़कों को भी चोरी छुपे देखता भी था। लेकिन कभी किसी लड़के से जाकर मिलना और उसे अपने मन की बात बताना यह पुनीत के बस की बात नहीं थी।


      इस कहानी के हमारे दोनों प्रमुख किरदार हर तरीके से एक दूसरे से प्रथक हैं, लेकिन दोनों में एक ही बात समान है, जो इस कहानी की नींव है, वह है facebook! जी हां ! पुनीत और अमोल दोनो GAY हैं, और अपनी अपनी दिनचर्या में से थोड़ा सा समय निकाल कर facebook का इस्तेमाल करते हैं, दूसरे लोगों से chatting करते हैं, लेकिन इस समानता में भी कई असमानताएं हैं। जहां पुनीत अपनी real id से ही लोगों से जुड़ता है, उनसे chatting करता है, लेकिन उसका उद्देश्य किसी GAY साथी को ढूंढना नहीं है। वह तो बस थोड़े समय के मनोरंजन और अपने mind को fresh करने के लिए ऐसा करता है। वहीं अमोल का एक secret fake account है, जिससे वह केवल पुणे के GAY boys से ही connect करता है, उनसे chatting करता है, date fix करता है, और उसका chatting करने का एक ही उद्देश्य है, physical relation बनाना।


        जहां पुनीत पूरे दिन में मात्र 10 या 15 मिनट के लिए facebook इस्तेमाल करता है, एक-दो messages का reply देता है, वही अमोल अपनी "Rahul Sharma" नाम के fake account पर घंटों बिताता है, नए नए friends बनाता है, कई दिनों तक उनसे chatting करता है, फिर उनके साथ date पर जाता है, और फिर उनके place पर जाकर या उन्हें अपने room पर बुलाकर उनके साथ physical relation बनाता है, इतना हो जाने के बाद अगर उसे कोई लड़का पसंद आता है, तो तो उसे अपनी friend list में रखता है, पर अगर उसे कोई लड़का पसंद ना आए या उसे irritate करे तो तुरंत उसे unfriend कर block करने में जरा सी भी देर नहीं करता है। जहां पुनीत के लिए facebook, chatting time paas का जरिया है वही अमोल के लिए paas time का।


      एक दिन यूं ही facebook चलाते वक्त अमोल को friend suggestions में पुनीत की profile दिख गई। पुनीत की profile picture पर लगी पुनीत की smile करते हुए वाली photo ने अमोल को इतना आकर्षित किया, कि अमोल उस फोटो से अपनी नजरें ही नहीं हटा पाया। उसने पुनीत की profile को खोला और एक-एक करके पुनीत की profile में पड़ी उसकी सारी photos को देखता रहा। यह जानते हुए भी कि यह पुनीत का real account है और बिना इस बात की चिंता करे, कि पुनीत भी GAY है या नहीं, अमोल ने पुनीत को friend request send कर दी और एक message भी कर दिया।



Rahul :- "Hi 🖐️"
               "I like ur pics 😍😍"


         और फिर अमोल बस इंतजार करता रहा पुनीत के message का। बार-बार messenger on करता वहां पुनीत का message ना पाकर facebook open करता। पुनीत की profile पर जाता, उसकी सारी picture's को बार-बार देखता, यह सब कम से कम 30 से 35 बार कर चुका था, लेकिन उस पूरे दिन पुनीत का कोई भी message नहीं आया।


       अगले दिन, सुबह उठते ही अमोल ने सबसे पहले अपना  messenger check किया, लेकिन अभी भी पुनीत का कोई reply नहीं आया था। अपनी दिनचर्या को आगे बढ़ाते हुए अमोल कॉलेज पहुंचा, लेकिन आज केतकी की तरफ देखने से ज्यादा अमोल अपने मोबाइल की ओर देख रहा था । वह बस पुनीत के message का इंतजार कर रहा था। ऐसा आज तक अमोल ने किसी के लिए भी नहीं किया था, लेकिन इस जिज्ञासा का कारण अमोल को भी नहीं पता था। शायद पुनीत का वह मासूम चेहरा, वह प्यारी सी मुस्कुराहट और वह चहकती आंखें, अमोल के दिल में घर कर गई थी।


       दोपहर को canteen में जब अमोल ने फिर से mobile check किआ, तो वो थोड़ा सा परेशान हुआ। क्योंकि पुनीत ने अमोल का message seen कर लिया था, लेकिन कोई reply नही दिया था। और उसी परेशानी में अमोल ने पुनीत को एक और message कर दिया।


Rahul :- "Kya hua?"
               "Message seen kar lia, pr koi reply nhi                   dia 🤔 ?"


     उसके बाद अमोल ने ना जाने कितनी बार अपना messenger फिर से check किआ, पर उसे पुनीत का कोई भी reply नही मिला, और ना ही पुनीत ने अभी तक उसके दूसरे message को seen किआ था।


     वहीं जब पुनीत ने अपना facebook खोला था, तो उसे एक अनजान व्यक्ति "Rahul Sharma" कि friend request आई थी। कोई भी mutual friends ना होने के कारण, जब पुनीत ने उस profile पर click किया तो वही सब pictures और videos देखने को मिले, जो वो कई बार चोरी छुपे internet पर देखता था। वह सारे videos और pictures यूँ  खुलेआम किसी की facebook profile पर देखकर पुनीत डर गया था। और उसने तुरंत उस "Rahul Sharma" की friend request को delete कर दिया और जब उसने messenger खोला, तो वहां भी "Rahul Sharma" के message को पढ़कर अनदेखा करना ही उचित समझा। ऐसा पुनीत के साथ पहली बार हुआ था, कि उसके जैसी पसंद रखने वाले किसी लड़के की उसने facebook पर profile देखी हो, और तो और उस लड़के ने पुनीत को ढूंढ कर friend request भी भेजी हो। यह सब पुनीत के लिए नया था और एक सदमे की तरह था। उसे डर था कि कहीं उसने जो राज़ अपने बारे में छुपा कर रखा था, वह कहीं सबके सामने ना आ जाए। और इसी डर से पुनीत में फिर अगले 7 दिनों तक अपना facebook open ही नहीं किया।



       दूसरी तरफ अमोल कि पुनीत से बात करने, उससे मिलने की इच्छा बढ़ती ही जा रही थी। और यह अमोल के साथ भी पहली बार हो रहा था, कि उसे किसी के लिए इतना attraction हो रहा हो, कि अब उसने पुनीत की pictures को अपने मोबाइल में save कर लिया था, और इन दिनों में कई बार केवल उन pictures को देखकर ही हस्तमैथुन कर चुका था। लेकिन पुनीत का इस तरह से अमोल को ignore करना भी अब अमोल को परेशान करने लगा था। इन 7 दिनों में पुनीत का कोई भी reply ना पाकर, अमोल frustrated होने लगा था, और एक stocker की तरह ना जाने कितनी बार पुनीत की facebook profile देख चुका था। उसके सभी friends की भी profile check कर चुका था। पुनीत की date of birth, schooling और अभी किस कॉलेज में है, सारी information जो facebook पर available थी, अमोल को मुंह जबानी याद थी। एक बार तो अमोल ने पुनीत के कॉलेज जाने के बारे में भी सोचा और यह सारा पागलपन बस उस एक फोटो की वजह से जो उसने अकस्मात ही देखी थी। यह इतना गहरा आकर्षण, ऐसा दीवानापन किस लिए है, यह जानने से ज्यादा अभी अमोल को बस पुनीत के बारे में जानने में दिलचस्पी थी। और अमोल इस जुनूनियत के चलते पुनीत के कॉलेज भी पहुंच ही गया होता, अगर उसके द्वारा भेजा गया दूसरा message भी 7 दिन बाद, पुनीत के द्वारा seen करके ignore न किया गया होता।


      पुनीत के ऐसा दोबारा करने से, अब अमोल को गुस्सा आने लगा था। और इसी गुस्से में उसने एक और message पुनीत को कर दिया।


Rahul :- "Kya samjhte ho khud ko?"
               "Itna bhaw khane ki koi jarrorat nhi"
               "Tum jaise 1000 ghumte he mere aage
                 Piche, marte he bs mere sath ek raat                     bitane ke liye"
               "Tumhe pata nhi kis baat ka ghamand                   he"
               "Ye last time he! Agar tumne mere msg                   ka reply nhi dia"
               "To me tumhare college aa kar sabke                     samne tumhe kiss karunga, or tum                       mujhe rok bhi nhi paoge."



           अमोल ने यह message गुस्से में पुनीत को कर तो दिया था, लेकिन वह सच में ऐसा कुछ करने वाला नहीं था। वह सिर्फ पुनीत को थोड़ा डराना चाहता था। जिससे वह पुनीत का reply पा सके, और उन दोनों की बात होने लगे। बाकी फिर आगे कैसे पुनीत को पटाना है, यह तो अमोल के लिए बहुत आसान काम था। ऐसा अमोल ना जाने कितनी बार कर चुका था। पुणे शहर का एक भी ऐसा GAY नहीं था, जो अमोल से ना मिला हो। और जो अमोल को पसंद आ जाता था, वह उसके साथ कुछ समय के लिए relationship में भी रह लेता था, लेकिन अमोल एक बंद पिंजरे में रहने वाला शख्स बिल्कुल नहीं है। उसका सबसे लंबा चलने वाला relationship मात्र 2 महीने का था। जैसे अमोल ऊब जाता वह तुरंत किसी और की परवाह किए बिना आगे बढ़ जाता। ऐसे बहुत कम ही लड़के थे पुणे में जिनका दिल अमोल ने ना तोड़ा हो, उनमें से एक था "प्रज्वल"।


        प्रज्वल भी पुणे का था, जिससे अमोल facebook से ही मिला था। प्रज्वल की भी एक fake id थी, जो "Rohit Sharma" के नाम से थी। इस fake id से प्रज्वल भी वही सारे काम करता था, जो अमोल किया करता था। अमोल ने प्रज्वल से chatting तो सिर्फ अपने एक मकसद के लिए ही शुरू की थी। लेकिन प्रज्वल के साथ अमोल को वह feeling नहीं आई, इसलिए अमोल ने प्रज्वल को friend zone में ही रखा। लेकिन धीरे-धीरे अमोल और प्रज्वल की दोस्ती गहरी होती चली गई। क्योंकि प्रज्वल ही एक ऐसा इंसान था, जिससे अमोल अपने मन की वह सारी बातें कर सकता था, जो वह ना तो अपने घरवालों और ना ही बाकी किसी दोस्त को बता भी सकता था। इसलिए प्रज्वल धीरे-धीरे अमोल की जिंदगी में एक खास जगह तक पहुंच गया था। अमोल अपने हर relationship को प्रज्वल के साथ बिना किसी पर्दे के share करता था। उसकी पहली date से लेकर sex date तक की सारी जानकारी प्रज्वल को भी होती थी। इसका एक कारण ये भी था, कि अमोल की pic देख कर जब कोई लड़का उसे reject कर देता था, तो उस लड़के को वापस से अमोल की लाइफ में लाने का काम प्रज्वल का ही था।  लेकिन पुनीत वाला किस्सा, इन 8 - 10 दिनों की अमोल की तड़प, यह सब अभी तक प्रज्वल से छुपा हुआ था। अमोल अभी पुनीत को लेकर sure नहीं था, इसलिए उसने प्रज्वल को पुनीत के बारे में कुछ नही बताया था।


       प्रज्वल  अपनी normal life में बहुत ही सीधा-साधा, शांत, मासूम दिखने वाला लड़का था। लेकिन जैसे ही वह अपना fake account open करता था, वह किसी दूसरे शख्स में ही बदल जाता था। किसी को भी गंदा comment करना, अशलील message भेजना, सिर्फ sex की ही बातें करना और भी न जाने क्या-क्या। प्रज्वल किसी से भी chatting करता था तो उसके यह तीन message fix होते थे।


Rohit :- "Hi"
              "Age"
              "Likes"


      अगर यह 3 messages  का उसे उचित reply मिलता था, तो सीधा वह sex date fix करता था। शायद इसलिए अमोल से प्रज्वल की इतनी बनती है, क्योंकि लगभग दोनों की विचारधाराएं एक जैसी हैं। बस अंतर इतना है, कि प्रज्वल सीधे- साफ शब्दों का इस्तेमाल कर इसे sex date कहता है, और अमोल relationship के नाम पर वही सब काम करता है। दोनों की सोच काफी हद तक एक जैसी ही थी। प्रज्वल को भी अमोल बस एक अच्छे दोस्त के रूप में ही पसंद था, और यह बात प्रज्वल अमोल से chatting करते वक्त ही समझ गया था, और आज भी दोनों एक दूसरे के बहुत अच्छे दोस्त हैं। दिन में कम से कम एक बार फोन पर बात जरूर करते हैं। कभी किसी facebook के friend के बारे में discuss करने के लिए, कभी कहीं घूमने फिरने का प्लान बनाने के लिए । इन 8-10 दिनों में भी प्रज्वल ने अमोल से कई बार बात की, और अमोल के बात करने के अंदाज से ही, अमोल से उसकी परेशानी के बारे में भी पूछा, लेकिन अमोल ने एक बार भी पुनीत का जिक्र प्रज्वल से नहीं किया।


      वहीं जब पुनीत ने राहुल का वह message पढ़ा तो वह घबरा गया। उसे समझ ही नहीं आया कि वह क्या करे।  reply दे या ignore करे। लेकिन अगर राहुल ने वैसा ही किया, जैसा वह कह रहा है, तो उसकी तो बहुत बदनामी हो जाएगी। इसी कश्मकश में पुनीत ने राहुल के message का reply देना ही उचित समझा। कम-से-कम इससे ही, यह बात केवल उन दोनों के बीच ही तो रहेगी। पुनीत ने घबराते हुए राहुल को message किया।


Puneet :- "Hello Rahul"
                 "Mujhe nhi pata tum mujhe kaise                           jante ho."
                 "Pr plz mere college me mera                                   tamasha mt banana."
                 "Tum jaisa kahoge, me waisa karne                         ko taiyar hu."


       पुनीत के message send करते ही, अमोल ने उसे पढ़ा। पुनीत के message से एक बात तो साफ थी, कि अमोल जो पुनीत से करवाना चाहता था, उसे डरा कर chat करना चाहता था, उसमें वह सफल रहा। लेकिन पुनीत के message से एक बात और साफ - साफ झलक रही थी, कि पुनीत बहुत ज्यादा डरा हुआ है। और अमोल ऐसा तो बिल्कुल नहीं करना चाह रहा था। पुनीत की हालत को समझते हुए, अमोल ने उसे तुरंत reply किआ।


Rahul :- "Hey ! I'm sorry 🙉"
               "Agar mene tumhe dara dia ho to"
               "Me to bs tumse chat karna chahta tha                  😊"
               "Isliye gusse me thoda jyada hi likh                         dia"
               "I'm really very sorry 🙉🙉😘"


       पुनीत अभी online ही था, और राहुल का message पाकर उसने तुरंत उसे पढ़ा, और उसे समझ नहीं आया कि, क्या यह एक ही इंसान के message है, एक में तो इतने गुस्से में मुझे बदनाम करने की बात कर रहा है, और दूसरे message में मुझसे माफी मांग रहा है। लेकिन अपनी सारी जिज्ञासा को किनारे कर उसने राहुल से chatting जारी रखी, क्योंकि वह फिर से राहुल को गुस्सा नहीं दिलाना चाहता था।



Puneet :- "It's ok"
                 "But jab tumne mujhse wo sab bola                         to me dar gaya tha"
                 "Agar tum bura na mano"
                 "To kya me tumse ek baat pooch                             sakta hu???"

Rahul :- "Again I'm sorry 🙉"
               "Haan me tumhe darana to chahta tha                   lekin itna jyada bhi nhi ki tum mere                     liye kuch bhi karne ko taiyar ho jao                     🤣🤣"
                "I'm sorry jaan 😍"

Puneet :- "It's ok"
                 "Kya me ek baat poochu???"

Rahul :- "Sorry, bilkul pucho meri jaan 😍"

Puneet :- "Kya tum mujhe jante ho???"

Rahul :- "Nahi my love, lekin janna chahta hu                    😘😍"

Puneet :- "Fir esa q likha ki mujhe kiss                                     karoge??? Tumhe kaise pata???"

Rahul :- "Wo to mene ese hi likh dia tha, tumhe                   darane ke liye 😂😂"
               "Or mujhe kya kaise pata?"
               "Kya bol rahe ho?"

Puneet :- "Kuch nhi"
                 "Me ye pooch raha hu ki tum mujhe                       hi q darana chah rahe the, wo bhi                         kiss karke???"

Rahul :- "Bataya to tha, ooper message check                       karo"
               "Mujhe tumhari pics acchi lagi 😍😘"

Puneet :- "Mtlb tumhe fb pr kisi ki bhi pics                             acchi lagegi to tum use ja kar kiss                         karoge???"

Rahul :- "Nahi esa nahi he meri jaan"
               "Ek kaam karte he, hamari chatting ki                   shuruat hi galat hui he, firse shuru                       karte he"
               "Hello, I'm rahul"

Puneet :- "Me ye nhi bol raha hu"
                 "Mere kehne ka mtlb he ki fb pr itne                       sare logo me se me hi kaise mila                           tumhe??? Tumhe mere baare me                           kaise pata chala???"

Rahul :- "Kya pata chala jaanu 🤔"
               "Kya bol rahe ho tum, mujhe kuch                           samajh nahi aa raha?"



          राहुल का यह message पढ़कर पुनीत offline हो गया। पुनीत को यह समझ नहीं आ रहा था, कि राहुल को उसके GAY होने के बारे में कैसे पता चला। और उधर अमोल को यह समझ नहीं आ रहा था, कि उसे ऐसा क्या पता चल गया है, जो पुनीत छुपा रहा है। चूंकि उसे ऐसा कुछ पता नहीं है, लेकिन पुनीत को तो यही लग रहा है, कि उसे पुनीत के बारे में कुछ ऐसा पता है, जो पुनीत नहीं चाहता कि किसी को पता चले।



         उस दिन दोनों ही इसी गुत्थी को सुलझाते रहे, कि किसे क्या पता है, और किसे क्या नहीं। लेकिन इन सबके बीच पुनीत को राहुल का बात करने का अंदाज और बीच-बीच में खुद को "jaan" कहना, उसे काफी पसंद आ गया था। और अमोल को भी अब केवल पुनीत की फोटो ही नहीं, बल्कि उसकी बातें भी मनमोहक लगने लगी थी। रात को सोते समय अमोल फिर से पुनीत और उसकी chat पढ़ने लगा और ऐसा करते वक्त उसके चेहरे पर अनायास ही एक मुस्कान छा गई। फिर एकाएक वह मुस्कान गायब हुई, और उसके माथे और भवों की सिकुड़न, ये बात साफ बता रही है, की वो कुछ गहन सोच में है। दरअसल अमोल, पुनीत की उलझी बातों को सुलझाने की कोशिश कर रहा था, और शायद उसने ऐसा कर भी लिया था।



       दूसरे दिन नाश्ते की टेबल पर अमोल,  पुनीत के message ही पढ़ रहा था, कि अचानक पुनीत के भी online आने की खबर उस green light ने अमोल को दे दी।


Rahul :- "Good morning my sunshine ❤️"

Puneet :- "Very good morning"
                 "Hey, me kya soch raha tha, ki tum                         sahi keh rahe the"
                 "Hamari shuruat sahi nhi hui"
                 "Hello"
                 "I'm puneet"

Rahul :- "I know u r gay!"

Puneet :- "Kya?"
                 "Tumhe kaise pata???"

Rahul :- "Tumhari kal ki chat ke baad mene                         raat bhar socha ki tum kya kehna                         chah rahe the"
                "Tb mujhe samajh aya"
                "Or ye to acchi baat he"
                "I'm also gay"

Puneet :- "Yahi to me kal tumse poochna chah                       raha tha, ki tumhe kaise pata chala                       mere baare me???"

Rahul :- "Mujhe nhi pata tha my love, mujhe to                   bs tumhari pictures acchi lagi thi, or                     me attract ho gaya,or me khud ko rok                   nhi paya"
               "Or tb mujhe nhi pata tha, or na mene                   is baare me socha tha ki tum bhi gay                     hoge ya nhi"
               "Mujhe to kal raat ko samjh aya ki tum                   mujhse ye poochna chah rahe the ki                     mujhe kaise pata chala ki tum gay ho"

Puneet :- "Haan, me yahi poochna chahta tha"
                 "Qki mene aaj tk kisi ko ye jahir nhi                       hone dia ki me gay hu or jab mene                       tumhari profile se ayi friend request                     or tumhare messages dekhe"
                 "To me isiliye dar gaya tha ki kahi                           mere baare me kisi ko pata na chal                       jaye"
                 "Isliye me tumhe ignore kar raha tha"
                 "Ye sab mere saath pehli bar ho raha                     he"

Rahul :- "Don't worry meri jaan, tumhara ye                       raaz mere sath safe rahega 😘😘"

Puneet :- "Chalo bye! Mujhe college jana he                           baad me baat karta hu"

Rahul :- "Ok bye my love ❤️😍😘"


       College में पुनीत का सारा ध्यान पढ़ाई से ज्यादा राहुल की मीठी मीठी बातों की यादों में था। पुनीत मुस्कुराते हुए सोच रहा था, कि उसने जो भी राहुल के बारे में कल तक सोचा, शायद वह सच ना हो। हो सकता है राहुल लोगों की मजबूरी का फायदा उठाने वाला इंसान ना होकर एक साफ दिल का और अच्छा लड़का हो। शायद उसने सच में ही गुस्से में college में सबके सामने उसे kiss करने की बात कही हो। और खुद को और राहुल को kiss करने का ख्याल आते ही, पुनीत blush करने लगा। पुनीत की आँखों मे अलग ही चमक आ गयी थी, ये सब सोचते हुए। अब तो वो बस college खत्म होने का इंतज़ार करने लगा।


     दोपहर में घर पँहुचते ही, पुनीत ने सबसे पहले राहुल को ही message किआ।

Puneet :- "Hello rahul"
                 "Hws u???"


    और उधर अमोल तो मानो पुनीत के message के इंतज़ार में ही बैठा था। पुनीत का message पा कर अमोल ने भी chatting शुरू कर दी।


Rahul :- "I'm f9 my love"
               "How's ur day?"

Puneet :- "It's good, as usual"
                 "What about u???"

Rahul :- "I'm just waiting for ur msg 😍😍"

Puneet :- "Accha, or esa q???"

Rahul :- "Jabse tumhari pic dekhi he, tabse bs                    tumhare hi khyalo me dooba hua hu                    😍"
               "Har waqt bs tumhare bare me hi                           sochta rehta hu, tumse baat karne ka                   intezar karta rehta hu ❤️😘"

Puneet :- "Accha!! Or ye sab bs ek pic ki wajah                      se???"

Rahul :- "Ab esa q he ye to mujhe nhi pata"
               "Lekin tumhari ankho ki kashish ne                       mujhe tumhara diwana bana dia he                     meri jaan 😍❤️"

Puneet :- "Sorry dear, lekin abhi mujhe jana                         hoga, me baad me baat karta hu"
                 "Ok bye"

Rahul :- "Ok my love"
               "Wait karunga tumhare msg ka 😍😘"


       पुनीत को कोई काम तो नही था, लेकिन वो राहुल की बातों से थोड़ा हड़बड़ा गया था। इसलिए उससे झूठ बोल कर, offline आ गया। एक तो ये सब पुनीत के साथ पहली बार हो रहा था। और राहुल के बात करने का अंदाज, कहीं ना कहीं उसे अच्छा भी लग रहा था, और वो थोड़ा बहुत घबरा भी रहा था।




        What is going between them, is amol really in love? Or he just doing time paas. What's the next step taken by puneet than? Please stay connected with puneet and amol to know more. Second part is out soon.





Lots of love
Yuvraaj ❤️


      

Shadi.Com Part - III

Hello friends,                      If you directly landed on this page than I must tell you, please read it's first two parts, than you...